किशोरवय उम्र में पैसे की खातिर सेक्स? कृपया अपने आसपास के माहौल पर नज़र डालिए! 9 अप्रैल 2015

मैं पिछले दिनों से अपने जोड़ीदारों के साथ धोखा करने वालों पर लिखता रहा हूँ और कई सत्य कथाएं भी सुनाई हैं। मैंने ज़िक्र किया था कि भारत की अरेंज्ड मैरेज (प्रायोजित विवाहों) की परंपरा में क्या-क्या होता है और यहाँ सेक्स को लेकर समाज में व्याप्त वर्जनाओं पर भी बात की थी। स्वाभाविक ही, इन्हीं कारणों से ये कहानियाँ इतनी मज़ेदार लगती हैं-लेकिन उसका सारा हास्य तब समाप्त हो जाता है जब इस दमन का एक अन्य नतीजा भी सामने आता है: जब किशोर लड़कियाँ यौन संबंध बनाना शुरू कर देती हैं, क्योंकि उन्हें पैसा कमाने का यह आसान जरिया नज़र आता है।

दुर्भाग्य से ऐसा वास्तव में होता है और जब कि हम इस विषय में अक्सर सुनते रहते हैं, इस तथ्य को खुलेआम स्वीकार करने वाला कोई नहीं होता। लोग हमेशा किसी अनुपस्थित व्यक्ति के बारे में बात करते हैं लेकिन सीधी बात हमेशा सिर हिलाने तक ही पहुँच पाती है। निश्चय ही यह एक प्रकार की वेश्यावृत्ति ही है और सभी जानते और मानते हैं कि यह उचित नहीं है। फिर भी यह होता रहता है और महज अपवाद स्वरूप नहीं बल्कि व्यापक रूप से हो रहा है।

ये लड़कियाँ उन घरों से आती हैं, जिनके यहाँ पैसे की तंगी तो होती है लेकिन जो वास्तव में बहुत गरीब भी नहीं होते। उदाहरण के लिए, वे समाज के निम्न-मध्यवर्ग से आती हैं या उच्च-निम्नवर्ग से। मैं समाज के उस वर्ग की बात नहीं कर रहा हूँ, जिन्हें पेट भरने के लिए कैसे भी, कहीं से भी पैसे कमाने की मजबूरी होती है। नहीं, मैं उन लड़कियों की बात कर रहा हूँ, जो खुद यह तय करती हैं कि वे किसके साथ पैसे लेकर यौन संबंध कायम करेंगी, इसलिए नहीं कि इसके सिवा उनके पास कोई चारा नहीं है बल्कि सिर्फ इसलिए कि ऐसा करने पर उनके पास सामान्य से अधिक पैसा होगा!

अगर आप मुझसे पूछेंगे कि ये लड़कियाँ इस रास्ते पर कैसे पड़ जाती हैं, इस तरह की वेश्यावृत्ति का कारण क्या है तो मैं पूरे विश्वास के साथ सिर्फ एक बात कहूँगा: घर का माहौल! मेरे विचार में बच्चों की परवरिश और उनकी शिक्षा-दीक्षा वह सबसे महत्वपूर्ण चरण हैं, जो तय करते हैं कि किशोरावस्था और वयस्क जीवन में बच्चे कौन सी राह पकड़ेंगे।

मुझे यह भी लगता है कि बच्चे वही करते हैं जो वे देखते हैं और जब उनकी जानकारी में यह आता है कि उनके माता-पिता के भी कई सेक्स पार्टनर्स हैं तो वे सोचते हैं कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है! वे पुरुषों या स्त्रियॉं को आता-जाता देखते हैं। अगर वे यह देखें कि उनके माता-पिता परस्पर प्रेम में आबद्ध हैं तो वे भी अपने लिए वैसा ही पसंद करेंगे!

और अगर घर में पहले ही एक या दोनों अपने यौन संबंधों को छिपा रहे हैं तो तीसरे के लिए वही कर पाना कठिन नहीं है! जिस दंपति के बारे में मैंने आपको पहले बताया था, उनकी बेटी का प्रकरण इसी श्रेणी में आता है।

इसके अलावा माहौल और आसपास के लोग भी इस तरह के व्यवहार को प्रोत्साहित करने वाले ही होते हैं! एक तेरह साल की लड़की पैसे की कीमत जानती है और दुर्भाग्य से दिमाग भी ऐसा होता है कि आसानी से बरगलाया जा सके। उसके पास अधिक पैसे नहीं होते और स्वाभाविक ही, अगर मिल जाएँ तो उसे खुशी ही होगी-तो फिर जैसा उसकी माँ और उसके पिता करते हैं, वैसा ही वह भी क्यों न करे? इससे वह खुद भी कुछ कमा-धमा लेगी!

फिर हर प्रकार की यौन बातों के प्रति किशोर बच्चों का स्वाभाविक आकर्षण तो होता ही है! उनके शरीर का विकास हो रहा होता है, उनकी भावनाएँ, हसरतें और तमन्नाएँ परवान चढ़ रही होती हैं! यह प्राकृतिक है और इसके लिए आप उन्हें दोषी नहीं ठहरा सकते! कोई उन्हें इस विषय में कुछ बताए-समझाए, इसके पहले ही आसपास का माहौल उन्हें भ्रमित कर देता है क्योंकि इस समाज में जहाँ एक तरफ सेक्स पर बात करना भी वर्जित है, वहीं दूसरी तरफ वे देखते हैं कि हाथ में पैसे लिए बहुत से पुरुष उसके सामने कतार लगाए खड़े हैं!

अभिभावकों की चौकसी और देखरेख में कमी का ही मिला-जुला परिणाम हम अक्सर देखते हैं: कम उम्र लडकियाँ जिनके पास न जाने कहाँ से पैसे आ जाते हैं और समय-समय पर वे हर उम्र के लोगों के साथ दिखाई देती हैं।

तो प्रिय अभिभावकों, कृपा करके इस बारे में सोचिए कि आप क्या कर रहे हैं! न सिर्फ आप अपने और अपने साथी के साथ गलत कर रहे हैं बल्कि अपनी अगली नस्लों के साथ भी कर रहे हैं!

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