क्या सम्भोग के दौरान सम्पूर्ण संतुष्टि प्राप्त हो जाने पर पुरुषों की ऊर्जा क्षरित होती है? इस प्रश्न पर मेरा जवाब: 17 जून 2014

शहर:
लस पाल्मास डे ग्रान कनारिया
देश:
स्पेन

हमें ग्रान कनारिया में रहते हुए अब एक हफ्ता हो चुका है और हम इस बीच कुछ बहुत ही अच्छे कार्यक्रम प्रस्तुत कर चुके हैं! इनमें से सबसे पहला एक व्याख्यान था, जो एक बहुत लोकप्रिय विषय से सम्बंधित था: सेक्स और स्वतंत्रता। मैं इसे लोकप्रिय विषय कह रहा हूँ क्योंकि, जैसा इस विषय के साथ हमेशा होता रहा है, हॉल श्रोताओं से पूरा भरा हुआ था और हर कोई यह जानने के लिए उत्सुक था कि इस विषय पर मैं क्या कहने जा रहा हूँ। व्याख्यान के पश्चात् इतना समय था कि श्रोताओं के कुछ प्रतिप्रश्नों का समाधान किया जा सके और अगले कुछ दिनों तक मैं इस व्याख्यान और श्रोताओं के उन सवालों और उन पर दिए गए मेरे जवाबों पर चर्चा करता रहूँगा।

स्वाभाविक ही, इस व्याख्यान में मेरे द्वारा उठाया गया एक मसला ब्रह्मचर्य की अवधारणा के बारे में था। यह स्वतंत्रता विरोधी अवधारणा है, यह यौन की नैसर्गिक इच्छा के दमन का विचार है और इसका पालन करने पर होने वाले दुष्परिणामों की आप कल्पना भी नहीं कर सकते। हजारों साल से धर्म और समाज द्वारा सेक्स को एक प्रकार की वर्जना में बना दिया गया और उन्होंने ब्रह्मचर्य और परहेज को इस तरह से चित्रित किया जैसे वह कोई पवित्र जीवन-पद्धति हो। उन्होंने ब्रह्मचारी संतों और पुरोहितों को पवित्र और बेहतर इन्सानों की तरह प्रचारित किया-लेकिन इसका नतीजा इन्हीं तथाकथित ‘पवित्र’ व्यक्तियों द्वारा किए जाने वाले अनगिनत यौन दुराचारों, बलात्कारों और दूसरी बर्बरताओं के रूप में सामने आया! अक्सर यह अत्याचार भी उन पर किया जाता था, जो उन पर विश्वास किया करते थे, जो उन पर आश्रित थे। क्योंकि नैसर्गिक इच्छाओं का दमन किया जाता था तो उसे कहीं न कहीं बाहर निकलना ही था।

यह सब मैंने अपने व्याख्यान में कहा और उसके बाद प्रश्नोत्तर शुरू हुए: क्या पुरुष अपनी ऊर्जा खो नहीं देते जब वे कामोन्मत्त हो जाते हैं?

मैं जानता हूँ कि यौन क्रियाओं पर प्रतिबन्ध लगाने के पक्ष में धार्मिक लोग यही तर्क देते हैं, जिससे उन लोगों को बस में रखा जा सके भले ही इसके लिए मनुष्य की मूल भावनाओं पर कुठाराघात ही क्यों न होता हो। लेकिन आपको इन बातों को बस इतना ही महत्व देना चाहिए, जितना आप किसी परी-कथा को सुनकर देते, जो आपको इसलिए सुनाई जा रही होती है कि उसे सुनकर आप उनकी इच्छानुसार व्यवहार करने के लिए प्रेरित हों। आपको डराने के लिए एक तरह की धमकी कि अगर आपने ऐसा न किया तो कुछ बुरा हो जाएगा, जिसका वास्तव में कोई आधार नहीं होता। डॉक्टरों ने वैज्ञानिक रूप से इसे पूर्णतः गलत सिद्ध किया है-और इस बात को आप स्वयं अनुभव कर सकते हैं!

क्या आपने कभी यौन-सुख लिया है? उस वक़्त आपके मन में किस तरह की भावनाएँ पैदा हो रही होती हैं? प्रेम, संतोष, शांति और सम्पूर्ण आनंद! ये इस तरह की भावनाएं नहीं हैं, जो किसी ऊर्जा के क्षरण के पश्चात् कोई व्यक्ति महसूस करता है! यह इस तरह की भावनाएं नहीं हैं, जिसमें महसूस हो कि उसने अपनी जीवनी शक्ति या अपने सबसे बहुमूल्य सार-तत्व को खोया है और इसलिए कमजोरी महसूस कर रहा हो! इसके विपरीत, यह सुख आपको नई ऊर्जा से भर देता है!

स्वाभाविक ही सम्भोग के दौरान आप कुछ स्वास्थ्यवर्धक व्यायाम करते हैं तो मामूली थकान तो होगी ही, संभव है आप कुछ सुस्ती भी महसूस करें और सोना चाहें-लेकिन सोकर उठने के बाद आप पहले से ज़्यादा शक्तिशाली, मज़बूत और ऊर्जावान महसूस करेंगे! लेकिन तभी, जब आप सेक्स सम्बन्धी उन मूर्खतापूर्ण विचारों को अपने अन्दर किसी प्रकार का अपराधबोध पैदा करने की इजाज़त नहीं देंगे!

ब्रह्मचर्य दुनिया का सबसे अप्राकृतिक विचार है! इसलिए डरें नहीं, अपने यौन जीवन का मज़ा लें और खुश रहें!