आत्मविश्वास बढ़ाने वाला एक पांच-सूत्री कार्यक्रम- 29 अगस्त 2013

आत्मविश्वास

मैंने कई दिन और कई ब्लॉग यह समझाने में खर्च किए हैं कि कैसे लोग अक्सर अपनी तुलना दूसरों से करते हैं और इस तरह अपना आत्मविश्वास और उसके साथ ही अपना स्वाभिमान भी खो देते हैं। वे अवसादग्रस्त हो जाते हैं, अपने शरीर के साथ उन्हें समस्या हो जाती है और वे सोचने लगते हैं कि उनके कार्य और भावनाओं का कोई महत्व नहीं है। अगर आपकी यह बीमारी यहाँ तक पहुँच गई है या अगर आप चाहते हैं कि वह बिगड़कर यहाँ तक न पहुँचे तो मैं आपको अपने आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए कुछ करने की सलाह दूँगा। नीचे पाँच बिन्दुओं वाला एक कार्यक्रम मैं आपको बता रहा हूँ। उसे पढ़ें और शुरू हो जाएँ:

  1. जब भी आपके पास कुछ मिनट का अवकाश हो, एक कोरा कागज और कलम लेकर आराम से बैठ जाएँ। अब उस पर अपने बारे में उन बातों को लिखना शुरू करें जिन्हें आप समझते हैं कि वे आपके लिए बहुमूल्य हैं। वह सब कुछ, जिस पर आप गर्व कर सकते हैं, वह सब कुछ, जिन्हें आप अच्छा समझते हैं। यह "मैं फुटबाल अच्छा खेलता हूँ", या "जींस में मेरे कूल्हे शानदार लगते हैं" से लेकर "मैं लोगों की भावनाओं के प्रति संवेदनशील हूँ" या "मेरे अंदर बहुत ज़्यादा संयम है" तक कुछ भी हो सकता है। आपके पास इस सूची में ऐसी कम से कम पाँच बातें अवश्य होनी चाहिए-और इस बात की कोई सीमा नहीं है कि आप कितने बिंदु और जोड़ना चाहते हैं।
  2. अगर आपको अपने बारे में इस सूची के लिए विश्वसनीय बातें नहीं मिल रही हैं तो अपने करीबी मित्रों, या परिवार के किसी सदस्य से पूछिए कि वे आपमें कौन सी बहुमूल्य बातें देखते हैं। आप गौर करेंगे कि सिर्फ इतना करना ही आपमें सकारात्मक भावनाओं और स्वाभिमान का संचार कर देगा! अगर आप किसी और से पूछने में संकोच कर रहे हैं तो याद रखें कि आप भी चाहेंगे कि वे भी आपसे, आवश्यकता पड़ने पर, अपने बारे में पूछें!
  3. इस सूची को कम से कम एक बार रोज़ पढ़ें। इसमें आपका ज़्यादा समय ज़ाया नहीं होगा-सोने से पहले या सबेरे उठने के बाद या हो सके तो दोनों बार, बैठ जाएँ और सचेत होकर पढ़ें कि आपने अपने बारे में क्या लिखा है। आप अपने बारे में अच्छे विचारों को जज़्ब करते चले जाएंगे और कुछ समय बाद, आपको लिखे हुए शब्दों की ज़रूरत तक नहीं पड़ेगी, आप सिर्फ उस सूची के बारे में सोचेंगे और अच्छा महसूस करेंगे।
  4. अगर आप ध्यान करते हैं या श्वसन-क्रिया का अभ्यास करते हैं तो इस सूची को ध्यान-साधना के लिए एक उद्घोषक की तरह इस्तेमाल करें। अपने भीतर संचरित हो रही सकारात्मक ऊर्जा पर ध्यान केन्द्रित करें।
  5. अंत में, जब भी आप ऐसी किसी परिस्थिति में हों, जो आपको वापस अपने लिए आने वाले बुरे ख़यालों के गर्त में धकेल रही है तो मानसिक रूप से आप भी अपने बारे में बहुमूल्य लगने वाले बिन्दुओं पर आ जाएँ जिन्हें दूसरे भी आपके बारे में बहुमूल्य मानते हैं। याद रखें, कोई भी महामानव नहीं है, कोई भी जीवन के हर क्षेत्र में पूरी तरह निपुण नहीं है। अपने गुणों को जानिए और इस बात को स्वीकार कीजिए कि आपमें कुछ कम प्रभावशाली विशेषताए भी हैं।

अपने आप पर एकाग्र हों, किसी और से अपनी तुलना न करें और अपने गुणों को खोजें और उन पर ध्यान दें-आप नोटिस करेंगे कि ऐसा करने से आपके दैनिक जीवन में कितना बदलाव आ गया है। कोशिश करें-इसमें क्या लगना है? एक कोरा कागज़, कुछ स्याही और रोज़ के कुछ मिनट! लेकिन इस प्रयास का आप पर अच्छा असर होगा और आप प्रसन्न रह सकेंगे!

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