धनवान और गरीब सभी के लिए एक जैसी उच्च स्तरीय मुफ्त शिक्षा का सपना – 20 मई 2015

कल मैंने आपको बताया था कि मेरी दिली इच्छा है कि भारत में सभी के लिए एक जैसी शिक्षा हो। ऐसी शिक्षा, जो सभी बच्चों के लिए एक सी हो, भले ही अभिभावक उसके लिए कितना पैसा भी खर्च कर सकते हों, जिससे सभी लड़कियों और लड़कों को उन लक्ष्यों को प्राप्त करने के समान अवसर उपलब्ध हो सकें, जिन्हें वे प्राप्त करना चाहते हैं! विश्वास करें या न करें, मेरे पास इस स्वप्न को अंजाम तक पहुँचाने की एक कार्य योजना मौजूद है।

अब आप शायद सोच रहे होंगे कि मैं मूर्ख हूँ, दिवास्वप्नी हूँ या हवाई किले बनाने वाला अयथार्थवादी व्यक्ति हूँ। मैं शिक्षा में पैसे की भूमिका का महत्व समाप्त करना चाहता हूँ- भारत जैसे देश में, एक ऐसे समाज में, जहाँ कुछ लोगों के लिए पैसा ही सब कुछ है- क्योंकि बिना पैसे के यहाँ कुछ नहीं होता।

लेकिन आप जानते हैं कि हम पिछले आठ साल से यह स्कूल चला रहे हैं और पहले से ही गरीब बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के अभियान में भरपूर शक्ति के साथ अपना योगदान कर रहे हैं और इस तरह ऐसे कामों का हमारे पास काफी तजुर्बा है। मेरे विचार हवाई नहीं होते, वे अनुभव की ठोस, यथार्थवादी भूमि पर आकार लेते हैं। हर साल हमारे स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उदार आर्थिक मददगारों की सहायता से हमने अपने स्कूल की इमारत की पहली मंज़िल का निर्माण कार्य पूरा कर लिया है, जिसमें पाँच नई कक्षाएँ शुरू हो चुकी हैं और अब हम कुछ अधिक बच्चों को पढ़ा पा रहे हैं!

स्वाभाविक ही हर चीज़ की एक सीमा होती है और हमेशा होगी।

मैं नहीं समझता कि सपने में भी मैं इस देश के भ्रष्टाचार को समाप्त कर सकता हूँ। न ही मैं हर एक को इतना धनवान बना सकता हूँ कि वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा वाले ख़र्चीले स्कूलों में भेज सकें। जी नहीं, मेरा विचार यथार्थ को मद्देनजर रखते हुए, कुछ छोटे-छोटे कदमों के साथ आगे बढ़ने का है लेकिन संभव हुआ तो, क्रमशः काम को इतने विशाल पैमाने पर फैला देने का भी है कि उसका अच्छा खासा असर दिखाई दे सके!

बराबरी के अपने स्वप्न के अनुसार मैं स्कूल का निर्माण करूँगा। एक ऐसा स्कूल, जहाँ आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से समाज के हर वर्ग से आए बच्चे एक साथ पढ़ सकें और वह भी मुफ्त! हम वहाँ हर विद्यार्थी को एक जैसी उच्च स्तर की शिक्षा प्रदान करने का इरादा रखते हैं, चाहे किसी रिक्शा-चालक का लड़का हो, चाहे बैंक के उच्च प्रबंधन से जुड़े किसी उच्चाधिकारी की लड़की हो!

जैसा कि अभी भी हो रहा है, हमारा स्कूल आगे भी हर बच्चे को किताब-कापियाँ, वर्दियाँ और भोजन मुहैया कराएगा। हर बच्चे का स्कूल की ओर से स्वास्थ्य बीमा करवाया जाएगा और हर बच्चा हर तरह से अपने साथ बैठे अगले बच्चे के बराबर होगा।

जब हमने अपना मुफ्त स्कूल शुरू किया था तब कई छोटे और सस्ते स्कूलों के व्यापार पर बुरा असर पड़ा था और एक स्कूल तो बंद ही हो गया-क्योंकि बच्चे अब हमारे स्कूल में पढ़ने आने लगे थे।

अब उस स्थिति की कल्पना कीजिए कि हम कई ऐसे स्कूल खोलें, जहाँ भर्ती के समय आने वाले हर बच्चे को मुफ्त शिक्षा प्रदान की जाती है-स्वाभाविक ही, सीट भरने तक! शिक्षा व्यवसाय के इस दीर्घाकार दैत्य पर यह एक करारा प्रहार होगा-क्योंकि तब सामान्यतया उन स्कूलों में प्रवेश लेने वाले बच्चे भी हमारे यहाँ आएँगे क्योंकि यहाँ भी वैसी ही बढ़िया शिक्षा का इंतज़ाम होगा, वह भी बिल्कुल मुफ्त!

अब एक स्वाभाविक प्रश्न- यह स्वप्न कैसे साकार होगा, इसके लिए इतना पैसा कहाँ से आएगा? अम्माजी’ज़ से! अपने आयुर्वेदिक रेस्तराँ से! क्या? कैसे? इस विषय में आप कल पढ़ सकेंगे!