रमोना ने मुझे बहुत पहले बताया था कि जब वह स्कूल में पढ़ती थी तब उसके स्कूल ने फ़्रांस के एक स्कूल के साथ एक समझौता किया था कि दोनों स्कूल अपने-अपने बच्चों के समूह परस्पर एक-दूसरे के स्कूलों में भेजेंगे। इसके अंतर्गत उसके जर्मन स्कूल के बच्चों के एक समूह ने फ्रांस जाकर वहाँ के स्कूल का भ्रमण किया था। बदले में, जिनके परिवारों के साथ ये लोग ठहरे थे, उनके बच्चे जर्मनी आकर उनके परिवारों के साथ कुछ दिन रहे थे। इस चर्चा के समय से ही मैं भी ऐसी ही एक योजना को क्रियान्वित करने का सपना देखता रहा हूँ, जो आश्रम आए एक मेहमान से चर्चा के बाद पुनः उभर आया है: कितना अच्छा हो अगर हम अपने स्कूल के बच्चों के दौरों के लिए आदान-प्रदान की ऐसी ही कोई योजना बना सकें और उन्हें यूरोप भेज सकें!
मुझे लगता है कि यह अनोखा विचार है: कल्पना कीजिए कि हमारे स्कूल के 20 बच्चे जर्मनी, फ्रांस, इंग्लैंड, स्पेन और पुर्तगाल या पश्चिम के किसी और देश में भ्रमण कर सकेंगे! इन गरीब बच्चों के लिए यह कितना खूबसूरत अनुभव होगा, कितनी खुशी होगी उन्हें और सिर्फ उनके लिए ही नहीं बल्कि उनकी जगह यहाँ आने वाले विदेशी बच्चों के लिए भी यह अनुभव कितना लाभप्रद होगा! जीवन में एक बार मिलने वाला शानदार अवसर!
कल्पना कीजिए कि हम अपने बच्चों को पहले से ही उन बच्चों से संपर्क करता हुआ देखें और वे आपस में एक दूसरे को चिट्ठियां लिखें और आपस में मिलने से पहले ही एक दूसरे से परिचित हो जाएं। फिर हम अपने बच्चों के समूह को लेकर जाएँ और उन यूरोपियन बच्चों के साथ उनके घरों में रहें। वे यहाँ आने वाले अपने जोड़ीदारों के साथ रहें, उनके परिवारों को, उनके रहन-सहन को जाने-समझें कि वहाँ का माहौल कैसा है और कैसे वहाँ की व्यवस्था काम करती है। वे आसपास के कुछ पर्यटन केन्द्रों की यात्राएं कर सकते हैं, वहाँ की प्राकृतिक शोभा का लुत्फ उठा सकते हैं लेकिन उनके लिए किसी तरह के निर्धारित कार्यक्रमों की ज़रूरत ही नहीं होगी-क्योंकि सिर्फ किसी सुपरमार्केट में जाना ही उनके लिए बहुत बड़ा अनुभव होगा!
उसी समय वे आपस में मित्र बन जाएंगे इसलिए, कुछ दिनों बाद- जैसे जब वहाँ कड़ाके की ठंड पड़ रही होगी और यहाँ मौसम खुशनुमा होगा-वे यूरोपीय बच्चे अपने कुछ शिक्षकों के साथ यहाँ आ सकेंगे। बच्चे यहाँ आश्रम में रह सकते हैं-क्योंकि हमारे बच्चों के परिवार आर्थिक कारणों से उन बच्चों को अपने घरों में नहीं रख पाएंगे, क्योंकि उनके यहाँ पर्याप्त जगह नहीं होती और अक्सर संडास, बाथरूम भी नहीं होते। इसलिए वे आश्रम में रह सकेंगे, हमारा स्कूल देख सकेंगे, यह देख सकेंगे कि यहाँ की व्यवस्था किस तरह काम करती है और हाँ, किसी दिन वे अपने भारतीय मित्रों के घरों में जाकर वहाँ का जायज़ा भी ले सकते हैं। यह कहना आवश्यक नहीं है कि ताजमहल देखने वे अवश्य जाएंगे।
मैं जानता हूँ कि इस कल्पना को अमली जामा पहनाना कितना मुश्किल है लेकिन मुझे विश्वास है यह किया जा सकता है! दोनों तरफ के स्कूलों या परिवारों पर इसका कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं आने दिया जाएगा क्योंकि यह भोजन और आवास की अदला-बदली भर होगी। किसी बच्चे को भी कोई खर्च नहीं उठाना पड़ेगा- सिर्फ हवाई जहाज़ के टिकिट का खर्च वहन करना होगा। यूरोपीय अभिभावक अपने बच्चों के हवाई-टिकिटों की व्यवस्था करेंगे और दोनों स्कूल-हमारा और यूरोप का स्कूल- कोशिश करेंगे कि कोई न कोई प्रयोजक मिल जाए, जो हमारे स्कूल के बच्चों के टिकिट का खर्च उठा ले। हम इस योजना का प्रचार करेंगे और उसे विज्ञापित भी करेंगे। मेरे खयाल से अगर एक कंपनी भी सामने आ जाए तो सारे बच्चों का खर्च उठा सकती है और फिर हम किसी एयरलाइन कंपनी से बात करके खास ग्रुप-टिकिट ले सकते हैं, जो काफी सस्ता भी पड़ेगा।
यहाँ तक का काम हो जाने के बाद भी हमें बहुत सी तैयारियां करनी होंगी: हमारे बच्चों के अभिभावकों को अपने बच्चों के जन्म-प्रमाणपत्र बनवाने होंगे और उनके लड़के-लड़कियों के पासपोर्ट बनवाने में हमें भी काफी मशक्कत करनी होगी। उसके बाद सबके वीजा भी-तो इस तरह, प्रयोजक मिल जाने के बाद भी, इस योजना को सफल बनाने में आगे भी परिश्रम करते रहना होगा।
लेकिन इसे सफलता-पूर्वक कार्यान्वित किया जा सकता है और आज मैं इस दिशा में पहला कदम उठाते हुए इस योजना को दुनिया के सामने रख रहा हूँ! जो भी ये पंक्तियाँ पढ़ रहा है, कृपा करके इस संदेश को ज़्यादा से ज़्यादा प्रचारित करें और अगर आपके सामने ऐसा कोई स्कूल हो, जो इस योजना में सहभागी होना चाहता हो तो उसके विषय में हमें जानकारी दें। इस योजना से दोनों देशों के अनगिनत बच्चे लाभान्वित हो सकते हैं!
अगर आपके पास कोई जानकारी हो, किसी स्कूल के बारे में आपको पता हो, आप शिक्षक हों, जो वहाँ जाने के इच्छुक हों या सबसे बढ़कर, अगर आप इस परियोजना को प्रायोजित कर सकते हों तो आप हमें इस पते पर ईमेल कर सकते हैं- info@jaisiyaram.com। मुझे विश्वास है कि हम सब मिलकर एक बड़ा काम कर सकते हैं!
मैं आपकी तरफ से आने वाले किसी सकारात्मक संदेश का इंतज़ार कर रहा हूँ और आशा करता हूँ कि हम सब मिलकर इस स्वप्न को साकार कर सकेंगे!
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