भारत में शिक्षा व्यवसाय को बंद कराने में अम्माजी’ज़ आयुर्वेदिक रेस्तराँ किस तरह सहायक होगा? 21 मई 2015

विद्यालय

इस हफ्ते की शुरुआत में मैंने भारत में शिक्षा संबंधी एक महती समस्या और बराबरी को लेकर अपनी परिकल्पना के बारे में आपको बताया था। शिक्षा व्यवसाय में मौजूद बड़े व्यापारी घरानों को कैसे चुनौती दी जा सकती है, इस संबंध में मैंने कल विस्तार से अपने विचार प्रस्तुत किए थे। आज मैं इससे भी अधिक ठोस योजना आपके सामने रखने जा रहा हूँ और बताना चाहता हूँ कि मैं कैसे इस बात की कल्पना कर पा रहा हूँ कि हमारे आयुर्वेदिक रेस्तराँ, अम्माजी’ज़ की सहायता से मेरा यह स्वप्न यथार्थ में परिणत हो सकता है।

इतने साल तक हम अपने स्कूल और दूसरी चैरिटी परियोजनाओं को अपने व्यवसाय और प्रायोजकों तथा दूसरे मददगारों के सहयोग से चलाते रहे हैं। हमारे सारे व्यावसायिक ग्राहक और अधिकांश आर्थिक मददगार पश्चिमी देशों के लोग रहे हैं। ऐसे गैर भारतीय, जो योग और आयुर्वेद विश्राम सत्रों में शामिल होने यहाँ आते हैं, जो हमारी कार्यशालाओं में सम्मिलित होते हैं या व्यक्तिगत सलाह-सत्रों में अपनी समस्याएँ लेकर आते हैं। इसके अलावा कुछ गैर भारतीय वैसे भी, हर तरह से गरीब बच्चों की आर्थिक मदद करना चाहते हैं इसलिए हमारे इन कामों में आर्थिक सहयोग करते हैं।

अब एक आयुर्वेदिक रेस्तराँ, अम्माजी'ज़ शुरू करने के साथ हम एक नए व्यवसाय में कदम रखने जा रहे हैं। वहाँ हम भोजन के शौकीनों के लिए उच्च गुणवत्ता वाला भोजन मुहैया कराएँगे और इस तरह उनके शरीर और स्वास्थ्य के लिए भी कुछ बेहतर कर पाएँगे। गलत खाद्य के ज़रिए हम बहुत सी बीमारियों को न्योता देते हैं-और अम्माजी'ज़ में न सिर्फ स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग स्वास्थ्यवर्धक भोजन कर पाएँगे बल्कि अपने चटोरे मित्रों और बच्चों को भी परितुष्ट कर पाएँगे! वहाँ हम आहार और शारीरिक पोषण संबंधी टिप्स और जानकारियाँ उपलब्ध कराएँगे, जो हमारे यहाँ की विशेषता होगी और एक अतिरिक्त लाभ भी क्योंकि जब भी आप यहाँ भोजन करने आएँगे, अपने बच्चों की निःशुल्क शिक्षा में मददगार भी हो रहे होंगे!

जल्द ही हमारे यहाँ बहुत से भारतीय मेहमान भी आने लगेंगे और तब हम ऐसे बिंदु पर पहुँच जाएँगे जब न सिर्फ हम गरीब बच्चों की मदद करते रह सकेंगे बल्कि कुछ बड़ी परियोजनाओं पर भी काम कर सकेंगे! हम एक स्तरीय स्कूल खोलेंगे, जहाँ हर संभव सुविधाएँ होंगी-वह भी पढ़ने वाले हर बच्चे के लिए पूरी तरह मुफ़्त! और हाँ, हमारे रेस्तराँ के ग्राहकों के बच्चों के लिए भी!

जी हाँ, वास्तव में जब भी आप हमारे स्कूल में भोजन करने आएँगे तो उस पर खर्च होने वाला एक एक रुपया आपके बच्चे की बेहतर शिक्षा पर खर्च किया जाएगा! इस तरह हमारा यह नया व्यवसाय भी इस स्कूल की मदद में पूरी तरह सहभागी होगा!

मेरा विश्वास है कि इस मिशन और हमारी परियोजना से सभी संतुष्ट होंगे: गरीब बच्चों के माता पिता, जिनके बच्चे अपढ़ रह जाने के अभिशाप से मुक्त होंगे और मुफ़्त विद्यार्जन कर पाएँगे; मध्यवर्गीय अभिभावक, जिन्हें बच्चों की अच्छी शिक्षा हेतु संघर्ष नहीं करना होगा क्योंकि शिक्षा निःशुल्क होगी और आर्थिक रूप से संपन्न अभिभावक, जिनके बच्चे वही शिक्षा मुफ़्त पा सकेंगे, जिसके लिए उन्हें मोटी रकम खर्च करनी पड़ती! किसी विशाल मॉल में खरीदी जाने वाली वस्तु की तरह विद्या खरीदने के स्थान पर समानता और बंधुत्व की शिक्षा देने वाले स्कूल में निःशुल्क शिक्षा कौन नहीं पसंद करेगा?

सिर्फ ऐसे व्यवसायी, जिनकी ऐसी मॉलनुमा शिक्षा संस्थाएँ होंगी, वही मेरी इस परियोजना पर आपत्ति करेंगे क्योंकि वह उनके लिए नुकसानदेह होगी!

लेकिन कोई भी दूसरा व्यवसाय करने वाले लोग इसे पसंद करेंगे। और यही मुख्य बिन्दु है, जहाँ मैं लोगों से कहूँगा कि वे आगे आएँ और अपने व्यापार के माध्यम से और आर्थिक मदद के ज़रिए इस मिशन का समर्थन करें! व्यापारी अपने व्यापारिक लाभ का एक नियत प्रतिशत इस परियोजना के खर्च में लगा सकते हैं। समर्थ अभिभावक गण इस कार्य हेतु उपहार स्वरूप पैसे दे सकते हैं, भले ही उतनी ही रकम, जितना वे किसी भी दूसरे अच्छे स्कूल में अदा करते। और हाँ, फर्नीचर से लेकर भोजन या किताबों तक वे कई प्रकार से स्कूलोपयोगी वस्तुओं को प्रायोजित कर सकते हैं! हर व्यक्ति अपने तरीके से अपना अंशदान कर सकता है! स्वाभाविक ही, विदेशों से आने वाले डोनेशंस और प्रायोजन का स्वागत तो है ही!

फिर यह दूसरे कई शहरों में फैल सकता है, जहाँ हम आगे चलकर अपना रेस्तराँ खोलने का प्रयास करेंगे और हर रेस्तराँ के साथ एक स्कूल भी। सबके लिए निःशुल्क, इतना स्तरीय कि सभी इस परियोजना में शामिल होना चाहेंगे! एक इलाके में जब हमारे इस तरह के कई स्कूल खुल जाएँगे तो फिर लोग स्कूल जैसे दिखाई देने वाले इन मॉलों में इतना रुपया खर्च करने के लिए राज़ी नहीं होंगे-और बहुत से दूसरे लोग भी हमारे उदाहरण का अनुसरण करेंगे!

मैं नहीं जानता की इस विचार को मूर्त रूप देने में किस हद तक सफलता प्राप्त होगी और कितनी जल्दी सब कुछ आगे बढ़ेगा लेकिन मैं तो कल्पना करने की स्वतन्त्रता में आनंदमग्न रहता हूँ। अपने विचार रखने और सपने देखने की स्वतन्त्रता। समाज के हर आर्थिक और सामाजिक वर्ग से आने वाले हर बच्चे के लिए एक समान शिक्षा के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से इस रास्ते पर हम आगे बढ़ते रहेंगे!

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