भारत में व्याप्त भ्रष्टाचार के चलते हम अपने स्कूल को विकसित नहीं कर पा रहे हैं – 11 मई 2015

विद्यालय

पिछली एक मई हमारे स्कूल के इस स्कूली सत्र का आखिरी दिन था। बच्चे अपने अभिभावकों के साथ स्कूल आए, परीक्षाफल प्राप्त किए और नमस्कार करके चले गए। उनमें से अधिकतर अब जुलाई से पढ़ाई शुरू करेंगे लेकिन इस वर्ष से हमारी सबसे ऊँची तीन कक्षाओं के विद्यार्थी स्कूल में नहीं लौटेंगे। इसी विषय में कुछ बातें मैं आपके साथ साझा करना चाहता हूँ।

आप जानते होंगे कि पिछले स्कूली सत्र में हमारे यहाँ दो पूर्व-प्राथमिक कक्षाएँ हुआ करती थीं और उसके बाद एक से सात तक की कक्षाएँ। उस वक़्त तक हमारे यहाँ इतनी ही कक्षाएँ थीं। कुछ साल पहले अपने बच्चों को 5वीं तक पढ़ाने के बाद, उनकी पढ़ाई आगे भी जारी रह सके, इसलिए हम 8वीं तक का स्कूल खोलना चाहते थे और उसके लिए हमें ‘जूनियर हाई स्कूल’ शुरू करने की अनुमति प्राप्त करनी आवश्यक थी।

हमने कुछ लोगों से संपर्क किया और हमें बताया गया कि हम 6ठी कक्षा शुरू कर दें और इस दौरान आगे की कक्षाएँ शुरू करने हेतु आवश्यक अनुमति लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दें। इस तरह हमने आवश्यक फॉर्म्स भरकर संबंधित अधिकारी के कार्यालय में आवेदन किया और 6ठी कक्षा की पढ़ाई भी शुरू करवा दी।

कई महीनों तक फोन पर बातचीत, संबंधित कार्यालयों के चक्कर और दौड़-भाग और उचित लोगों से संपर्क, इतना सब हम इस बीच लगातार करते रहे। हम विभिन्न कार्यालयों के चक्कर काटते रहे और धीरे-धीरे हमारी फाइल आगे बढ़ती रही। लेकिन इतने प्रयासों के बावजूद वास्तव में काम कुछ नहीं हुआ! जैसे-जैसे समय बीतता गया हम परेशान हो गए और हमने संबंधित लोगों से इस काम को अंजाम तक पहुँचाने की गुजारिश की। बार-बार हमसे रिश्वत के तकाजे किए जाते थे। हमसे कहा गया कि अगर हम कुछ रकम, जो वास्तव में काफी बड़ी रकम थी, उन्हें रिश्वत के रूप में दे दें तो न सिर्फ काम हो जाएगा बल्कि काफी जल्दी हो जाएगा।

हमने कई लोगों को बताया कि हम इतनी बड़ी रकम रिश्वत के रूप में नहीं देना चाहते। हमारा स्कूल कोई सामान्य स्कूल नहीं है। अपना स्कूल हम किसी व्यवसाय की तरह नहीं चलाते, हम इससे पैसे नहीं कमा रहे हैं और सबसे बड़ी बात शिक्षा का व्यापार नहीं कर रहे हैं, उसे बेच नहीं रहे हैं! हमारा स्कूल एक चैरिटी स्कूल है, हम अपने बच्चों से फीस नहीं लेते और सिर्फ गरीब बच्चों की मदद करने के लिए हमने स्कूल खोला हुआ है। हम सरकार से भी एक पैसा नहीं लेते-न तो बच्चों की पढ़ाई के लिए और न ही उनके भोजन की व्यवस्था हेतु। हम व्यापार भी करते हैं तो सिर्फ अपनी चैरिटी संबंधी योजनाओं में मदद हो सके, इस उद्देश्य से। किसी भी बच्चे को स्कूल आने के लिए एक पैसा भी खर्च नहीं करना पड़ता। हमारे अपने प्रायोजक हैं, दानदाता हैं, मददगार हैं लेकिन इसके बावजूद स्कूल चलाने के लिए हमें व्यापार करने की भी आवश्यकता होती है।

भ्रष्ट भारत में रिश्वत के बिना आप कुछ नहीं कर सकते! जब तक सही व्यक्ति को अनाधिकारिक पैसे नहीं दे दिए जाते, कुछ नहीं हो सकता। इस क्षेत्र के माहिर, दलाल और एजेंट बताते हैं कि रिश्वत के अलावा सिर्फ एक ही तरीके से हमारा काम हो सकता है: कोई पहुँच, किसी महत्वपूर्ण राजनेता की सिफारिश ही यह काम करवा सकती है। हमारे पास ऐसी कोई पहुँच नहीं थी।

हमने एक बार यह भी सोचा कि स्टिंग ऑपरेशन किया जाए और उनके भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए उनकी रिश्वत की मांग को रिकार्ड कर लिया जाए। लेकिन हमारे शुभचिंतकों ने आगाह किया कि ये लोग काफी दबंग लोग होते हैं और उनकी सरकार में भीतर तक पहुँच होती है, जहाँ वे अपने बचने का रास्ता भी निकाल लेंगे और बाद में आपसे जीवन भर बदला लेते रहेंगे-यहाँ तक कि हम पर ही गलत आरोप लगाकर ऐसी हालत पैदा कर देंगे कि हम इस विचार के लिए हमेशा पछताते रहेंगे।

बिल्कुल नहीं। हम रिश्वत नहीं देना चाहते। इसलिए हमने सोचा कि वैसे भी 8वीं कक्षा के बाद हमें अपने बच्चों को किसी दूसरे स्कूल में 9वीं और 10वीं की पढ़ाई के लिए भेजना ही पड़ता तो उसी तरह 5वीं कक्षा के बाद से ही भेजते रहेंगे। हम उनकी फीस अदा करते रह सकते हैं और दूसरी मदद भी करते रह सकते हैं-और उनकी जगह छोटे बच्चों को अधिक संख्या में अपने स्कूल में पढ़ा सकते हैं और उन्हें बिल्कुल बुनियादी पढ़ाई अधिक बेहतर ढंग से करवा सकते हैं!

तो इसलिए हमने स्कूल की बिल्कुल बुनियादी पढ़ाई हेतु इस वर्ष ज़्यादा बड़ी संख्या में छोटे बच्चों को प्रवेश देने की योजना बनाई है और अपने बड़े बच्चों की अगली पढ़ाई हेतु किसी उपयुक्त स्कूल की तलाश भी शुरू कर दी है। ऐसे स्कूलों की खोज में आने वाली दिक्कतों के बारे में कल मैं आपको बताऊँगा!

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