हिन्दू धर्म की एक मूलभूत अवधारणा को नज़रअंदाज़ किए बिना आप हिन्दू धर्म में शामिल नहीं हो सकते- 5 जुलाई 2012

धर्म

कल मैंने वृन्दावन के मंदिरों के बारे में लिखा था और इस्कॉन मंदिर का ज़िक्र करते हुए कहा था कि वहाँ बहुत से विदेशी जाते हैं, पूजा-अर्चना और दूसरे कर्मकांड करते हैं और उस मंदिर को आराधना का एक पवित्र स्थान समझते हैं। इस तरह, जहां अधिकांश भारतीयों के लिए वह मंदिर महज एक पर्यटन स्थल है, विदेशी उसके बारे में बिल्कुल अलग सोचते हैं। लेकिन आज मैं इस दिलचस्प विरोधाभास पर कुछ भी कहने नहीं जा रहा हूँ बल्कि यह बताने जा रहा हूँ कि ऐसे गैर-हिंदुओं के साथ हिन्दू धर्म किस तरह से पेश आता है, जो हिन्दू धर्म में आस्था रखते हैं और हिन्दू मंदिरों में जाते हैं।

साफ शब्दों में कहा जाए तो किसी दूसरे धर्म से हिन्दू धर्म में धर्मांतरण संभव ही नहीं है। ऐसा कोई धर्मग्रंथ नहीं है, जो किसी अन्य धर्म को छोड़कर हिन्दू धर्म अपनाने की कोई विधि, कोई प्रक्रिया या कोई कर्मकांड निर्धारित करता है। दूसरे धर्मो की तरह हिन्दू धर्म में किसी बप्तिस्मे की व्यवस्था नहीं है और न ही कुछ धार्मिक सूक्तों, श्लोकों या स्तोत्रों को याद कर लेना हिन्दू होने का प्रमाण माना जाता है। कुछ भी कर लें आप हिन्दू धर्म में धर्म-परिवर्तन कर ही नहीं सकते। इसके विपरीत ऐसी ऋचाएँ और सूक्तियाँ मिल जाएंगी जो यह कहती हैं: "वही व्यक्ति हिन्दू है, जिसने हिन्दू के रूप में जन्म लिया है।"

दूसरे धर्मों के जो लोग यह कहते हैं कि वे हिन्दू धर्म में शामिल हो गए हैं वे हिन्दू धर्मग्रंथों के इन हिस्सों को ठीक तरह से नहीं समझते या हिन्दू धर्म में शामिल होने के व्यामोह और जल्दबाजी में इस बात को नज़रंदाज़ करते हैं। मुझे लगता है कि नए धर्म में प्रवेश का यह तरीका संदेहास्पद है! अगर आप किसी धर्म में विश्वास करना चाहते हैं तो आपको उसे ठीक तरह से समझना होगा और सबसे पहले यह देखना होगा कि क्या आप उसके सदस्य बन भी सकते हैं या नहीं! अगर वह धर्म यह कहता है कि नहीं बन सकते तो आपको उसका अनुसरण करने की आवश्यकता ही क्या है?

तो इस लिहाज से शुरू से ही धर्म परिवर्तन का यह पूरा मामला मज़ाक बन कर रह जाता है! वृन्दावन आने वाले बहुत से विदेशी इस्कॉन के विदेशी भक्तों को धार्मिक हिंदुओं की तरह वस्त्र पहने और चन्दन और चोटियाँ धारण किए देखते हैं तो हैरान रह जाते हैं। यह वाकई हैरानी की ही बात है!

यह और भी हास्यास्पद हो जाता है, जब वे पाते हैं कि धार्मिक नियमों का पालन करने में ये इस्कॉन के भक्त बहुत सख्त हैं-या संकीर्ण हैं, जो भी आप कहना चाहें! इसके कई उदाहरण मौजूद हैं। आपको माथे पर रोज़ धार्मिक ‘मेकअप’ करना होता है। एक तय संख्या में धार्मिक मंत्रों का जाप करना आवश्यक है-भले ही आप यह काम बाज़ार में सौदा खरीदते हुए करें। पुरुषों को सिर मुंड़ाकर सिर के पीछे चोटी रखनी पड़ती है। पुरुष भक्तों को प्रभुजी और महिला भक्तों को माताजी पुकारना होता है, भले ही आपके साथ उसका कोई दूसरा रिश्ता ही क्यों न हो या उम्र में वह आपसे छोटी ही क्यों न हो। आपको अपना नाम भी बदलना पड़ता है-भले ही आपकी भाषा से बहुत अलग होने के कारण संस्कृत के उस शब्द का उच्चारण भी आप ठीक से न कर पाते हों। इन सब बातों के कारण हालत यह हो जाती है कि सामान्य हिंदुओं को उनके काम बड़े हास्यास्पद नज़र आते हैं।

तब बड़ी हंसी आती है जब ये लोग, जो धर्म परिवर्तन करके हिन्दू धर्म अपनाने के भुलावे में रहते हैं और इस संप्रदाय के सदस्य बन जाते हैं, हिन्दू दिखाई देने के उत्साह में धार्मिक कार्यों में इतने अधिक लिप्त हो जाते हैं कि सामान्य, आधुनिक हिंदुओं को भी मात करते हैं। विडम्बना यह है कि वे कितनी भी कोशिश कर लें, वास्तविकता यही है कि वे किसी भी हालत में हिन्दू नहीं माने जाएंगे क्योंकि धर्म परिवर्तन करके हिन्दू बनना संभव ही नहीं है।

इस बात से हम यह सीखते हैं कि आप किसी भी धर्म या किसी दूसरे व्यक्ति के धर्म की कुछ बातों का दूर से मज़ा ले सकते हैं, कि आप उन विश्वासों को अपने जीवन में उतार सकते हैं लेकिन इसके लिए आपको औपचारिक रूप से ‘धर्म-परिवर्तन’ करने की आवश्यकता नहीं है। आपको किसी व्यक्ति या उसके धार्मिक व्यवहार की नकल करने की जरूरत नहीं है। किसी की प्रतिलिपि मत बनिए! दूर से उसे सराहिए, उसकी अच्छी बातों की कदर कीजिए मगर स्वयं मौलिक बने रहिए, जैसे हैं, वही। जो आप हैं, उससे अलग कोई दूसरा बनना आपको मनोवैज्ञानिक रूप से बुरी तरह प्रभावित करता है। अगर आप इस आत्म-संदेह की मनोदशा में लम्बे समय तक रहे तो यह आपके मस्तिष्क, भावनाओं और व्यक्तिगत जीवन को नुकसान पहुंचा सकता है। मैंने अपनी यात्राओं में और व्यक्तिगत सत्रों के दौरान बहुत से ऐसे प्रकरण देखे हैं। आपको अपना धर्म छोड़कर किसी और धर्म में शामिल होने की ज़रूरत नहीं है-खासकर उसमें तो बिल्कुल नहीं, जो आपको अपने में शामिल करने से ही इंकार करता है!

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