पवित्र गाय के विषय में हिन्दू पाखंड – 26 जनवरी 2015

बहुत समय नहीं हुआ जब आश्रम आए कुछ मेहमानों के साथ एक शाम आग तापते हुए अच्छी-ख़ासी रोचक चर्चा हुई थी। हम भारत में उन्हें हुए अनुभवों के बारे में बात कर रहे थे और तभी एक, जर्मनी से आई एक डॉक्टर ने यह प्रश्न जड़ दिया: मैंने पढ़ा है कि भारत में गायों को पवित्र माना जाता है लेकिन शहर में लोगों को मैं पैदल देखती हूँ तो पाती हूँ कि बहुत से लोग चमड़े के जूते पहने हुए हैं और इसके अलावा वे चमड़े के बेल्ट और चमड़े के बैग भी निःसंकोच इस्तेमाल करते हैं। वे इन दोनों बातों का तालमेल किस तरह बिठा पाते हैं?

इसका उत्तर दरअसल मुझे सिर्फ एक पंक्ति में देना पड़ा: लोग बड़े पाखंडी हैं। यह सच है, इसके अलावा आप इसे क्या कहेंगे? भारत आए किसी पर्यटक को इसे और किस तरह समझाएँगे?

हिन्दू धर्म कहता है कि गाय पवित्र है। यह सही है। लेकिन आपको सिर्फ बाहर निकलकर इधर-उधर नज़रें भर घुमाना है और आपको हर तरफ गायों की दुरवस्था देखने को मिल जाएगी: आवारा, शहर भर में घूमती हुई, हर तरह का, जो मिल जाए, कचरा और कूड़ा-कर्कट खाती हुई, अक्सर प्लास्टिक और दूसरी खतरनाक अखाद्य वस्तुएँ खाती हुई। वे अक्सर मरियल सी और बीमार होती हैं। यह सब एक पवित्र गाय भुगतती है और लोग देखते रहते हैं! क्यों और कैसे?

या क्या गाएँ तभी तक पवित्र हैं जब तक वे दूध देती हैं या आपकी चाकरी करती हैं? क्योंकि देखने में यही आता है: दूध देने वाली गाएँ, जब बच्चे पैदा नहीं कर पातीं और इसलिए दूध देना बंद कर देती हैं तो उन्हें बाहर निकालकर मरने के लिए छोड़ दिया जाता है और वही गाएँ सड़क पर भटकती दिखाई देती हैं।

सिर्फ केरल और पश्चिम बंगाल को छोड़कर भारत के लगभग सभी राज्यों में गौहत्या गैरकानूनी है लेकिन साथ ही भारतीय चमड़ा व्यवसाय बहुत विशाल है। उसका “कुल व्यापार 5 बिलियन डॉलर्स का है और उससे होने वाली आय भारत की कुल निर्यात आय का लगभग 4% है”। ये दोनों बातें कैसे संभव हैं- गायों का वध भी अवश्य किया जाता होगा तभी चमड़ा व्यवसाय के ये आँकड़े हासिल किए जा सकते हैं! और धार्मिक लोग भी इस चमड़े का इस्तेमाल करते हैं!

आखिर मंदिरों में धड़ल्ले से इस्तेमाल होने वाले तबले पर चढ़ाया जाने वाला और दूसरे वाद्ययंत्रों में इस्तेमाल होने वाला चमड़ा कहाँ से आता है? मैंने इसके बारे में जानकारी हासिल की- बकरी या गाय के चमड़े से। क्या गाने-बजाने वाले यह पूछते हैं कि चमड़ा किस जानवर का है? क्या आप समझते हैं कि मंदिर के पुजारी इस बात की जाँच करते हैं कि उनके मंदिर की पवित्रतम जगहों में प्रवेश पाने वाला वाद्य पूरी तरह पवित्र चमड़े का बना हुआ है?

मुझे इस बात में संदेह है।

मैं आपको यह भी बताना चाहता हूँ कि सभी हिन्दू शाकाहारी नहीं होते। भारत की लगभग 80% आबादी हिन्दू है। और सिर्फ 30% भारतीय ही शाकाहारी हैं। इसका अर्थ है कि बहुत बड़ी संख्या में हिन्दू भी मांसाहारी हैं। मैकडोनल्ड्स भारत में चिकन और बकरे के गोश्त से तैयार बर्गर बेच सकता है लेकिन क्या आप समझते हैं कि जब भी कोई हिन्दू सैंडविच में या किसी और खाने में मौजूद मांस का टुकड़ा खाते हैं तो क्या वे इसे सुनिश्चित करने के लिए कि उसमें गाय का मांस नहीं है, किसी से पूछते हैं?

जी नहीं, वे नहीं पूछते।

और इन्हीं सब बातों के चलते मैं कहता हूँ कि वे पाखंडी हैं। आप गायों से प्रेम करने का दिखावा करते हैं, उसकी पूजा करते हैं, यहाँ तक कि उसका पेशाब पीते हैं क्योंकि आप समझते हैं कि उससे आपको कोई अलौकिक दैवी शक्ति प्राप्त हो जाएगी- लेकिन फिर आप उन्हें मरने के लिए सड़कों पर छोड़ देते हैं, उन्हें बूचड़खानों में भेज देते हैं, उनका मांस खाते हैं, उनकी खाल के जूते पहनते हैं और तबलों और वाद्ययंत्रों पर उनका चमड़ा चढ़ाकर अपने पूजाघरों में ले जाते हैं, जिसे वैसे आप अपवित्र मानते हैं!

अंत में मेरे पास हमेशा यह सवाल खड़ा रह जाता है: सिर्फ गाय ही क्यों? गाय की पूजा करो और कुत्ते को लात मारो। गाय की रक्षा करो और सूअर को खा जाओ। क्यों?

Related posts

जीवन आपका है, निर्णय भी आपके होने चाहिए-आपको क्या करना है, इस पर धर्म के दबाव का प्रतिरोध कीजिए - 17 सितंबर 2015

जीवन आपका है, निर्णय भी आपके होने चाहिए-आपको क्या करना है, इस पर धर्म के दबाव का प्रतिरोध कीजिए – 17 सितंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि धर्म चाहता है कि लोग उसके निर्देशों पर चलें और लोगों को चाहिए कि ...
जब चुनाव, विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को धर्म सीमित करता है - 16 सितंबर 2015

जब चुनाव, विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को धर्म सीमित करता है – 16 सितंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि किस तरह धर्म स्वतंत्रता की उनकी परिकल्पना से बहुत अलग है: वह लोगों पर ...
यह कहना कि इस्लाम शांति का धर्म नहीं है, क्यों इस्लाम के विरुद्ध पूर्वग्रह नहीं है - 15 सितंबर 2015

यह कहना कि इस्लाम शांति का धर्म नहीं है, क्यों इस्लाम के विरुद्ध पूर्वग्रह नहीं है – 15 सितंबर 2015

स्वामी बालेंदु स्पष्ट कर रहे हैं कि बिना घृणा के भी आप इस्लाम और उसके प्रसार को लेकर अपनी चिंताएँ ...
यूरोपियन सरकारों से अपील - शरणार्थियों की मदद करें लेकिन मजहब और मस्जिदों पर सख्त पाबंदी लगाएँ - 14 सितंबर 2015

यूरोपियन सरकारों से अपील – शरणार्थियों की मदद करें लेकिन मजहब और मस्जिदों पर सख्त पाबंदी लगाएँ – 14 सितंबर 2015

जर्मनी में 200 मस्जिदें तामीर करने के सऊदी अरब के प्रस्ताव पर स्वामी बालेंदु अपने विचार लिख रहे हैं। उनके ...
संथारा की मूर्खतापूर्ण परंपरा की वजह से आत्महत्या को न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता! 26 अगस्त 2015

संथारा की मूर्खतापूर्ण परंपरा की वजह से आत्महत्या को न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता! 26 अगस्त 2015

स्वामी बालेंदु एक टी वी परिचर्चा का ज़िक्र कर रहे हैं, जिसमें वे भी शामिल हुए थे। यह चर्चा संथारा ...
धर्म के कपटपूर्ण संसार में दो तरह के लोग रहते हैं - 11 जून 2015

धर्म के कपटपूर्ण संसार में दो तरह के लोग रहते हैं – 11 जून 2015

स्वामी बालेंदु उन लोगों के बारे में लिख रहे हैं जो धर्म द्वारा निर्मित भ्रमजाल में निवास करते हैं-या तो ...
"मैं ईश्वर की इच्छा से गरीब हूँ और इस बारे में कुछ नहीं किया जा सकता" - धर्म का बुरा प्रभाव - 26 मार्च 2015

"मैं ईश्वर की इच्छा से गरीब हूँ और इस बारे में कुछ नहीं किया जा सकता" – धर्म का बुरा प्रभाव – 26 मार्च 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि न जाने कितने लोग अपनी बुरी हालत को सहजता से स्वीकार कर लेते है ...
गैर हिंदुओं को भारत के धार्मिक समारोहों में शामिल होने के लिए प्रेरित करने संबंधी एक मज़ेदार रिपोर्ट - 26 फ़रवरी 2015

गैर हिंदुओं को भारत के धार्मिक समारोहों में शामिल होने के लिए प्रेरित करने संबंधी एक मज़ेदार रिपोर्ट – 26 फ़रवरी 2015

स्वामी बालेन्दु अपने कुछ मेहमानों के साथ हुए अनुभवों का ज़िक्र कर रहे हैं, जिनमें उनसे धार्मिक समारोहों में शामिल ...
क्या भगवान के लिंग की पूजा आपको अच्छा पति दिलवा सकता है? 19 फरवरी 2015

क्या भगवान के लिंग की पूजा आपको अच्छा पति दिलवा सकता है? 19 फरवरी 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि वास्तव में वे क्यों सोचते हैं कि लिंग को लेकर कोई समस्या नहीं है- ...
आइए, लिंग की पूजा करें - उसमें क्या बुराई है? 18 फ़रवरी 2015

आइए, लिंग की पूजा करें – उसमें क्या बुराई है? 18 फ़रवरी 2015

स्वामी बालेन्दु शिवलिंग को लेकर प्रचलित एक और कहानी सुना रहे हैं-और साथ ही इसमें निहित हिन्दू धर्म के एक ...

Leave a Reply