मूर्ख धार्मिक चैरिटी वाले समलैंगिकों की मदद लेने से इंकार कर देते हैं! 26 नवम्बर 2014

शहर:
वृन्दावन
देश:
भारत

सन 2010 में जब हम न्यूयॉर्क में थे, मैंने कई नए दोस्त बनाए। उनमें से एक दोस्त को मेरे कुछ अमरीकी मित्र जानते होंगे क्योंकि वह रेडियो और टीवी शो में अक्सर काम करता रहता है और वैसे भी वह लोगों से मिलने-जुलने वाला मिलनसार व्यक्ति है और कई चैरिटी परियोजनाओं से जुड़ा हुआ भी है। उसका नाम मैक्स टकी (Max Tucci) है। कल मुझे पता चला कि एक चैरिटी ने, जिसकी वह अकसर मदद किया करता था, उसके साथ बड़ी बेहूदा और अपमानजनक हरकत की: उन्होंने उसकी मदद नकार दी। क्यों? क्योंकि मैक्स समलैंगिक है।

2010 में मैक्स अपनी काफी स्वस्थ दादी के साथ मुझसे मिलने न्यूयॉर्क में सेन्ट्रल पार्क आया था। दादी ने सारा जीवन योग किया था इसलिए उस वक़्त भी बहुत तरोताज़ा और लोचदार लग रही थी। हमने बहुत अच्छा समय साथ गुज़ारा और बाद में अपने रेडियो शो के लिए मैक्स ने मेरा इंटरव्यू लिया, जिसमें कुछ देर हमारी अच्छी बातचीत भी हुई। मुझे तभी समझ में आ गया था कि मेरे सामने बैठा हुआ व्यक्ति एक खुले दिल वाला इंसान है जो हर संभव तरीके से दूसरों की मदद के लिए सदा तैयार रहता है। मुझे फेसबुक के ज़रिए पता चला कि ठीक इन्हीं सेवाओं से जुड़ी बहुत सी परियोजनाओं में वह भी सहभागी होता रहता है।

कुछ दिन पहले मैं और रमोना मैक्स द्वारा साझा किए गए किसी चैरिटी कार्यक्रम के फ़ोटो देख रहे थे, जिसे मैक्स और उसके मित्रों ने आयोजित किया था। उन सब ने ‘ड्रैग’ (drag) पहने हुए थे। इस शब्द के बारे में मुझे अभी-अभी पता चला है और इसका अर्थ यह है कि पुरुषों ने तड़क-भड़क वाले महिलाओं के वस्त्र पहने थे और गहरा, चमकीला रंगीन मेक-अप किया हुआ था और ऊँची एड़ियों वाले सैंडिल्स और सिर पर विग पहना हुआ था। वे स्टेज पर नाच रहे थे और शायद गा भी रहे थे और साफ़ नज़र आता था कि वे सब खूब मौज-मस्ती कर रहे थे और उसके साथ ही ‘Neighbours 4 Neighbours’ नामक किसी चैरिटी संस्था के लिए, जिसका उद्देश्य अमरीका के गरीबों की मदद करना है, चंदा भी इकठ्ठा कर रहे थे।

उस सद्कार्य के लिए उन्होंने काफी बड़ी रकम इकठ्ठा कर ली और जबकि यहाँ, सारी दुनिया और एक ऐसे देश में जहाँ ऐसा आयोजन अकल्पनीय था, लोग उसे लेकर अचंभित और बहुत खुश थे, स्वाभाविक ही, कुछ उन्हीं के बहुत करीबी लोग खुश नहीं थे। एक अन्य चैरिटी ने, जिसके लिए पहले मैक्स ने बहुत समय और ऊर्जा खर्च की थी, उससे संपर्क करके कहा: उसने जो कुछ वहाँ किया, वे उसका अनुमोदन नहीं करते। यहाँ यह बताना उचित होगा कि वे लोग अपने आपको ‘रूढ़िवादी ईसाई’ (conservative Christians) मानते हैं। मैक्स का यह जवाब भी कि ईसा मसीह सबसे प्रेम करते थे और अपने अनुयाइयों को भी उन्होंने यही सिखाया था, उन्हें संतुष्ट नहीं कर। स्वाभाविक ही यह बात मेरे मित्र को दुखी कर गई कि उसके समय, प्रेम और ऊर्जा की, जो उसने इन लोगों के लिए अर्पित किए थे, कोई कदर नहीं की गई और इससे भी दुखद यह कि वे लोग उसे पथभ्रष्ट और चरित्रहीन समझते थे, सिर्फ इसलिए कि जो वह था वैसा ही बना रहना चाहता था।

मैं अपने ब्लॉग में यह सब मैक्स के समर्थन में लिख रहा हूँ। यह इस बात का एक और प्रमाण है कि आप कितना भी अच्छा करें, आपकी आलोचना करने वाले हमेशा विद्यमान रहेंगे। और एक बार मैं फिर ज़ोर देकर कहना चाहता हूँ कि हम सब बराबर हैं, एक समान हैं।

वैसे तो वास्तव में धार्मिक लोगों की इस तरह की बातों को पढ़कर ज़्यादा आश्चर्य चकित नहीं होता। धार्मिक लोग जितना अधिक धार्मिक होते हैं उतना ही अधिक कूढ़-मगज भी होते हैं, चाहे वे किसी भी धर्म को मानने वाले हों। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह हिन्दू धर्म को मानने वाले हैं, या फिर ईसाइयत या इस्लाम को मानते हैं, वे सभी जड़तापूर्वक अपनी उन धारणाओं पर अड़े रहते हैं, जो उनके प्राचीन धर्मग्रंथों में दर्ज अटल सूक्तियों से उद्भूत होती हैं। इसीलिए बहुत से लोग, जिनमें मैं भी शामिल हूँ, संगठित धर्मों से से किनारा कर लेते हैं! एक तरफ वे प्रेम का उपदेश देते हैं और दूसरी तरफ सिर्फ प्रेम किया जाने वाला व्यक्ति पुरुष है या स्त्री, इस छोटी सी बात पर प्रेम करने वालों के साथ भेदभाव बरतते हैं! मैं जान-बूझकर यह नहीं लिखता कि ‘प्रेम करने का निर्णय लें’ क्योंकि इसका निर्णय या निश्चय नहीं किया जा सकता, प्रेम आपके भीतर से उद्भूत होता है और वह पवित्र होता है और उसका लिंग से कोई सम्बन्ध नहीं होता!

इसलिए मैं अपने मित्र, मैक्स और दूसरों की भलाई करने की इच्छा रखने वाले सभी लोगों से कहना चाहता हूँ कि अगर आप ऐसा करते हुए महज लिंग की बिना पर या व्यक्तिगत आदतों या जाति या धर्म की बिना पर अपमानित किए जाते हैं तो किसी भी कीमत पर उनसे प्रभावित न हों और न ही उनसे डर कर अपने आपको बदलने की कोशिश करें! इस बात के एहसास से कि आप किसी ज़रूरतमंद की मदद कर रहे हैं, शक्ति प्राप्त करें। जिससे प्रेम करते हैं, प्रेम करते रहें और आप वास्तव में जो हैं, जैसे हैं, वही रहते हुए दुनिया में प्रेम को प्रसारित करते रहें!

और हाँ, अगर आप थोड़ा विश्राम चाहते हैं, किसी ऐसी जगह पर सुकून के साथ कुछ दिन व्यतीत करना चाहते हैं, जहाँ आपकी निजता पर कोई सवाल न उठाए, हमारे स्कूल के बच्चों के साथ, जिनकी हम लोग हर समय मदद करते रहते हैं, समय गुज़ारना चाहते हैं तो हमारे आश्रम के दरवाज़े आपके लिए सदा खुले हैं।