मीडिया, कम से कम भारतीय मीडिया इस वक्त एक ऐसे प्रकरण को प्रमुखता से समाविष्ट कर रहा है (कवर कर रहा है) जिसके बारे में मैं भी कुछ लिखना चाहता हूँ। एक भारतीय महिला रक्त-प्रदूषण के कारण आयरलैंड के एक अस्पताल में मर गई क्योंकि डॉक्टरों ने उसका गर्भपात कराने से इंकार कर दिया। डॉक्टरों ने कहा: यह एक ‘कैथोलिक देश’ है। मैं इस प्रकरण में धर्म और दवाइयों के घातक मेल के बारे में विस्तार से बताता हूँ।
जब वह भारतीय महिला, सविता हलप्पनवार पीठदर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंची तब उसके पेट में 17 माह का गर्भ था। परीक्षण करने पर यह पाया गया की उसका गर्भपात हो रहा है और इस पूरी प्रक्रिया में कुछ घंटे लग सकते हैं। उसे असहनीय दर्द हो रहा था और उसने और उसके पति ने डॉक्टरों से कहा कि गर्भपात की प्रक्रिया को थोड़ा तेज़ कर दें जिससे उसे अधिक देर यह जानलेवा दर्द न सहना पड़े।
और यहीं से उस प्राणघातक समस्या की शुरुआत हुई। भ्रूण में अभी दिल की धड़कन मौजूद थी और डॉक्टरों ने सविता और उसके पति को बताया कि यह एक ‘कैथोलिक देश’ है और इसका कानून उन्हें यह गर्भपात कराने से रोकता है। बच्चे के दिल की धड़कन रुकने के बाद उन्होंने सब कुछ किया लेकिन तब तक इतनी देर हो चुकी थी कि माँ की जान बचाना संभव नहीं था। उसने अस्पताल में तीन दिन जानलेवा दर्द सहते हुए बिताए और अंततः मृत्यु ने ही उसे दर्द से छुटकारा दिलाया।
सबसे पहले पूर्णेन्दु ने यह बात मुझे बताई और मेरी प्रतिक्रिया थी, "नहीं, ऐसा नहीं हो सकता। या तो तुम ठीक से मामला समझ नहीं पाए हो या वे गलत जानकारी प्रसारित कर रहे हैं।" मैं सोच भी नहीं सकता था कि किसी भी देश का कानून ऐसी परिस्थिति में माँ की जान को जोखिम में डाल सकता है, मृतप्राय भ्रूण के पूरी तरह मरने के इंतज़ार में माँ के प्रति इतनी लापरवाही बरत सकता है। वैसे भी माँ की मृत्यु के पश्चात बच्चे की मृत्यु भी निश्चित थी, तो ऐसी परिस्थिति में उन्होंने माँ की जान बचाने की कोशिश क्यों नहीं की, भले ही उनका धार्मिक विश्वास कुछ भी हो? विभिन्न अखबारों में इस प्रकरण के संबंध में चार-पाँच आलेख पढ़ लेने के बाद ही मुझे इस दुखद घटना पर विश्वास हो सका।
फिलहाल इस दुर्घटना की जांच चल रही है कि ठीक-ठीक क्या घटित हुआ और महिला की मृत्यु के लिए किसे दोषी ठहराए जाए, लेकिन यह तो स्पष्ट ही है कि इस दुर्घटना के पीछे गर्भपात रोकने के सख्त कानूनों का हाथ है। असल में एक नियम यह कहता भी है कि माँ की मृत्यु होने की संभावना होने पर गर्भपात किया जा सकता है लेकिन उसकी स्पष्ट व्याख्या नहीं की गई है इसलिए या तो डॉक्टर कोई निर्णय लेने में घबराते हैं कि ऐसा करना कानून सम्मत होगा या नहीं या फिर डॉक्टरों के कठोर धार्मिक विश्वास आड़े आ जाते हैं कि भ्रूण की हत्या करना पापकर्म है।
वैसे अब यह कोई मानी नहीं रखता कि जांच का क्या नतीजा होगा; यथार्थ यह है कि धर्म ने उस महिला की जान ले ली है। "यह एक कैथोलिक मुल्क है", यह तर्क दिया जा रहा है। कैसी विडम्बना है, कैसी त्रासदी है! जी हाँ, धर्म के कारण यह होता है। धर्म के कारण एक जान चली गई और उसे अब कोई वापस नहीं ला सकता।
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