केल्टिक और अमरीका के मूल निवासियों की आध्यात्मिकता पर मुग्ध हैं? उनकी रक्तपिपासु क्रूरता पर भी गौर करें! – 8 अप्रैल 2013

धर्म

शुक्रवार को हिमालय यात्रा पर गए सहभागी वापस आए। कुछ ऋषिकेश में रुक गए थे, जहां से उन्हें आगे की यात्रा करनी थी और बाकी आश्रम वापस आ गए। कल हमारे अंतिम मेहमान, हमारे मित्र सिल्विया, मेलोनी, थॉमस और आइरिस ने हमसे विदा ली। उन्मुक्त, बैठे ठाले और बतकही में उनके साथ एक और दिन बिताना सुखद रहा। इस दौरान मुझे थॉमस के साथ कुछ दिन पहले हुई एक चर्चा की याद आती रही: हमारे पूर्वजों की आध्यात्मिकता और कुछ लोगों का उसके प्रति आदर युक्त सम्मोहन।

मैंने थॉमस को बताया कि मैं समझता हूँ कि वर्तमान रूप में धर्म लोगों के साथ सदा के लिए नहीं रहने वाला है। वे सहमत हुए और हम लोग उन धर्मों के बारे में बातें करते रहे जो पहले अस्तित्व में थे और आज जिनकी हम सिर्फ कहानियाँ ही सुनते हैं।

हम जानते हैं कि यूनानी पौराणिक कथाओं में विभिन्न गुणों वाले सैकड़ों देवी-देवताओं का जिक्र आता है, अर्ध-देवता, दैत्य, आदि और जब भी लोग उनके बारे में सुनते हैं, उन्हें परी-कथाओं की, डिज्ने फिल्मों की और बच्चों के कॉमिक्स की याद आती है। रोमन देवता भी लगभग वैसे ही थे और हालांकि बच्चे स्कूलों में उनके बारे में पढ़ते हैं, मगर वे भी जानते हैं कि ये सब कोरी कल्पनाएँ हैं और यथार्थ से उनका दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं है। लेकिन इन सभ्यताओं से भी पहले कुछ संस्कृतियाँ थीं जिनके बारे में आम तौर पर बच्चों को पढ़ाया नहीं जाता। क्योंकि उन्हें पढ़ाया नहीं जाता और लोग उनके बारे में ज्यादा कुछ जानते नहीं हैं इसलिए जब भी वे उनके बारे में सुनते हैं तो वह सब उन्हें बड़ा दिलचस्प लगता है। उन लोगों के विश्वास, हालांकि बहुत व्यवस्थित नहीं थे और उन्हें 'धर्म' कहना ठीक नहीं होगा, मगर आखिर वे भी थे तो विश्वास ही, देवी-देवताओं पर, अलौकिक शक्तियों पर और यहाँ तक कि जादू-टोनों पर और काल्पनिक ऊर्जाओं पर। बहुत से लोग उनको लेकर अति उत्साहित और मंत्रमुग्ध हो उठते हैं और अगर पहले से उनका मानसिक विकास कुछ ऐसा हुआ है कि आसानी से प्रभावित हो जाता है तो वे उन विश्वासों को सच मान लेते हैं और उन्हें लगता है कि उस जमाने के विश्वास मौजूदा विश्वासों से भी बेहतर थे। पश्चिम में जैसा माहौल है उसमें उन्हें अमरीका के मूल निवासियों के विश्वासों को लेकर ज़्यादा मोह होता है जबकि कुछ लोगों को केल्ट लोगों के विश्वास अधिक आकर्षित करते हैं। यह अभी तक जारी है। जो लोग इन बातों पर भरोसा करते हैं और उनसे प्रभावित भी हैं वे बताएंगे कि कैसे उन लोगों के पास ज्ञान का खज़ाना था और कितनी बातें, जिन्हें हम भूल गए हैं, उनके यहाँ मौजूद थीं और यह भी कि उनकी सभ्यता इस ज्ञान और विचारों की बदौलत किस तरह आज की हमारी सभ्यता से अधिक शक्तिशाली और उन्नत थी।

सदियों पहले के उन मूल निवासियों के बारे में हमारी बहुत सी दूसरी जानकारियों को वे सिरे से नज़रअंदाज़ कर देते हैं! या फिर वे शायद उनके बारे में जानते ही नहीं हैं! थॉमस और आइरिस, जिन्हें जर्मनी में केल्ट्स लोगों द्वारा छोड़े गए अवशेषों की छानबीन करने में अच्छी ख़ासी रुचि रही है, बताते हैं कि एक बार वे एक संग्रहालय में गए थे जहां उनके पुरातन काल के कर्मकांडों को दर्शाया और उनका विवरण दिया गया था। वह सब उसके बिल्कुल विपरीत था जो आम तौर पर लोग उनके बारे में समझते हैं! उनमें मनुष्यों की बलि देने का रिवाज था मृतकों के कुछ हिस्सों का वे भक्षण भी करते थे क्योंकि वे मानते थे कि ऐसा करने से वे उन मृतकों की शक्तियों को प्राप्त कर सकते हैं। वे लोग बर्बर थे और आज के मूल्यों के अनुसार उन कृत्यों को अमानवीय कहा जाता। ठीक यही बात मैंने पिछले समय के अमरीका के मूल निवासियों के बारे में भी सुनी थी।

तो आप देखें, क्या हो रहा है-जो वे नहीं जानते उसके सम्मोह में वे खुद को और दूसरों को भी विश्वास दिलाना चाहते हैं कि पुरातन समय कितना महान था, कि उस समय लोग आज के मुकाबले अधिक आध्यात्मिक थे और जीवन और दुनिया के बारे में उनकी समझ हमसे बेहतर थी। वास्तविकता यह है कि वे लोग सिर्फ प्रेतात्माओं पर भरोसा किया करते थे क्योंकि उनके पास कई चमत्कारिक प्राकृतिक घटनाओं का कोई स्पष्टीकरण मौजूद नहीं था। वे बर्बर थे क्योंकि उनकी दुनिया कबीलों और कुटुम्बों के बीच हिंसक युद्धों तक सीमित थी। वे जंगली जानवरों का शिकार किया करते थे जिससे उन्हें खाने के लिए मांस, पहनने के लिए उनका चमड़ा और औज़ार बनाने के लिए उनकी हड्डियाँ उपलब्ध होते थे।

हाँ, अगर वे कहें कि पुरातन काल में जब चीज़ें सहज और सरल थीं तब समय आसान भी था, इस लिहाज से कि लोगों को बहुत सी चीज़ें उपलब्ध नहीं थीं या जब विज्ञान ने दुनिया की बहुत सी बातों को स्पष्ट नहीं किया था और लोगों के पास आज की तरह रोज़मर्रा के काम में सहायता के लिए उपकरण मौजूद नहीं थे और जब जीवन की रफ्तार धीमी थी और इस कारण आज की तरह भागमभाग नहीं थी; तो उनकी बात मानी जा सकती है। लेकिन वह समय आज से बेहतर नहीं था- वह तो रक्तरंजित, खूंखार, ठंडा और खतरनाक समय था।

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