यह कहानी कहने के बाद कि क्यों हिन्दू शिव का लिंग पूजते हैं और लिंगपूजा पर कुछ हास-परिहास के बाद आज मैं कुछ गंभीर होना चाहता हूँ और आपको बताना चाहता हूँ कि वास्तव में यह क्यों उचित नहीं है। आप मुझे कितना जानते हैं और मेरा लिखा आपने कितना पढ़ा है, इस पर निर्भर करेगा कि कारण जानने के बाद आप कितना विस्मित होते हैं।
यह नहीं कि भगवान के लिंग, शिवलिंग की पूजा करना मैं इसलिए अच्छा नहीं समझता कि वह लिंग है। नहीं, बल्कि इसलिए कि किसी की भी पूजा करने का कोई अर्थ नहीं है! मेरी दृढ़ मान्यता है कि आपको किसी भी मूर्ति की, भगवान के किसी अंग की या खुद भगवान की भी पूजा नहीं करनी चाहिए। कोई भी पूजा समारोह या कर्मकांड आपको कोई सहायता नहीं पहुँचा सकता।
चलिए, पुनः शिव के जननांग का ही उदाहरण लेते हैं। हिन्दू धर्म में अविवाहित लड़कियों को शिवलिंग की पूजा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। वह धर्म, जो लड़कियों की पवित्रता पर इतना ज़ोर देता है, उन्हें अक्षत योनि बने रहने की और लड़कों से दूर रहने की हिदायत देता है, वही उन्हें लिंग की पूजा करने का आदेश देता है। यह पूजा उन्हें क्या प्रदान करेगी? आप सोच भी नहीं सकते: अच्छा पति! हर सोमवार को अविवाहित लड़कियाँ उपवास रखती हैं और शिवलिंग की पूजा करती हैं। क्यों?: उस लिंग का बढ़िया से बढ़िया रूप उन्हें सारा जीवन प्राप्त होता रहे!
अधिकतर हिंदुओं की मान्यता है कि महिलाओं को विवाह के बाद शिवलिंग की पूजा तो करनी चाहिए मगर उसे छूना नहीं चाहिए। वह दूध भी नहीं पीना चाहिए, जो शिवलिंग पर चढ़ाया गया है और जिसे पवित्र माना जाता है।
मेरा विश्वास करें, महिलाओं, कि न तो लिंग रूपी पत्थर पर दूध चढ़ाने से आपको अच्छा पति मिलने में कोई सहायता हो सकती है और न ही सोमवार को भोजन न करने से आपके पास अधिक संख्या में विवाह प्रस्ताव आने वाले हैं। और न ही विवाह पश्चात इस लिंग को छूने से आपके विवाह में कोई समस्या आ सकती है।
यह सोचना नासमझी ही होगी कि धर्म के कारण लोग इन मूर्खतापूर्ण बातों पर विश्वास कर लेते होंगे। दूर से देखने पर आप इन बातों से अचंभित रह जाते होंगे। मैं अपने अनुभव से जानता हूँ कि अगर आप खुद ऐसी पूजा करते हैं तो उस पर आपत्ति भी नहीं जताते। लेकिन अगर आप यह ब्लॉग (ये शब्द) पढ़ रहे हैं तो इस विषय में गंभीरतापूर्वक विचार अवश्य करें।
एक बार फिर शिवरात्रि के दिन न जाने कितना दूध का अपव्यय होगा। एक मंदिर में ही हजारों लीटर दूध इस तरह चढ़ाया जाता है। भारत भर के न जाने कितने शहरों में न जाने कितने मंदिर हैं। आप कल्पना कर सकते हैं कि यह कितना बड़ा व्यर्थ का नुकसान है। पत्थर के लिंग पर चढ़ाया जाकर यह दूध नालियों में बहा दिया जाता है और फिर गंदी सीवेज लाइनों से होते हुए गरीब बस्तियों में पहुँच जाता है, जहाँ हजारों गरीब बच्चे एक गिलास दूध के लिए तरस रहे होते हैं।
मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि पत्थर के लिंग को नहलाने-धुलाने अपेक्षा अगर आप किसी गरीब माँ और उसके बच्चे को यह दूध दे देंगे तो आपको अधिक सुख प्राप्त होगा!
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