बौद्ध धर्म भी एक धर्म है, आप इस तथ्य को स्वीकार क्यों नहीं करते? 5 जून 2012

धर्म

पिछले दिनों जब मैंने गौतम बुद्ध के बारे में ब्लॉग लिखा और स्पष्ट किया कि कैसे उन्होंने भी लोगों को धर्म से मुक्ति दिलाने के स्थान पर खुद ही एक नए धर्म की स्थापना कर दी, तो मेरे अनुमान के अनुरूप लोगों के वक्तव्य आने शुरू हो गए: "बुद्धिज़्म धर्म नहीं है, यह एक दर्शन है, एक जीवन पद्धति!" जी हाँ, अपने फेसबुक पेज पर भी। मैंने यह बात पहली बार पढ़ी हो या सुनी हो ऐसी बात नहीं है और इसलिए आज मैं इसी वक्तव्य पर कुछ कहना चाहता हूँ।

मैं हमेशा कहता रहा हूँ कि सबसे पहली बात तो यह कि बौद्ध धर्म को मानने वाले अकेले नहीं है, जो अपने धर्म के बारे में यह दावा करते हैं-कई हिन्दू यही बात हिन्दू धर्म के लिए कहते हैं! और इस वक्तव्य का असली अर्थ क्या है? आप यह मानना ही नहीं चाहते कि जिस धर्म पर आप विश्वास करते हैं, वह दरअसल धर्म है ही नहीं क्योंकि आप भी अनुभव करते हैं और जानते हैं कि 'धर्म' कोई अच्छी चीज़ नहीं है। आप नहीं चाहते कि जिस पर आपका विश्वास है उसे 'धर्म' कहा जाए क्योंकि आप भी जानते हैं कि धर्म का अर्थ है नियंत्रण और धोखा, जैसा कि मैं हमेशा कहता आया हूँ। आप इस बात का प्रतिवाद करते हैं कि आप किसी धर्म को मानते हैं क्योंकि आपके अन्तःकरण में खोट है। आप यह मानने के लिए तैयार नहीं होते कि आप किसी धर्म में विश्वास करते हैं।

चलिए, पहले हम धर्म की परिभाषा पर चर्चा कर लेते हैं। मैंने ब्रिटानिका विश्वकोश (Encyclopaedia Britannica) का संदर्भ लिया है, जिस पर एक विश्वसनीय संदर्भ-ग्रंथ के रूप में मेरा भरोसा है। उसमें 'धर्म' शब्द की व्याख्या की शुरुआत इस प्रकार की गई है:

धर्म: मानव मात्र का उन बातों से संबंध, जिन्हें पवित्र, सम्मानजनक, परम-सत्य, आध्यात्मिक, ईश्वरीय या मानव मात्र की श्रद्धा के उपयुक्त माना जाता है। उसे जीवन-मृत्यु और मृत्यु पश्चात नियति आदि परम और आदिम चिंताओं का सामना करने के तरीकों के बारे में मनुष्य द्वारा अर्जित ज्ञान के रूप में भी देखा जाता है। कई संस्कृतियों में यह संबंध और ये चिंताएँ ईश्वर या आत्माओं और मनुष्य के बीच संबंध या ईश्वर या आत्माओं के प्रति उनके रवैये के रूप में व्यक्त होते हैं। कुछ अधिक मानववादी और प्रकृतिवादी धर्मों में यह संबंध उनके और व्यापक मानव समाज या सम्पूर्ण प्रकृति के साथ मनुष्य के संबंध के रूप में सामने आते हैं।

दूसरे शब्दकोशों में भी धर्म (religion) की लगभग यही परिभाषाएँ मिलती हैं। यह देखना रोचक होगा कि, और यहाँ मैं सीधे मेरियम वेबस्टर शब्दकोश के उस हिस्से को कोट कर रहा हूँ, जहां 'धर्म' शब्द के उदाहरण बताए गए हैं: दुनिया में कई धर्म हैं, जैसे बुद्धिज़्म, ईसाइयत, हिन्दू धर्म, इस्लाम और जुडाइज़्म।

तो आप देख सकते हैं कि सभी विश्वकोश और शब्दकोश बुद्धिज़्म को धर्म मानते हैं और स्कूल में बच्चों को भी दुनिया के पाँच सबसे बड़े धर्मों के बारे में यही सिखाया जाता है! हिन्दू धर्म और बुद्धिज़्म दोनों इस सूची में शामिल हैं! दोनों शब्दकोशों के अंग्रेज़ी संस्करणों में 'बुद्धिज़्म' की परिभाषा 'a religion' शब्द से शुरू होती है। अगर आप भी ध्यान से देखें तो यह बिल्कुल स्पष्ट दिखाई देता है!

हिन्दू करोड़ों देवी-देवताओं के अस्तित्व में विश्वास करते हैं, ईसाई, मुस्लिम और यहूदी एकेश्वरवादी हैं। बौद्ध किसी ईश्वर या देवता पर विश्वास नहीं करते (बौद्ध निरीश्वरवादी हैं) लेकिन इसके बावजूद बुद्धिज़्म धर्म ही है। जैसे ईसाई ईश्वर पुत्र जीज़स क्राइस्ट को मानते हैं, मुस्लिम पैगंबर मुहम्मद को, उसी तरह बौद्ध गौतम बुद्ध को मानते हैं।

आप भी धर्मग्रंथों की शिक्षाओं के अनुगामी हैं। ईसाइयों के पास बाइबल है, यहूदियों के पास तोरा, मुसलमानों के पास कुरान है, हिंदुओं के पास वेद और आपके पास है धम्मपद। मैं जानता हूँ कि इन सभी धर्मों में इन धर्मग्रंथों के अलावा और भी बहुत से धार्मिक ग्रंथ हैं, जिन पर उन धर्मों को मानने वाले विश्वास करते हैं मगर मैंने इन धर्मों के मुख्य धर्मग्रंथों का हवाला दिया है।

इसके अलावा आपके पास लामा हैं, जैसे गुरु होते हैं वैसे शिक्षक, जो उपदेश देते हैं और बुद्ध धर्म की मूलभूत शिक्षाओं के विषय में बताते हैं। आप तर्क देंगे कि बुद्धिज़्म में कई तरह की शिक्षाएँ हैं, जब कि उदाहरण के लिए, ईसाइयत में सिर्फ बाइबल है, जिसे ईसाइयत का एकमात्र मार्गदर्शक धर्मग्रंथ माना जाता है। लेकिन वास्तविकता यह है कि ईसाइयत में भी बाइबल के अलावा दूसरे धार्मिक ग्रन्थ मौजूद हैं, जिनकी शिक्षाओं को ईसाइयत में मान्यता प्राप्त है! बल्कि सभी दूसरे धर्मों में भी ऐसा ही है!

जैसे हिन्दू धर्म में मंदिर, ईसाइयत में चर्च, इस्लाम में मस्जिद और यहूदियों में सिनेगग होते हैं उसी तरह बुद्धिज्म में भी मंदिर होते हैं। आपके अपने कर्मकांड और धार्मिक समारोह होते हैं। आपके अपने भित्तिचित्र और अपनी मूर्तियाँ हैं। मैंने कहीं एक मजेदार बात पढ़ी थी: बुद्ध स्वयं मूर्तियों के विरुद्ध थे मगर आज उनकी मूर्तियों का विश्व-कीर्तिमान है।

उनका भी अपना एक समूह है, जो कम या ज्यादा, उन्हीं बातों पर विश्वास करता है। यही उनकी शिनाख्त है। वे 'बौद्ध' हैं। वे धार्मिक हैं, वे एक धर्म पर विश्वास करते हैं। बुद्धिज़्म एक धर्म है। इसका अर्थ यह नहीं है कि धर्म के साथ वह एक दर्शन या जीवन पद्धति नहीं है। ऐसा नहीं है कि ये दोनों बातें एक साथ संभव नहीं हैं! आखिर धर्म यही सब कुछ तो है-यह धर्म है, ये वे सब बातें हैं, जिन्हें आप स्वीकार करते हैं, यह आपकी जीवन पद्धति है। इसके अलावा, वह संगठित भी है, उसके पास उपदेश हैं, उसे मानने वाले लोग उसका विस्तार करना चाहते हैं, उसकी मूलभूत बातों से लोगों को सहमत करना चाहते हैं। ये सब बातें, बुद्धिज़्म सहित, सभी धर्मों में पाई जाती हैं। सभी धर्मों में भ्रष्टाचार भी है और मैं कहना चाहूँगा कि बौद्ध धर्म भी इससे अछूता नहीं है। मैंने एक बार एक भ्रष्ट लामा, कर्मापा लामा, के विषय में विस्तार से लिखा था। भ्रष्ट लामाओं की और भी कई कहानियाँ मैंने सुनी हैं।

जिस बात को मैं ज़ोर देकर कहना चाहता हूँ वह यह है कि जब तक मैं दूसरों के धर्मों पर लिखता हूँ, लोग उसकी प्रशंसा और समर्थन करते हैं। उस वक़्त तक सब कुछ ठीक होता है, उन धर्मों की हर बुरी बात को मैं ज़ोर-शोर से कहने के लिए स्वतंत्र हूँ। लेकिन जैसे ही मैं उस धर्म के बारे में बात करता हूँ, जिन्हें वे मानते हैं, तो कुछ लोग नाराज़ हो जाते हैं। लेकिन अगर आप किसी धर्म को मानते हैं तो आपको यह भी मानना होगा कि उसके कुछ नकारात्मक पहलू भी होते हैं।

जी हाँ, बुद्धिज़्म भी दूसरे सभी धर्मों जैसा एक धर्म है।

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