हिन्दू धर्म या ईसाईयत में गरीबों का धर्म परिवर्तन कराने का मूर्खतापूर्ण विचार – 28 सितम्बर 2011

सिर्फ राजनीति ही गरीबों का शोषण नहीं करती, धर्म भी करता है। ईसाई धर्मप्रचारक भारत आते हैं और गाँव-गाँव घूमकर लोगों को ईसाई बनाते हैं। खासकर वे देश के अंदरूनी इलाकों में, छोटे-छोटे गाँवों और आदिवासियों के बीच जाकर उन्हें भोजन, कपड़े-लत्ते, शिक्षा और कई बार पैसे और रोज़गार तक मुहैया कराते हैं। बदले में उनकी सिर्फ एक शर्त होती है: वे बप्तिस्मा करा लें और अपना धर्म बदलकर ईसाई हो जाएं। इससे उन गरीबों को जीने का एक मौका मिलता है, एक आशा की किरण, कि वे सदियों की गरीबी से बाहर निकल पाएंगे।

अक्सर हिन्दू राष्ट्रवादी संगठन, जैसे विश्व हिन्दू परिषद और बजरंगदल, इन ईसाई धर्मप्रचारकों के विरुद्ध खुले आम अपनी नाराज़गी का इज़हार करते हैं। उनकी शिकायत यह होती है कि पश्चिमी देशों से प्राप्त विशाल धनराशियाँ लेकर ये लोग भारत आते हैं और बड़ी संख्या में हिन्दुओं का धर्मपरिवर्तन करके उन्हें ईसाई बना लेते हैं।

जो बात ये लोग नहीं देखना चाहते, वह यह है कि अपना धर्म छोड़कर ईसाई बनने वाले लोग सिर्फ इसलिए धर्मपरिवर्तन कर लेते हैं क्योंकि वे भुखमरी से पीड़ित हैं और ऐसा करने से उन्हें भोजन की सुरक्षा प्राप्त होती है। वे नहीं जानते कि आज उनके यहाँ भोजन बनेगा या नहीं। उनके लिए इसका कोई अर्थ नहीं होता कि वे हिन्दू हैं या ईसाई और वे पूजा करने मंदिर जाते हैं या चर्च। एक बार भरपेट भोजन मिल जाने के बाद वे उसी तरह ईसा मसीह की पूजा कर सकते हैं जैसे अब तक राम की करते रहे थे। वे न तो अपने वर्तमान धर्म से नाखुश हैं और न ही इस नए धर्म की आश्चर्यजनक शक्तियों या अच्छाइयों से अभिभूत या सहमत हैं। उनकी कुछ बुनियादी ज़रूरतें हैं, उसके बाद ही धर्म का स्थान आता है। वे किसी कट्टर आस्था पर शहीद होने वाले लोग नहीं हैं, जो भूखों मर जाएंगे मगर अपने ईश्वर को त्यागकर दूसरे ईश्वर की पूजा नहीं करेंगे। वे व्यावहारिक लोग हैं, अभिभावक अपने बच्चों के बारे में सोचते हैं कि अगर भोजन न मिला तो वे भूखों मर जाएंगे। अगर वे धर्मपरिवर्तन कर लें तो न सिर्फ उन्हें भोजन मिलेगा बल्कि जीने का उनका नजरिया ही बदल जाएगा! सिर्फ जिन्दा रहने के संघर्ष के स्थान पर उन्हें भी दूसरों की तरह ठीकठाक तरीके से जीने का मौका मिलेगा। क्या यह बिल्कुल स्पष्ट नहीं है कि वे क्यों अपना धर्म बदलते हैं?

मुझे गलत मत समझिए, मैं नहीं समझता कि पैसे का लालच देकर दूसरों का धर्मपरिवर्तन कराना कोई अच्छा विचार है। इसके विपरीत वास्तव में मैं इसे बेहद मूर्खतापूर्ण बात मानता हूँ कि दूसरों को अपनी आस्थाओं पर विश्वास करने पर मजबूर किया जाए। मैं कभी दूसरों के विश्वासों को बदलने की चेष्टा नहीं करता और न ही मुझे इस बात की कोई ग़लतफ़हमी है कि जिसे मैं अपने विचार बता रहा हूँ, वह तुरंत अपनी आस्थाओं को त्यागकर मेरे विचारों को मानना शुरू कर देगा। लेकिन ये हिन्दू कट्टरपंथी उन्हीं जगहों पर जाकर, जहाँ ईसाई धर्मप्रचारक गए थे, उन्ही नए बने ईसाइयों को वापस हिन्दू धर्म में धर्मांतरण कराने की कोशिश करते हैं। वे भी उन्हें भोजन और पैसों का लालच देते हैं और गाँव वाले, स्वाभाविक ही, बड़े खुश हैं कि उन्हें दोनों तरफ से मदद मिल रही है। जब भी कोई ऐसा प्रस्ताव रखता है, वे अपना धर्म बदलकर दूसरा धर्म अपना लेते हैं। जब कोई ईसाई आएगा तो वे फिर से ख़ुशी-ख़ुशी ईसा मसीह की पूजा शुरू कर देंगे।

क्या ये ईसाई धर्मप्रचारक नहीं जानते कि जब कोई भूखा होता है, जब उसे अपने परिवार के लिए भोजन जुटाने की चिंता होती है तो उसके लिए धर्म गौण हो जाता है? आप सिर्फ लोगों को भोजन मुहैया कराएं, संभव हो तो उनके लिए बेहतर जीवन की दूसरी सुविधाएँ मुहैया कराएं और लोगों को अपना निर्णय खुद लेने के लिए स्वतंत्र छोड़ दें कि वे किस धर्म को मानना चाहते हैं। क्या आप अपने ही धर्म का अपमान नहीं कर रहे होते जब लोगों का धर्मपरिवर्तन कराने के लिए आप ऐसी चालबाज़ियाँ करते हैं। दूसरों को अपने धर्म में लाने के लिए आपको रिश्वत क्यों देनी पड़ती है? अगर आपका धर्म वास्तव में इतना महान है तो लोग अपनी मर्जी से उसे अपनाएंगे, इसलिए नहीं कि उन्हें मजबूरी में ऐसा करना पड़ रहा है।

Related posts

जीवन आपका है, निर्णय भी आपके होने चाहिए-आपको क्या करना है, इस पर धर्म के दबाव का प्रतिरोध कीजिए - 17 सितंबर 2015

जीवन आपका है, निर्णय भी आपके होने चाहिए-आपको क्या करना है, इस पर धर्म के दबाव का प्रतिरोध कीजिए – 17 सितंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि धर्म चाहता है कि लोग उसके निर्देशों पर चलें और लोगों को चाहिए कि ...
जब चुनाव, विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को धर्म सीमित करता है - 16 सितंबर 2015

जब चुनाव, विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को धर्म सीमित करता है – 16 सितंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि किस तरह धर्म स्वतंत्रता की उनकी परिकल्पना से बहुत अलग है: वह लोगों पर ...
यह कहना कि इस्लाम शांति का धर्म नहीं है, क्यों इस्लाम के विरुद्ध पूर्वग्रह नहीं है - 15 सितंबर 2015

यह कहना कि इस्लाम शांति का धर्म नहीं है, क्यों इस्लाम के विरुद्ध पूर्वग्रह नहीं है – 15 सितंबर 2015

स्वामी बालेंदु स्पष्ट कर रहे हैं कि बिना घृणा के भी आप इस्लाम और उसके प्रसार को लेकर अपनी चिंताएँ ...
यूरोपियन सरकारों से अपील - शरणार्थियों की मदद करें लेकिन मजहब और मस्जिदों पर सख्त पाबंदी लगाएँ - 14 सितंबर 2015

यूरोपियन सरकारों से अपील – शरणार्थियों की मदद करें लेकिन मजहब और मस्जिदों पर सख्त पाबंदी लगाएँ – 14 सितंबर 2015

जर्मनी में 200 मस्जिदें तामीर करने के सऊदी अरब के प्रस्ताव पर स्वामी बालेंदु अपने विचार लिख रहे हैं। उनके ...
संथारा की मूर्खतापूर्ण परंपरा की वजह से आत्महत्या को न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता! 26 अगस्त 2015

संथारा की मूर्खतापूर्ण परंपरा की वजह से आत्महत्या को न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता! 26 अगस्त 2015

स्वामी बालेंदु एक टी वी परिचर्चा का ज़िक्र कर रहे हैं, जिसमें वे भी शामिल हुए थे। यह चर्चा संथारा ...
धर्म के कपटपूर्ण संसार में दो तरह के लोग रहते हैं - 11 जून 2015

धर्म के कपटपूर्ण संसार में दो तरह के लोग रहते हैं – 11 जून 2015

स्वामी बालेंदु उन लोगों के बारे में लिख रहे हैं जो धर्म द्वारा निर्मित भ्रमजाल में निवास करते हैं-या तो ...
"मैं ईश्वर की इच्छा से गरीब हूँ और इस बारे में कुछ नहीं किया जा सकता" - धर्म का बुरा प्रभाव - 26 मार्च 2015

"मैं ईश्वर की इच्छा से गरीब हूँ और इस बारे में कुछ नहीं किया जा सकता" – धर्म का बुरा प्रभाव – 26 मार्च 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि न जाने कितने लोग अपनी बुरी हालत को सहजता से स्वीकार कर लेते है ...
गैर हिंदुओं को भारत के धार्मिक समारोहों में शामिल होने के लिए प्रेरित करने संबंधी एक मज़ेदार रिपोर्ट - 26 फ़रवरी 2015

गैर हिंदुओं को भारत के धार्मिक समारोहों में शामिल होने के लिए प्रेरित करने संबंधी एक मज़ेदार रिपोर्ट – 26 फ़रवरी 2015

स्वामी बालेन्दु अपने कुछ मेहमानों के साथ हुए अनुभवों का ज़िक्र कर रहे हैं, जिनमें उनसे धार्मिक समारोहों में शामिल ...
क्या भगवान के लिंग की पूजा आपको अच्छा पति दिलवा सकता है? 19 फरवरी 2015

क्या भगवान के लिंग की पूजा आपको अच्छा पति दिलवा सकता है? 19 फरवरी 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि वास्तव में वे क्यों सोचते हैं कि लिंग को लेकर कोई समस्या नहीं है- ...
आइए, लिंग की पूजा करें - उसमें क्या बुराई है? 18 फ़रवरी 2015

आइए, लिंग की पूजा करें – उसमें क्या बुराई है? 18 फ़रवरी 2015

स्वामी बालेन्दु शिवलिंग को लेकर प्रचलित एक और कहानी सुना रहे हैं-और साथ ही इसमें निहित हिन्दू धर्म के एक ...

Leave a Reply