बाइबल के 22 हास्यास्पद और क्रूर नियम- 11 जून 2012

धर्म

मैंने कई बार कहा है कि धर्मग्रंथ हमारे प्राचीन-कालीन पूर्वजों द्वारा लिखी गई महज साहित्यिक कृतियाँ हैं और आधुनिक युग में उनकी कोई व्यावहारिकता और प्रासंगिकता नहीं रह गई है। और कुछ भी मान लें मगर उन्हें किसी भी तरह से पवित्र और अकाट्य नहीं माना जा सकता कि करोड़ों लोग उनका अनुसरण करें। वे प्राचीन हैं और आज अप्रचलित और अप्रासंगिक हो चुके हैं। बहुत से लोग नहीं समझते कि वे कितने अप्रासंगिक हो चुके हैं क्योंकि वे उनके बारे में पर्याप्त रूप से नहीं जानते। लेकिन अगर वे उन्हें ठीक से पढ़ें, अध्ययन करें तो पाएंगे कि उन धर्मग्रंथों में एक से बढ़कर एक हास्यास्पद और क्रूरतापूर्ण बातें लिखी हुई हैं।

न्यूयार्क में रहने वाले मेरे मित्र, डेनिस टेकिनर ने कुछ समय पहले ईसाई धर्मग्रन्थ, बाइबल में मौजूद कुछ मूर्खतापूर्ण नियमों की एक सूची तैयार की थी और लोगों को आगाह किया था कि वे बाइबल को ईश्वरीय कथन न मानें अन्यथा उन्हें इन नियमों का भी पालन करना होगा:

-एक खेत में एक साथ विभिन्न फसलें न उगाएँ। (लवेटिकस 19:19)

-एक से अधिक सूत से बना कपड़ा मत पहनिए। (लवेटिकस 19:19)

-सिर के बाल न काटें और न दाढ़ी बनाएँ। (लवेटिकस 19:27)

-जो व्यक्ति अपने माता-पिता को कोसता है या उनके विरुद्ध है, हत्या के योग्य है। (लवेटिकस 20:9)

-जो पुरुष अपनी पत्नी को धोखा देता है या इसके उलट जो पत्नी अपने पति को धोखा देती है, मारे जाने योग्य है। (लवेटिकस 20:10)

-अगर एक व्यक्ति दूसरे से झूठ बोलता है तो दोनों को मार डालना चाहिए। (लवेटिकस 20:13)

-अगर कोई पुरुष या स्त्री किसी जानवर के साथ यौन संबंध स्थापित करते हैं तो उस व्यक्ति और जानवर दोनों को मार डालना चाहिए। (लवेटिकस 20:15-16)

-अगर कोई पुरुष रजस्वला स्त्री के साथ यौन संबंध स्थापित करता है तो दोनों को समाज से बहिष्कृत कर देना चाहिए। (लवेटिकस 20:18)

-मनोरोगी (अतींद्रिय), जादूगर और चुड़ैल पत्थर मार-मारकर हत्या करने योग्य हैं। (लवेटिकस 20:27)

-अगर किसी पुजारी या पुरोहित की लड़की वेश्यावृत्ति करती है तो उसे खूँटे से बांधकर आग लगा देनी चाहिए। (लवेटिकस 21:9)

-जिनकी नाक चपटी है, या जो अंधे या लूले हैं, वे ईश्वर के पूजास्थल में प्रवेश नहीं कर सकते। (लवेटिकस 21:17-18)

-जो ईश्वर को कोसता है या ईशनिन्दा करता है, उसकी सामुदायिक रूप से पत्थर मार-मारकर हत्या कर दी जाए। (लवेटिकस 21:14-16)

डूटरानमी की पुस्तक से:

-कोई भी व्यक्ति, जो ईश्वर के विरुद्ध सपना देखता है या जो उसके विरुद्ध भविष्यवाणी करता है या जो तुम्हें ईश्वर से विमुख करने की कोशिश करता है, उसकी हत्या कर दी जाए। (डूटरानमी 13:5)

-कोई भी अगर तुम्हें किसी दूसरे ईश्वर की पूजा करने की सलाह देता है तो, चाहे वह तुम्हारे परिवार का सदस्य ही क्यों न हो, उसकी हत्या कर दो। (डूटरानमी 13:6-10)

-अगर किसी दूसरे ईश्वर की पूजा करने वाला कोई शहर आपको दिखाई दे तो उस शहर को तहस-नहस कर दो और वहाँ रहने वाले सभी लोगों की हत्या कर दो, यहाँ तक कि जानवरों को भी ज़िंदा मत छोड़ो। (डूटरानमी 13:12-16)

-भिन्न (अन्य) धर्म मानने वाले हर व्यक्ति का कत्ल कर दो। (डूटरानमी 17:2-7)

-औरतों को पुरुषों के और पुरुषों को औरतों के वस्त्र पहनने की अनुमति नहीं दी गई है। (डूटरानमी 22:5)

न्यू टेस्टामेंट (नए नियम) से:

-गुलामों को अपने मालिकों के सामने पूर्ण समर्पण कर देना चाहिए और उनका आज्ञाकारी होना चाहिए। (इफिज्यंस 6:5)

-औरतों को अपने पति के सामने पूर्ण समर्पण करना चाहिए। (1 पीटर 3:1 और 3:5)

-औरतों को अपने बालों में चोटी नहीं करनी चाहिए और न तो कोई आभूषण पहनना चाहिए, न ही कोई आकर्षक वस्त्र। (इस संदर्भ में, मैं इन शब्दों के अर्थ में किसी भी तरह के मेकअप और बालों को रंगना भी शामिल मानता हूँ।-1पीटर 3:3; 1 टिमती 2:9)

-औरतों को सामान्य रूप से समर्पित और चुप (शांत) रहना चाहिए और कभी भी न तो शिक्षा देनी चाहिए और न पुरुषों पर किसी भी प्रकार का अधिकार जताना चाहिए। उन्हें खामोश रहना चाहिए। (1 टिमती 2:12)

-किसी भी पूजास्थल में महिलाओं को सिर ढँककर रखना चाहिए। (1 करेंथीयंस 11:4-7)

बाइबल अकेला ऐसा धर्मग्रंथ नहीं है, जिसमें ऐसे मूर्खतापूर्ण और क्रूर नियम पाए जाते हों। अगले दो ब्लोगों में मैं हिन्दू धर्म और इस्लाम में पाए जाने वाले ऐसे ही नियम-क़ानूनों के बारे में बताऊंगा।

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