कुरान और इस्लाम में पाए जाने वाले 17 क्रूर और अकल्पनीय नियम और आयतें- 13 जून 2012

धर्म

पिछले दो दिन ईसाइयत और हिन्दू धर्म में पाए जाने वाले कुछ क्रूर और मूर्खतापूर्ण नियमों के बारे में लिखने के बाद हमने इस्लाम के बारे में भी अच्छी ख़ासी खोज की और हमें लगता है कि हमें अच्छे परिणाम प्राप्त हुए।

-अच्छी औरतें वे हैं, जो आज्ञाकारी हैं और उन रहस्यों को छिपाकर रखती हैं, जिन्हें अल्लाह ने भी छिपाकर रखा है। उन औरतों को, जिनसे विद्रोह का खतरा है, चेतावनी दें और अपने साथ बिस्तर पर न सुलाएँ और चाबुक से मारें (कोड़े मारें)। (कुरान 4:34)

-मज़हब को मानने वाली औरतों को चाहिए कि वे अपनी नज़रें झुकाकर रखें और अपने स्त्रीत्व की (अपनी शर्मो हया की) रक्षा करें; उन्हें अपनी खूबसूरती और आभूषणों का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए। उन्हें अपने सीनों को पर्दे में छिपाकर रखना चाहिए और अपनी खूबसूरती, अपने पति, उसके औरत और मर्द रिश्तेदार, अपने पति के गुलाम या शारीरिक इच्छाओं से महरूम मर्द नौकर (हिजड़े) और छोटे बच्चों को छोड़कर किसी और को नहीं दिखाना चाहिए। उन्हें पैर पटककर नहीं चलना चाहिए जिससे उनके गुप्त आभूषणों की तरफ लोगों का ध्यान न जाए। (कुरान 24:31)

-जो अपने स्वार्थ के लिए धर्मग्रंथ में कही गई बातों को छिपाते हैं, उन्हें जलते हुए अंगारों का सेवन करना होगा (उनके उदर आग में स्वाहा होंगे)। वे दर्दनाक अंत के लिए अभिशप्त हैं। (कुरान 2:174)

-ईसाई और यहूदी (जो धर्मग्रंथ के सिर्फ एक हिस्से पर ही विश्वास लाते हैं) इस जीवन में भी कष्ट उठाएंगे और मरने के बाद नर्क में जाएंगे। (कुरान 2:85)

-जहां भी मिलें, नास्तिकों का कत्ल करो। अगर वे आप पर आक्रमण करते हैं तो उन्हें मार डालो। यही विश्वास न करने वालों का इनाम है। (कुरान 2:191)

-जन्नत में जाने वालों का कुंवारियाँ इंतज़ार कर रही हैं। (कुरान 3:15)

-जो नास्तिक हैं, उनके लिए दर्दनाक अंत का अभिशाप है। (कुरान 3:21)

-जो अपने अच्छे कामों की डींग हाँकते हैं, वे नर्क में जाएंगे। (कुरान 3:188)

-विश्वास न करने वाले नास्तिक सदा-सदा के लिए आग में जलेंगे। जब उनकी त्वचा आग में जल जाएगी तो नई त्वचा प्रदान की जाएगी, जिससे वे लगातार कष्ट झेलते रहें। (कुरान 4:56)

-जो अल्लाह और उसके पैगंबर के विरुद्ध युद्ध करेंगे, उनका कत्ल कर दिया जाएगा या उन्हें सूली पर लटका दिया जाएगा या उनके परस्पर विपरीत हाथ और पाँव काट दिये जाएंगे या उन्हें देश से निष्कासित कर दिया जाएगा। इस दुनिया में उन्हें इस तरह से तिरस्कृत किया जाएगा और दूसरी दुनिया में उनके लिए भयंकर बरबादी लिखी हुई है। (कुरान 5:33)

– विश्वास न करने वाले नास्तिकों को उबलता पानी पीने के लिए मजबूर किया जाएगा और वे दर्दनाक अंत के लिए अभिशप्त हैं। (कुरान 6:70)

-जो आग में जलने के लिए अभिशप्त होंगे, उनके माथे और पीठ को दागा जाएगा। (कुरान 9:35)

-जो भी यह समझता है कि इस जीवन में और मरणोपरांत अल्लाह उसकी मदद को नहीं आएगा उसे एक लंबी रस्सी छत से लगाकर फांसी लगा लेनी चाहिए और खुद देखना चाहिए कि क्या उसका इतना प्रयास उसे अपने उस दुख से निजात दिला पाया, जिसे लेकर वह इतना क्रुद्ध था। (कुरान 22:15)

-व्यभिचारी और व्यभिचारिणी, दोनों को सौ कोड़े मारो। और अगर तुम अल्लाह और आखिरत पर यकीन रखते हो तो अल्लाह के आज्ञाकारी होने के नाते तुम्हें उन पर तरस न आए। और ईमानवाले कुछ लोग इस सज़ा के गवाह बनें। (कुरान 24:2)

-जो कुरान को ‘महज नीतिकथाएँ’ समझते हैं, उनके नाक को दागा जाएगा। (कुरान 68:15-16)

-अगर कोई औरत किसी मर्द को पाँच बार ‘सीधे अपने स्तनों से’ दूध पिलाती है तो उनके बीच पारिवारिक रिश्ता स्थापित हो जाता है और इसलिए दोनों को अकेले में साथ रहने की इजाज़त दी जा सकती है। (2007 में दिया गया मिस्री फतवा, बाद में वापस लिया गया)

अंतिम नियम, हालांकि वापस ले लिया गया है, मैं उसकी अतीव हास्यास्पदता (उसके मसखरेपन) के चलते उसे भी शामिल करने का लोभ संवरण नहीं कर पाया। ज़ाहिर है, उसे इस सूची से खारिज माना जाए। कल मैं इन तीन सूचियों पर अपने संक्षिप्त विचार प्रकट करूंगा।

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