हिन्दू धर्मग्रन्थों में मौजूद 14 अटपटे और क्रूर नियम- 12 जून 2012

धर्म

कल मैंने अपने एक मित्र द्वारा तैयार की गई बाइबल में मौजूद हास्यास्पद नियमों की सूची प्रकाशित की थी और कहा था कि ईसाइयत ही एक मात्र ऐसा धर्म नहीं है, जो अपने धर्मग्रंथों में ऐसी पुरातनपंथी और क्रूर अवधारणाएँ प्रस्तुत करता है। हिन्दू धर्म भी इस मामले में पीछे नहीं है! मैंने हिन्दू धर्मग्रंथों के संस्कृत मूलपाठों का भी अध्ययन किया है, मगर यहाँ आप हिन्दी में भी पढ़ सकते हैं:

-अगर नीची जाति का व्यक्ति उच्च जाति के किसी रोजगार को अपनाता है तो राजा को चाहिए कि उसकी संपत्ति जप्त कर ले और उसे अपने राज्य से निकाल बाहर करे। (मनुस्मृति, X:96)

-अगर कोई शूद्र (निचली जाति का सदस्य) किसी ब्राह्मण को नैतिक शिक्षा देने की हिम्मत करे तो राजा को चाहिए कि उसके कानों और मुंह में खौलता तेल डालने की सज़ा मुकर्रर करे। (मनुस्मृति, VII :272)

-इसी तरह, अगर कोई शूद्र ब्राह्मण के लिए उपयुक्त या आरक्षित आसन पर बैठता है तो उसकी छाती को गरम सलाखों से दागा जाए या उसके नितंबों को काट दिया जाए! (मनुस्मृति, VIII:281)

-भले ही किसी महिला का पति नैतिक रूप से पतित हो, किसी दूसरी औरत के साथ संबंध रखता हो और अज्ञानी और सारे सद्गुणों से रहित हो तो भी पत्नी को चाहिए कि वह उसे ईश्वर माने और उसी के अनुरूप व्यवहार करे। (मनुस्मृति, V: 154)

-संरक्षकों को चाहिए कि औरतों को स्वतंत्र रूप से कोई भी निर्णय लेने की आज़ादी न दें। (मनुस्मृति, IX:2)

-निचली जाति का कोई व्यक्ति उच्च जाति की किसी स्त्री के साथ, उसकी सहमति या असहमति से, संभोग करता है तो उसका कत्ल कर दिया जाए। (मनुस्मृति, VIII:366)

-अगर कोई ब्राह्मण (सबसे उच्च जाति) किसी शूद्र (सबसे निचली जाति) को गाली देता है तो उसे थोड़ा-बहुत अर्थदण्ड दिया जा सकता है मगर यदि शूद्र किसी ब्राह्मण को गाली देता है तो उसकी हत्या कर दी जाए। (मनुस्मृति, VIII: 267/268)

-अगर कोई ब्राह्मण (सबसे उच्च जाति) किसी शूद्र (सबसे निचली जाति) की हत्या कर देता है तो उसे एक बिल्ली, मेंढक, उल्लू या कौंवे को मारकर प्रायश्चित्त करना होगा। (मनुस्मृति, XI: 131)

-स्वतंत्र विचारों वाले, नास्तिक, तर्कवादी और बौद्ध धर्म का पालन करने वालों के साथ आदर युक्त व्यवहार नहीं करना चाहिए; हाँ, दयालुतापूर्वक उन्हें भोजन कराया जा सकता है। (मनुस्मृति, MS IV: 30)

-नास्तिकों के परिवारों को खत्म करने में देर नहीं करनी चाहिए। (मनुस्मृति, MS III: 65)

-अगर कोई औरत किसी पुरुष को उसकी इच्छापूर्ति करने नहीं देती तो पुरुष उसे रिश्वत का लालच दे। अगर वह फिर भी न माने तो लकड़ी या हाथ से मारते हुए उस पर काबू पाना चाहिए और यह कहना चाहिए: "ताकत और प्रताप के बल पर मैं तुम्हारा यश लूट रहा हूँ!" इस तरह वह लज्जास्पद हो जाती है। (बृहदराण्यक उपनिषद 6.4.7)

-महिलाओं का यह परम कर्तव्य है कि अपने पति की लाश के साथ खुद भी अग्नि में भस्म हो जाए। (ब्रह्म पुराण 80.75)

-अगर कोई महिला, अपने संपर्क के घमंड में (या अपनी सामर्थ्य के) अपने पति को धोखा देती है और दूसरे पुरुष के साथ संबंध बना लेती है तो राजा को सुनिश्चित करना चाहिए कि भीड़ भारी जगह पर उस महिला को भूखे कुत्ते के सामने छोड़ दिया जाए, जिससे वे उसके टुकड़े-टुकड़े कर दें। और उस दुष्ट पुरुष को गरम-लाल सलाखों वाले बिस्तर पर जलाना (दागना) चाहिए। (मनुस्मृति, XI: 131)

-किसी महिला को उपहार देना, उसके साथ छेड़छाड़ (हंसी-मज़ाक) करना, उसके आभूषणों और वस्त्रों को हाथ लगाना, उसके साथ एक ही बिस्तर पर बैठना, ये सभी काम व्यभिचार की श्रेणी में आते हैं। (मनुस्मृति, VIII: 371/372)

कल मैं मुसलमानों और कुरान के बारे में ऐसी ही एक सूची जारी करूंगा।

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