रिश्तों में आप कुछ देर ठहरकर अवकाश नहीं ले सकते! 2 जुलाई 2014

सम्बन्ध

स्वाभाविक ही, ग्रान कनारिया हम सिर्फ सैर-सपाटे के लिए और दोस्तों से मिलने ही नहीं गए थे बल्कि थोड़ा-बहुत काम करने, व्याख्यान देने, कार्यशालाएँ और व्यक्तिगत सत्रों का आयोजन करने भी गए थे। लोगों की पहचान ज़ाहिर किए बगैर मैं कुछ लोगों के साथ हुए हुए अपने अनुभव साझा करना चाहूँगा-क्योंकि मुझे लगता है कि और भी कई लोग होंगे, जो ऐसी परिस्थितियों से गुज़र रहे होंगे या इन अनुभवों को अपने लिए दिलचस्प या उपयोगी पाएंगे, जिससे ऐसी स्थिति आने पर वे उन्हें आजमा सकें। सर्वप्रथम जो वाकया मैं आज आपको बताने जा रहा हूँ वह रिश्तों के बीच आने वाली समस्याओं के बारे में है।

एक महिला मेरे पास आई और बताया कि अपने पति के साथ उसके रिश्ते में कुछ समस्याएँ पैदा हो गई हैं। उसका पति उसे प्यार करता है मगर उसके साथ निबाह करना उसके लिए मुश्किल हो गया है। इसलिए वह उसके साथ संबंध-विच्छेद के बारे में भी सोच रही है।

इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए मुझे उससे अधिक विस्तार से पूछना पड़ा और मैंने पाया कि वास्तव में उसकी असंतुष्टि का कोई विशेष कारण नहीं है। दरअसल उसके पति की आदतें कुछ अजीबोगरीब थीं जैसे, जब खास काम नहीं होता था तो वह देर तक जागता रहता था या सिगरेट पीता रहता था, बावजूद इसके कि उसे एक बार दिल का दौरा भी पड़ चुका था। वह उसके आध्यात्मिक रुझानों को भी समझ नहीं पाता था। तो वह उससे कहती थी कि वह सिगरेट पीना छोड़ दे, समय पर सोकर सबेरे जल्दी उठे और बहुत सी बातें, जिन्हें वह उसके लिए अच्छा समझती थी और चाहती थी कि वह उसकी बातें मानकर वैसा करे क्योंकि उसकी बहुत सी आदतें, उसके लिए ठीक नहीं थी।

मैंने उसे एक चुटकुला सुनाया, एक कहानी, जो मुझे मेरे एक डॉक्टर और मनश्चिकित्सक मित्र, डॉ. माइकल कोसक ने कई साल पहले सुनाई थी: एक मरीज़ उसके पास आया और कहने लगा कि अपने लिए उसे एक बहुत उपयुक्त महिला मिल गई है, जो उसके अनुसार ‘बिल्कुल मेरी माँ जैसी है और मैं उससे शादी करना चाहता हूँ!’ बीस साल बाद वही मरीज़ उसके पास आता है और कहता है ‘मैं इस महिला से तलाक़ लेना चाहता हूँ- क्योंकि वह बिल्कुल मेरी माँ के जैसी है!’

मैं जो कहना चाहता था वह उसे समझ गई। उसने महसूस किया कि वह अपने पति के साथ माँ की तरह (मातृवत) व्यवहार करती रही है- फिर कुछ मिनट इस नए दृष्टिकोण को जज़्ब करती हुई वह मौन रही। आखिर में उसने मुझसे पुनः एक बार पूछा: मैं इस व्यक्ति से प्रेम करती हूँ और वह भी मुझसे प्रेम करता है लेकिन अब मैं इस स्थिति से किस तरह निपटूँ?

मैंने उससे कहा कि उसकी माँ बनने से कोई लाभ नहीं होगा और न ही कुछ समय के लिए अवकाश लेने से। दरअसल ऐसा करना अवकाश लेना नहीं बल्कि सम्बन्ध तोड़ लेना होगा!

आप जानती हैं कि वह आपका ख्याल रखता है, आप उससे प्रेम करती हैं और वह भी आपसे प्रेम करता है। तो इन परेशानियों का सामना प्रेम से करो! जिस अवकाश की बात आप कर रही हैं, वह आपके जीवन में दूसरी बहुत सी परेशानियाँ पैदा करेगा और ये मामले इस तरह हल नहीं होते! यह आपके काम (नौकरी या रोज़गार) की तरह नहीं है जहाँ आप कुछ समय का अवकाश ले सकते हैं, सोच-विचार करने के लिए तीन माह से लेकर साल भर तक का अवकाश। यह कोई रिकॉर्ड की हुई फिल्म नहीं है कि आप उसे जब चाहें पॉज कर दें और जब चाहें पुनः चालू कर दें! आपसी सम्बन्ध इस तरह नहीं चलते!

समस्याओं को प्रेम के साथ हल करो, एक जीवन-साथी के प्रेम की तरह न कि उसके अभिभावक के प्रेम की तरह!

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