आखिर क्यों ‘अकेलों’ के लिए इश्क की सलाहें काम नहीं करतीं? – 3 जनवरी 10

मैंने पहले भी कहा है कि दुनिया में ऐसे बहुत लोग हैं जो प्रेमसंबध बनाने के इच्छुकों को सलाह देने को बेताब रहते हैं। इस बारे में सलाह देने वाली पुस्तकें और पत्रिकाएं उपलब्ध हैं और इंटरनेट पर ऐसी जानकारी की भरमार है। टीवी पर भी ऐसे प्रोग्राम दिखाए जाते हैं जिनमें एक स्त्री बहुत सारे पुरुषों में से किसी एक चुनाव करती है या फिर मनोवैज्ञानिकों को ‘इश्कबाजी’ की सलाह देते हुए दिखाया जाता है जिसे ‘अकेले’ व्यक्ति तुरंत आजमाने के लिए निकल पड़ते हैं।

इस प्रकार की सलाह के बारे में एक मुख्य बात यह है कि यह एक सामान्य सलाह होती है। आप अलग अलग ज़िंदगी जी रहे लाखों लोगों को एक जैसी सलाह कैसे दे सकते हैं? इन सभी का अपना एक अलग चरित्र, व्यवहार और भावनाएं होती हैं। वे सभी अलग अलग तरीके से सोचते और समझते हैं।

निःसंदेह जो व्यक्ति अनेकों लोगों से मिल चुका है वह एक व्यक्ति के साथ कुछ समय बात करने के बाद और थोड़ा समय उसके साथ गुजारने के बाद उसके व्यवहार के बारे में कुछ कह सकता है। आप इस प्रकार की सलाह दे सकते हैं: यदि आप एक शर्मीले व्यक्ति से मिलते हैं तो ऐसा करें। यदि आप किसी दूसरे प्रकार के व्यक्ति से मिलते हैं तो बेहतर होगा कि आप ऐसा करें आदि आदि। जब एक बार दोनों पक्ष एक दूसरे को पसंद करने लग जाते हैं तो इस प्रकार की सलाहें किसी काम की नहीं रह जाती। तब आप एक अनोखी स्थिति में होते हैं। अनोखी इसलिए कि आप आप हैं, आपका एक अलग व्यक्तित्त्व और दिमाग है। इसी प्रकार सामने वाला भी अनोखा है। जब आप दोनों नज़दीक आते हैं तो आपकी स्थिति उस सलाह देने वाले मित्र जैसी ही होती है। याद रखिए, आपके मित्र के साथी का भी अलग व्यक्तित्व होता है।

हम सब हाथ से बनाए गए चित्रों की तरह होते हैं। हर एक चित्र दूसरे से भिन्न होता है और चित्रकार की कला की बारीकियां काफी देर में समझ में आती हैं। ईश्वर एक चित्रकार है जिसने हम सबको बनाया है और अब हमें एक दूसरे को समझना है।

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