जब पति-पत्नी पैसे के लिए झगड़ते हैं, क्या उनका झगड़ना उनके प्रेम के आड़े नहीं आ रहा है? 20 अगस्त 2014

कल मैंने बताया था कि सालों एक साथ रहने के बाद भी कुछ दम्पति आपस में प्रेम का अनुभव नहीं करते। इसके विपरीत वे हर वक़्त आपस में लड़ते-झगड़ते रहते हैं। लेकिन उन दम्पतियों के बीच भी समस्याएँ होती हैं जो एक-दूसरे से प्रेम करते हैं और दुर्भाग्य से मैंने देखा है कि वे बातें ऐसी होती हैं, जिन्हें उनके बीच विवाद का कारण नहीं बनना चाहिए: अर्थात, पैसा!

भारत में महिलाएँ असुरक्षा के चलते विवाह करती हैं। वैसे, यह बात बड़े शहरों में रहने वाली आजकल की आधुनिक, युवा महिलाओं के बारे में सच नहीं है, जो पढ़ी-लिखी और रोज़गारयाफ्ता हैं और खुद पैसा कमाती हैं। लेकिन शहर में रहने वालों की संख्या काफी कम है और बहुसंख्या उन लोगों की है, जो गावों और कस्बों में रहते हैं। परम्परा से ही लड़कियों को घरेलू कामकाज करने, घर की और पति और बच्चों की देखभाल करने की शिक्षा ही दी जाती है। वे पैसे नहीं कमातीं, उनसे इसकी अपेक्षा भी नहीं की जाती और इस तरह वे विवाह इसलिए करती हैं कि कोई उनके खर्चों की पूर्ति करने वाला भी हो।

पश्चिम में अधिकांश महिलाओं के मामले में बिलकुल दूसरी बात होती है। अकसर महिलाएँ और पुरुष एक जैसे काम करते हैं। दोनों ही पैसे कमाते हैं और अगर वे विवाह करने का निश्चय कर लें तो ऐसा वे आपसी प्यार के चलते करते हैं- या किसी और कारण से, लेकिन अकसर महिलाएँ इतना तो कमाती ही हैं कि अपना खर्च अच्छी तरह उठा सकें। वहाँ धनी लोग शादी से पहले इकरारनामा लिखवाते हैं, जिससे हर बात शुरू से स्पष्ट रहे।

आपको लग सकता है कि मैं पूरी तरह एकतरफा बात कर रहा हूँ लेकिन अगर आप गौर करें कि हर बार मैंने ‘अधिकतर’ महिलाएँ या पुरुष कहा है तो आपको मेरी बात गलत नहीं लगेगी!

समस्या यह है कि दोनों संस्कृतियों में पति-पत्नियों के बीच पैसे को लेकर लड़ाइयाँ होती हैं! अगर पत्नी घर में रहती है और उसे एक निश्चित रकम घर खर्च के लिए मिलती है तो भी वे लड़ते हैं। अगर पत्नी या पति अपने साथी से काफी अधिक पैसे कमाकर लाते हैं तो भी उनके बीच लड़ाई-झगड़े होते हैं। अगर वे दोनों बराबर पैसे कमाते हैं मगर कोई एक दूसरे से अधिक खर्च करता है तब भी लड़ाई होती है।

अर्थात, इसका महत्व नहीं है कि किस विचार को आप पसंद करते हैं लेकिन अपने संबंधों में आपको चाहिए कि आप पैसे को अपने प्रेम से अधिक महत्व न दें। आपके बीच पैसे से अधिक जीवन की दूसरी सब बातों से संबन्धित सवाल होने चाहिए!

मेरे विचार में सबसे अच्छा तरीका यह होगा कि आप अपने संबंधों में किसी भी बात को 'मेरे' और 'तुम्हारे' के नज़रिए से न देखें। हर चीज़, हर सुख, हर दुःख, हर समस्या या ख़ुशी आप दोनों की है क्योंकि आप दम्पति हैं, एक-दूसरे से प्रेम करने वाले पारिवारिक सदस्य हैं। सब कुछ आप दोनों की मिल्कियत है और आप अपने साथी को खुश देखना चाहते हैं। एक-दूसरे की ख़ुशी का खयाल रखें!

आप एक-दूसरे के साथ रहना चाहते थे, अपने प्रेम का आनंद उठाना चाहते थे, उसे और फलता-फूलता देखना चाहते थे इसलिए आपने आपस में विवाह किया है। पैसे का भी महत्व है लेकिन उसे इतना अधिक महत्वपूर्ण नहीं हो जाना चाहिए कि वह आपके बीच लड़ाई का कारण बन जाए! असुरक्षा को अपने ऊपर हावी न होने दें-मामला पैसे का हो या प्रेम का!

Related posts

उन्मुक्त सेक्स संबंध बनाना गलत नहीं है परन्तु मुझे लगता है, वे सफल नहीं हो पाते - 3 दिसंबर 2015

उन्मुक्त सेक्स संबंध बनाना गलत नहीं है परन्तु मुझे लगता है, वे सफल नहीं हो पाते – 3 दिसंबर 2015

स्वामी बालेंदु स्पष्ट कर रहे हैं कि वे यह नहीं समझते कि खुले, स्वच्छंद संबंधों में नैतिक या सामाजिक रूप ...
एक से अधिक सेक्स पार्टनर के साथ आपसी संबंधों में रोमांच, थ्रिल, उत्तेजना और असफलता - 1 दिसंबर 2015

एक से अधिक सेक्स पार्टनर के साथ आपसी संबंधों में रोमांच, थ्रिल, उत्तेजना और असफलता – 1 दिसंबर 2015

स्वामी बालेंदु खुले संबंधों में आने वाली एक और समस्या के बारे में लिख रहे हैं: जब लोग अपने मुख्य ...
क्या आप भी अपने आपको सेक्स का सबसे बड़ा खिलाड़ी समझते हैं - 30 नवंबर 2015

क्या आप भी अपने आपको सेक्स का सबसे बड़ा खिलाड़ी समझते हैं – 30 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु स्वच्छंद जीवन शैली और खुले सेक्स संबंधों के बारे में लिखते हुए बता रहे हैं कि क्यों यह ...
अहं के चलते आपसी संबंधों में आने वाली समस्याओं से कैसे निपटें - 29 अक्टूबर 2015

अहं के चलते आपसी संबंधों में आने वाली समस्याओं से कैसे निपटें – 29 अक्टूबर 2015

स्वामी बालेंदु संबंधों में अहं की नकारात्मक भूमिका के विषय में लिखते हुए बता रहे हैं कि कैसे वह अक्सर ...
क्या आध्यात्मिकता (धार्मिकता) का अर्थ यह है कि आप दगाबाजी करें फिर अपने आप को माफ़ भी कर दें? 15 जुलाई 2015

क्या आध्यात्मिकता (धार्मिकता) का अर्थ यह है कि आप दगाबाजी करें फिर अपने आप को माफ़ भी कर दें? 15 जुलाई 2015

स्वामी बालेन्दु अपने एक सलाह सत्र का ज़िक्र कर रहे हैं, जिसमें एक पुरुष ने स्वीकार किया कि वह अपनी ...
पश्चिम में बसना - मतलब वास्तविक रूप से स्वतंत्र होना - 7 जुलाई 2015

पश्चिम में बसना – मतलब वास्तविक रूप से स्वतंत्र होना – 7 जुलाई 2015

स्वामी बालेंदु पश्चिम में बसने जा रहे भारतीयों को बता रहे हैं कि अगर वे वास्तव में वहाँ ठीक तरह ...
भारतीय पुरुषों, अगर आप अपनी पश्चिमी साथी के साथ विदेश में बसने का मन बना रहे हैं तो कृपया इसे अवश्य पढ़ें - 6 जुलाई 2015

भारतीय पुरुषों, अगर आप अपनी पश्चिमी साथी के साथ विदेश में बसने का मन बना रहे हैं तो कृपया इसे अवश्य पढ़ें – 6 जुलाई 2015

स्वामी बालेंदु उन भारतीय पुरुषों से मुखातिब हैं, जिनकी साथी पश्चिमी महिलाएँ हैं और जो उनके साथ किसी पश्चिमी देश ...
पश्चिमी महिला के लिए क्यों भारत में सामाजिक जीवन बनाने में दिक्कतें पेश आ सकती हैं - 2 जुलाई 2015

पश्चिमी महिला के लिए क्यों भारत में सामाजिक जीवन बनाने में दिक्कतें पेश आ सकती हैं – 2 जुलाई 2015

स्वामी बालेंदु उन दिक्कतों के बारे में लिख रहे हैं, जो एक पश्चिमी महिला के सामने आ सकती हैं, जो ...
पश्चिमी महिलाओं: अपने भारतीय परिवार वालों को अपने बच्चे की पिटाई की इजाज़त न दें! 1 जुलाई 2015

पश्चिमी महिलाओं: अपने भारतीय परिवार वालों को अपने बच्चे की पिटाई की इजाज़त न दें! 1 जुलाई 2015

स्वामी बालेन्दु भारतीय पुरुषों से विवाह करके भारत में बसी पश्चिमी महिलाओं के सामने आने वाली एक और चुनौती की ...
भारत में विवाहित पश्चिमी महिलाओं: क्या आप 'रजोधर्म के भारतीय नियमों' का पालन करती हैं? 30 जून 2015

भारत में विवाहित पश्चिमी महिलाओं: क्या आप ‘रजोधर्म के भारतीय नियमों’ का पालन करती हैं? 30 जून 2015

स्वामी बालेंदु भारतीय संयुक्त परिवार में व्याप्त धार्मिक और अंधविश्वास से पूर्ण रीति-रिवाजों के बारे में लिख रहे हैं, जो ...

Leave a Reply