धोखेबाज़ी का नियम: आप दूसरों को धोखा दे सकते हैं, दूसरे आपको नहीं! 07 जुलाई 2014

हाल ही में आयोजित अपने व्यक्तिगत-सलाह-सत्रों के बारे में मैं आपको बताता रहा हूँ क्योंकि मेरे खयाल से उनमें आपकी भी दिलचस्पी हो सकती है कि खुदा न खास्ता आप भी वैसी ही किसी उलझन में पड़ जाएँ और तब ये कहानियाँ आपके किसी काम आ सकें। आशा करता हूँ कि आज मैं जिस समस्या का ज़िक्र कर रहा हूँ उसमें आप नहीं फँसेंगे और अगर फँस भी गए तो उस महिला की तरह परेशान नहीं होंगे जो मेरे एक ऐसे ही सत्र में आई थी। विशेष रूप से इसलिए कि मैं आपको सलाह दुँगा कि अपने साथी से धोखेबाज़ी कभी न करें! लेकिन मैं शुरुआत से बताता हूँ कि क्या हुआ।

अपने रिश्ते में आई खटास की समस्या लेकर एक महिला मेरे पास आई। आते ही सबसे पहले उसने मुझे आगाह किया कि उसकी समस्या कुछ जटिल है और पूरी बात समझाने में कुछ वक़्त लगेगा। अतीत में उसके बहुत से पुरुषों के साथ सम्बन्ध रहे हैं और ऐसे एक लम्बे चले रिश्ते से उसका बच्चा भी है। गनीमत यह कि वर्तमान साथी के साथ पिछले चार साल से उसके सम्बन्ध स्थिर और पर्याप्त कामयाब हैं-लेकिन समस्या यह है कि वह शादीशुदा है! अर्थात यह भी उसका कोई स्थाई सम्बन्ध नहीं है-सिर्फ कामचलाऊ सम्बन्ध ही है।

उसके प्रेमी ने-क्योंकि आप उसे ‘साथी’ तो कह नहीं सकते- उससे शुरू में ही कह दिया था कि वह अपनी पत्नी को किसी भी सूरत में नहीं छोड़ेगा। उसकी तरफ से यह स्पष्ट सन्देश था कि: हम हमबिस्तर होकर मज़े तो लूटेंगे, मैं अपनी पत्नी के साथ धोखा करते हुए तुम्हारे साथ अलग से भी सम्बन्ध रखता रहूँगा लेकिन तुम मुझसे यह अपेक्षा मत करना कि अपनी पत्नी को छोड़कर और दूसरी चीज़ें छोड़कर मैं तुम्हारे साथ रहने चला आऊँगा! यह मैं नहीं चाहता और न ही ऐसा करूँगा! और वह इस बात पर सहमत भी हो गई थी।

मैंने अपने ब्लॉगों में कई बार कहा है कि आप बहुत समय तक किसी के बहुत करीब रहें, उसके साथ कई बार हमबिस्तर हों, प्यार करें (‘मेक लव’, जैसा कि अंग्रेजी में सुन्दर शब्दों में कहा जाता है) और उसके बाद कहें कि अपने प्रेमी के साथ आपका कोई लगाव नहीं है तो यह संभव ही नहीं है। तो उस महिला ने कहा कि उसके अन्दर प्रेम जैसा कुछ पैदा हो गया था और जिस तरह समय गुज़र रहा था, उससे वह खुश भी थी। मगर फिर जो उसे पता चला उसने सब कुछ तहस-नहस कर दिया: उसके प्रेमी ने किसी दूसरी औरत से सम्बन्ध स्थापित कर लिए!

यह अजीबोगरीब लगता है मगर स्पष्ट ही अब उसके मन में यह भावना घर कर गई है कि उसके साथ धोखा हुआ है! जी हाँ! यह आदमी उसके साथ सम्बन्ध रखकर अपनी पत्नी के साथ धोखा कर रहा था, वह खुद उसके साथ मिलकर उसकी पत्नी के साथ धोखा कर रही थी लेकिन वह नहीं चाहती कि किसी दूसरी महिला के साथ मिलकर वह अपनी पत्नी और उसके साथ धोखा करे! उसे ईर्ष्या हो रही थी, वह उस दूसरी महिला से नाराज़ थी, जल-भुन रही थी और सबसे बड़ी बात, दुखी थी, जैसे अब उसका यह सम्बन्ध टूट चुका हो। वास्तव में था भी ऐसा ही, हालाँकि इस सम्बन्ध का, वैसे भी कोई भविष्य नही था।

यह किसी फिल्म की कहानी लगती है लेकिन इस फिल्म में जो सबसे अधिक लाभान्वित हुआ वह था वह आदमी जिसने अपनी प्रेमिकाओं को शुरू में ही स्पष्ट कर दिया था कि वह उनसे ज़िन्दगी भर के लिए जुड़े रहने का वादा नहीं कर सकता! इस तरह वह मज़े में उन तीन महिलाओं से सेक्स सम्बन्ध रखे हुए था और इसमें आज तक कोई समस्या भी पेश नहीं आई थी।

मैंने उससे कहा कि उसके लिए उस आदमी के प्रति, जिसके साथ उसने जीवन के चार कीमती साल बर्बाद किए, अपने क्रोध को निकालना बहुत आवश्यक है। यह स्पष्ट था कि वह उससे प्रेम नहीं करता था और वह भी शुरू से यह जानती थी कि इस सम्बन्ध से उसे कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है। मैंने उससे साफ शब्दों में कहा: अब तुम्हें इस क्रोध के साथ कुछ समय गुज़ारना ही होगा और उसके बाद तुम इस व्यक्ति को अपने जीवन से निकाल बाहर करो और कोई ऐसा व्यक्ति ढूँढ़ो जो तुमसे प्यार करता हो!

दूसरे नजरिए से देखा जाए तो समझ में आता है कि मनुष्य अनजाने में अपने दिमाग का उपयोग किस तरह खुद अपने आप को ठगने में करता है! आप यह कैसे मान सकते हैं कि जब आप दूसरों के साथ धोखा करते हैं तो वह ठीक होता है जबकि कोई दूसरा आपके साथ यही करे तो आपको तकलीफ होती है?

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