अजीब बात है, अलग-अलग संस्कृतियों और भाषाओं के बीच सम्प्रेषण अधिक स्पष्ट और आसान है- 21 अक्तूबर 2013

सम्बन्ध

एक बार जब हमारी मित्र सिल्विया हमारे आश्रम आई थी तब रमोना के साथ उसकी कुछ बातचीत हुई थी। रमोना ने जब उसके बारे में मुझे बताया तो मुझे वह बड़ा दिलचस्प लगा। बात उन दम्पतियों के विषय में थी जो अलग-अलग देशों और संस्कृतियों से आते हैं, विशेषकर जो अलग-अलग भाषाएँ बोलते हैं। सिल्विया ने एक अध्ययन की रिपोर्ट पढ़ने के बाद पाया कि ऐसे दंपतियों का वैवाहिक जीवन ज़्यादा स्थायी होता है।

ऐसे दम्पति का एक हिस्सा होने के नाते यह मेरे लिए विशेष दिलचस्प था और हम इस विषय पर आगे भी बातें करते रहे कि क्या वाकई ऐसा है, क्या इसमें कोई तथ्य हो सकता है!

इसके पक्ष में सबसे पहला तर्क यही हो सकता है कि जब कोई व्यक्ति उसके सामान्य परिवेश के लिए अजनबी व्यक्ति के साथ संबंध रखना चाहता है तो वह स्वाभाविक ही ‘असामान्य’ लोगों, चीजों और विचारों के प्रति खुला रवैया रखने वाला होता है। ऐसे लोग जोखिम उठाने वाले होते हैं, नई बातें उन्हें आकर्षित करती हैं और वे भिन्न दिखाई देने वाली चीजों को बिना उन पर सोच-विचार किए अस्वीकार नहीं करते। संबंध स्थापित करने के मामले में यह बात महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि जैसे-जैसे समय बीतेगा, दोनों को ही कुछ न कुछ बदलना होगा। स्वाभाविक ही दोनों के ही व्यक्तित्व में नई-नई बातें उजागर होंगी और संबंध टिकाऊ हों इसका प्रयास दोनों को ही करना होगा और इसके लिए दोनों को ही अपने विचारों और व्यवहार में लचीलापन लाने की आवश्यकता होगी!

दो संस्कृतियों के व्यक्तियों के बीच सम्बन्ध स्थापित होने पर दोनों पार्टनर्स (साथी) इस बात को भली प्रकार से जानते होते हैं कि दूसरे को बचपन में उससे बिलकुल भिन्न प्रकार के अनुभव हुए हैं और वह ऐसे लोगों के साथ रहा है जो बिलकुल अलग तरह से सोचते होंगे और शायद उसे भी काफी हद तक अलग नज़रिये से ही देखते होंगे। ऐसा एक ही देश में और एक ही संस्कृति में भी होता है क्योंकि बिलकुल पड़ोस के दो घरों का रहन-सहन और संस्कृति भी बहुत भिन्न हो सकते हैं! अंतराष्ट्रीय दम्पतियों में सुविधा यह होती है कि वे इस तथ्य को अच्छी तरह से समझते हैं और स्वीकार करते हैं! उन्हें यह गलतफहमी नहीं होती कि दूसरा क्या कह रहा है, वे जान गए हैं! वे यह सोचकर कि उनका साथी उसके जैसा ही महसूस करेगा या सोचेगा, इस विषय में कोई निश्चित धारणा नहीं बना लेते। वे सावधानी के साथ बार-बार अपनी धारणा को पुष्ट करने की कोशिश करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर अपनी बात को स्पष्ट करने की कोशिश करते हैं और दूसरे से भी पूछते रहते हैं।

इसके बाद ही दूसरा पहलू सामने आता है: भाषा का। भिन्न संस्कृतियों से आए दंपति अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए साफ-साफ शब्दों में अपनी बात रखने के लिए प्रवृत्त होते हैं। अगर वे एक दूसरे की भाषा नहीं जानते तो और भी ज़्यादा सतर्क रहते हैं और काफी विस्तार से अपनी बात रखने की कोशिश करते हैं, जिससे किसी प्रकार की गलतफहमी न रहे, क्योंकि वे जानते हैं कि या तो वह भाषा उसके पार्टनर की भाषा नहीं है या खुद उसकी भाषा नहीं है या दोनों की ही नहीं है! एक शब्द का हेरफेर भी बड़ा भ्रामक (बड़ी गलतफहमी का कारण) हो सकता है अगर उसे किसी दूसरे अर्थ में समझ लिया जाए। इसलिए ऐसे दम्पतियों को अक्सर बात के असली मतलब का अनुमान अपने पार्टनर की आँखों में झाँककर लगाना पड़ता है, एक दूसरे की भावनाओं को समझते हुए उस शब्द को समझना पड़ता है, बल्कि कई बार उसके शाब्दिक अर्थ से बिलकुल विपरीत अर्थ को भी।

किसी दूसरे देश या दूसरी संस्कृति और दूसरी भाषा बोलने वाले से संबंध बनाने पर इच्छित परिणाम प्राप्त करने के लिए कई लोग ध्यान या दूसरे किसी बौद्धिक या आध्यात्मिक अभ्यास का सहारा लेते हैं: इस बात को समझने के लिए कि वे दरअसल क्या चाहते हैं, सोचते हैं और अनुभव करते हैं और फिर उसके अनुसार व्यवहार करते हैं और या ठीक उसी के अनुसार अपनी भावनाओं का इज़हार करते हैं। इस तरह आप ज़्यादा चैतन्य और सावधान होते हैं कि जो आप कर रहे हैं या कह रहे हैं वह आपके आसपास के लोगों पर क्या असर डाल रहा है।

जबकि दूसरे देश के किसी पुरुष या महिला के प्रति आपका प्रेम आपको यह सब करने के लिए मजबूर करता है, मैं यह समझता हूँ कि अपने देश के व्यक्ति के साथ संबंध होने पर भी आपको यही करना चाहिए। बल्कि, मैं तो यह कहूँगा कि जीवन के हर क्षेत्र में, अपने हर तरह के सम्बन्धों पर इसे लागू किया जाना आपके लिए अच्छा ही होगा। हमेशा बहुत सोच-समझकर व्यवहार कीजिए, कोई बात कहिए, और आपके अंतरंग संबंध, बल्कि आपकी मित्रताएँ भी दीर्घजीवी हो जाएंगी!

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