प्रेमसंबंध और ‘अकेलों’ के लिए सलाह – 2 जनवरी 10

मैं कई बार प्रेमसंबंधों पर चर्चा कर चुका हूं फिर भी यह विषय कभी नीरस नहीं होता क्योंकि यह चर्चा उस प्रेम के बारे में है जिसकी जरूरत हर किसी को है, हर कोई प्रेम करना चाहता है और सभी इसकी तरफ आकृष्ट रहते हैं। लेकिन ऐसा क्यों होता है कि कुछ लोग इसमें कामयाब हो जाते हैं और कुछ नहीं?

इस विषय में हर किसी का अपना एक अलग नज़रिया है। लोग इस बारे में अलग अलग तरह के विचार रखते हैं कि क्या सही है और क्या ग़लत, प्रेमसंबंध कैसा होना चाहिए और आप किस प्रकार प्रेमसंबंध बना सकते है। खासकर वे लोग जो किसी के प्रेम में पड़े हुए हैं उन्हें अपने ‘अकेले’ मित्रों को इस बारे में सलाह देने में बड़ा रस आता है। ज़ाहिर है कि वे अपने प्रेमसंबंध को बहुत कामयाब मानते हैं और उसी तर्ज़ पर दूसरे को आगे बढ़ने की सलाह देते हैं। फिर वे अपने दोस्तों को कोशिश करते हुए देखते हैं लेकिन इतनी कारगर सलाह के बावज़ूद नतीजा शून्य निकलता है।

मैं आपको बताता हूं कि आखिर ऐसा क्यों होता हैः जिस स्थिति और स्थान पर आपको कुछ कहना है, महसूस करना है वहां आपका मौजूद होना ज़रूरी है। हर व्यक्ति का अपना एक अलग व्यक्तित्व होता है और सबसे पहले आवश्यक होता है सामने वाले को अच्छी तरह से समझना। महज़ हल्की फुल्की बातचीत के ज़रिए आप दूसरे को जान नहीं सकते। वहां आपकी मौजूदगी बहुत ज़रूरी होती है । एक दूसरे को जानने की कोशिश करें। ऐसा भी नहीं है मात्र एक या दो घंटे में आप यह काम कर लेंगें । इस काम में समय लगता है। ध्यान रहे कि सामने वाले ने भी मात्र दो घंटे आपके साथ बिताए हैं और उन दो घंटों में जो जांचा परखा है उसके अतिरिक्त और भी आयाम है आपके व्यक्तित्व के जो उसकी नज़र में नहीं आ पाए होंगें । थोड़ा समय लगाएं और दिलोजान से लगे रहें।

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