परसों मैंने बताया था कि यह संभव है कि आपके दोस्तों और परिवार वालों के विचार आपसे बिल्कुल विपरीत हों। कल मैंने लिखा था कि आपको इस तथ्य को हर हाल में स्वीकार करना ही पड़ता है भले ही इस कारण आपकी मित्रता उतनी अंतरंग न हो सके जितनी कि आप चाहते हैं। जब आप बदलते हैं तो आवश्यक नहीं कि आपके आसपास के लोग भी बदल ही जाएँ या बदलें तो किसी और ही रूप में बदलें। सबसे बुरा यह होता है कि आपका जीवन-संगी या आपकी जीवन-संगिनी ऐसे हों। तब क्या हो, जब वह व्यक्ति आपके अनुसार न बदल पाए, जिसके साथ आपको सारा जीवन बिताना है?
दुर्भाग्य से मैं बहुत से ऐसे लोगों को जानता हूँ जो इस परिस्थिति का सामना कर रहे हैं। उनके विचार समय बीतने के साथ बदलते गए हैं लेकिन उनके जीवन साथी उस दिशा में उतना विकास नहीं कर सके। अब आपके साथ एक ऐसा व्यक्ति रह रहा है, जिसके साथ जीवन भर साथ रहने की आपने कसमें खाई हैं, जिसे आप दुनिया में सबसे ज़्यादा प्यार करना चाहते हैं, जिसके लिए आप सब कुछ छोड़ सकते हैं-लेकिन आप दोनों के विचार आपस में नहीं मिलते!
आप दोनों एक दूसरे से प्रेम करने का इरादा रखते हैं लेकिन इतने सारे विषय हैं, जिन पर आप बात ही नहीं कर सकते क्योंकि आप जानते हैं कि आपका साथी आपकी बात पसंद नहीं करेगा, आपके विचारों और आपके निर्णयों का प्रतिवाद करेगा और आपकी भावनाओं का समर्थन नहीं करेगा। आप उसके साथ बहुत सी बातों को साझा करने में हिचकते हैं और चिंतित होते हैं कि कैसे आप दिन-ब-दिन उससे दूर होते जा रहे हैं।
स्वाभाविक ही, इस मामले में आपका वह रवैया नहीं हो सकता जैसा एक मित्र के साथ संभव हो सकता है कि सप्ताह में एक बार फोन कर लिया या माह में एकाध बार मिल लिए। आपका 24 घंटे का साथ है और आप रहना भी चाहते हैं लेकिन फिर सवाल खड़ा हो जाता है कि अब, इसके बाद एक-दूसरे का क्या करें! आपके दिलों के बीच दूरी पैदा होने लगती है, आप लंबी और आत्मीय बातचीत नहीं कर सकते और सिर्फ मौसम और राजनीति पर बात करते हुए संबंध सामान्य नहीं बने रह सकते! उसके लिए कुछ अंतरंग वार्तालाप की ज़रूरत पड़ती है और जो नदारद है!
आप आने वाली समस्याओं की कल्पना कर सकते हैं। असहमतियाँ, झगड़े, निःशब्दता, मौन, यौनेच्छा की कमी या शायद कुछ समय बाद किसी दूसरे के साथ सेक्स संबंध की इच्छा, क्रोध, कुंठा और निराशा और उन लोगों के संदर्भ में, जो आपसी निकटता हासिल करने में असमर्थ होते हैं, दुर्भाग्यपूर्ण अलगाव।
अगर आप इस अवस्था में है तो मैं आपसे इतनी ही गुजारिश करूंगा कि अपने साथी से बात करें, चर्चा करें। लगातार चर्चा करते रहें। अपना दिल खोलकर रख दें कि आप क्या महसूस कर रहे हैं और क्यों वैसा महसूस कर रहे हैं। मैं आशा करता हूँ कि वह, जिसे आप प्यार करते हैं और जो आपसे प्यार करता है, दोनों एक-दूसरे को समझ सकेंगे। भले ही वह आपके जैसा ही महसूस न कर सके मगर इतना ही काफी होगा अगर वह आपके विचारों को स्वीकार कर ले और उन संवेदनाओं और प्रेरणाओं को जान ले, जिन पर आपके निर्णय आधारित होते हैं। दिल को सदा खुला रखें और कुछ भी छिपाएँ नहीं।
आपको भी यह समझने की कोशिश करनी होगी कि क्यों आपका साथी आपकी बात समझने में असमर्थ हो रहा है या क्यों वह उसे समझने का इच्छुक ही नहीं है। आपको भी दूसरे के विचारों का आदर करना होगा और अपने साथी की मदद करनी होगी भले ही इसका नतीजा कहीं बीच में किया गया समझौता ही क्यों न हो। कोई ऐसी बात खोजिये, जिसकी आप दोनों को चिंता है, जिसकी आप परवाह करते हैं और सम्बन्धों के उन आयामों को महत्व दीजिये, जिन पर आप दोनों एकमत हैं, एक जैसे विचार रखते हैं। परस्पर संबंध में आवेग पैदा कीजिए और आप पाएंगे कि आप पुनः एक-दूसरे के साथ वैसा ही उत्कट प्रेम महसूस कर रहे हैं।
हम सब भिन्न मिट्टी के बने हुए हैं और जब हम किसी से दिल की गहराइयों से प्रेम करते हैं तो हमें थोड़ी सी परस्पर समानता की आवश्यकता होती है और यह समानता सिर्फ इतनी-सी भी हो सकती है कि हम सब मनुष्य हैं!
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