एक चिंगारी, दूसरी चिंगारी. . . प्रेम कहां है? – 17 मई 09

कल मैंने अपनी एक मित्र का ज़िक किया था। वह सदमे में थी क्योंकि उसका बॉयफ्रेंड उसे छोड़कर चला गया था। मैंने फोन पर उससे पूछा था कि उनके रिश्ते में गरमी खत्म क्यों हो गई थी। मैंने उसे यह भी कहा था कि इसके पीछे जरूर कोई कारण होगा। हो सकता है कि उसे कोई और स्त्री मिल गई हो जिसमें वो ‘चिंगारी’ हो जिसकी उसे तलाश थी। हो सकता है कि इसी कारण वह यह कह रहा हो कि उनके रिश्ते में अब ‘वो बात‘ नहीं रही। उसने उत्तर में कहा था कि उसे इस बारे में जानकारी नहीं है कि उसकी ज़िंदगी में अब कोई और आ गया है या नहीं। परंतु आज उसने मुझे लिखा,”हां, स्वामी जी, आप ठीक कह रहे थे|”

उसे नई ‘चिंगारी’ के बारे में पता चल गया था। लेकिन मैं सोच में पड़ गया था कि एक नई चिंगारी को देखकर पुरानी की गरमी कैसे खत्म हो सकती है? और ये नई चिंगारी कितने दिन टिकेगी? इस बात की क्या गारंटी है कि अब कोई और नई चिंगारी नहीं आएगी उसकी ज़िंदगी में? और क्या तमाम ज़िंदगी एक के बाद एक नई चिंगारियों के पीछे भागते रहेंगें? अगर ऐसे ही चिंगारियों की तलाश करते रहेंगें तो सच्चे प्रेम का आनंद कैसे उठा पाएंगे? मेरे लिए प्रेम मात्र एक चिंगारी नहीं है, यह तो वह प्रकाश है जो आपका मार्गदर्शन करता है। चिंगारी तो मात्र एक क्षण के लिए भड़कती है और उसके बुझने के बाद फिर वही अंधेरा हो जाता है। प्रेम एक रोशनी है।

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