मैंने कल ज़िक्र किया था कि अकसर लोग अपने जीवनसाथी की छोटी – छोटी आदतों से नाराज़ रहते हैं। कई बार तो बात इतनी छोटी सी होती है कि पति चाय या कॉफी को सुड़ककर पीते हैं और आपको लगता है कि यह काम बिना आवाज़ किए भी किया जा सकता है। ऐसा भी होता है कि आपकी पत्नी अपने बालों को संवारने के बाद हेयरब्रश जिस जगह पर रखकर चली जाती है, वह आपको कतई पसंद नहीं है। आप गुस्से में भर जाती हैं जब पतिदेव उपन्यास को पढ़ते वक़्त उसके पन्नों के कानों को उमेठ देते हैं, यह आपको बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होता। पत्नी दांतों को ब्रश करते समय नल खुला रखती है। यह बात आपको बहुत नागवार गुजरती है।
ऐसी छोटी मोटी आदतों के कई उदाहरण आपको मिल जाएंगें। मैंने कल भी आपसे कहा था कि दूसरों में मीनमेख निकालने से पहले जरा अपने भीतर भी झांककर देखें। माना कि कई मामलों में आप सही हैं ; मसलन, बेवजह नल खुला छोड़कर पानी की बर्बादी करना या पुस्तक पढ़ते वक़्त अपने प्रिय पन्ने के कान मोड़ देना बेशक एक अच्छी आदत नहीं है। किंतु फिर भी मैं कहूंगा कि इसके अलावा साथी की अन्य आदतों को स्वीकार किया जा सकता है, बर्दाश्त किया जा सकता है।
आपके पति बड़ी भद्दी आवाज़ में हंसते हैं, कोई बात नहीं, इसे पसंद करें। आपके पति कोई ऐसा मामूली, अजीबोग़रीब या हास्यास्पद काम करते है जिसे आप करने की सोच भी नहीं सकती, तो उसे स्वीकार कीजिए और हो सके तो पसंद भी। एक बड़ी दिलचस्प बात यह है कि कई बार लोग अनजाने में ही साथी की उन नागवार सी लगने वाली आदतों को अपना लेते हैं। यही वो बिंदु होता है जहां आपके संबंधों में समरसता आने लगती है और आपको इस बात का अहसास भी नहीं होता। इसी को कहते हैं दिल, दिमाग और देह की नज़दीकियां !
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