प्रेम, प्रेमसंबंध, संबंधविच्छेद और शुभचिंतक – 29 दिसम्बर 09

अकसर मैं प्रेम और प्रेमसंबंधों के बारे में कई तरह की बातें सुनता रहता हूं। यह भी सुनता हूं कि कैसे किसी को प्रेमसंबंध रास आ जाता है तो किसी को बिलकुल भी रास नहीं आता। निःसंदेह किसी भी प्रेमसंबंध में उस प्रेमीयुगल अलावा उनके करीबी लोग भी जुड़े हुए होते हैं। ये उनके मित्र, अविभावक, भाई – बहन अथवा अन्य परिजन भी हो सकते हैं। और अधिकतर मामलों में न केवल इनका जुड़ाव रहता है बल्कि गाहे – बगाहे ये प्रेमीयुगल को सलाह भी देते रहते हैं।

ये आसपास के लोग सलाह क्यों देते हैं? क्योंकि वे आपकी परवाह करते हैं और आपसे स्नेह करते हैं। अकसर ये सभी आपकी भलाई को मद्देनज़र रखकर सलाह देते हैं लेकिन यह ज़रूरी नहीं है कि आप इनकी सलाह मानें ही! क्या कभी प्रेमसंबंध टूटने के बाद किसी ने आपको सलाह दी है कि उस लड़की या लड़के को भूल जाओ, उसे फोन मत करो, उसकी मेल का जवाब मत दो और अग़र कभी उससे राह में मुलाक़ात हो भी जाए तो ऐसा दिखाओ कि तुम कभी उससे मिले ही नहीं हो?

मैंने यह एक उदाहरण दिया है कि इस प्रकार की सलाह पर अमल करने से पहले अच्छी तरह सोच – विचार कर लें। इस बात का सीधा संबंध मेरी कल की बात से हैः हो सकता है कि आप इसलिए दुखी हैं कि आप अब भी सामने वाले से प्रेम करते हैं और उसे अब आपका साथ अच्छा नहीं लगता लेकिन आप हैं कि उसे भुला नहीं पा रहे हैं। आपका दिल है कि मानता नहीं। तो इस बात को लेकर खुद पर नाराज़ न हों और न ही अपने शुभचिंतकों की सलाह पर पूर्व प्रेमी / प्रेमिका से घृणा करना शुरु कर दें। अपने दिल की बात भी सुनें और उसे समझने की कोशिश करें।

निःसंदेह हर परिस्थिति अपने आप में भिन्न होती है मग़र फिर भी यदि आपका दिल प्रेम करने के लिए कहता है तो उस पर गौर फरमाएं। इसका यह मतलब कदापि नहीं है कि आप फिर से एक प्रेमीयुगल बन जाएं। लेकिन इसका यह मतलब भी नहीं है कि आप एक दूसरे से घृणा करने लगें या एक दूसरे से बचने लगें। अग़र दो इंसान एक दूसरे का आदर करते हैं तो उन दोनों के बीच यह संभावना हमेशा बनी रहती है कि उनका मैत्रीभाव बना रहे। जरूरत इस बात की है कि आप संबंधविच्छेद को स्वीकार करें और हो सकता है कि आपके मित्रों कि सलाह का वास्तविक अभिप्राय भी यही हो। ध्यान रहे कि विच्छेद के बाद भी स्वयं से और अपनी भावनाओं से प्रेम करते रहें।

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