पश्चिम में बसना – मतलब वास्तविक रूप से स्वतंत्र होना – 7 जुलाई 2015

कल मैंने अपने उन देशवासियों को, जो अपनी पश्चिमी पत्नियों या गर्लफ्रेंड के साथ पश्चिमी देशों में बसना चाहते हैं, बताया था कि पश्चिमी व्यक्तिवाद और उससे जुड़ी नीरवता का आदी होने में समय लगता है। मैंने यह भी बताया था कि वहाँ अभिभावकों का अपने बच्चों को स्वतन्त्रता का पाठ पढ़ाना सहज-स्वाभाविक बात है। यह सिर्फ एक परंपरा ही नहीं है- अगर आप पश्चिम में रहना चाहते हैं तो आपको वास्तव में स्वतंत्र होना होगा।

यदि मैं ‘स्वतंत्र’ शब्द का इस्तेमाल बिना किसी संदर्भ के करूँ और उसका तात्पर्य स्पष्ट न करूँ तो वह बड़ा भ्रामक सिद्ध होगा। दरअसल मेरा मतलब सिर्फ आर्थिक स्वतन्त्रता से नहीं है- क्योंकि आर्थिक मदद के लिए आपके पीछे कोई हो भी सकता है और नहीं भी। जी नहीं, यह वास्तव में उन सभी बातों के लिए है, जिन्हें भारत में एक संयुक्त परिवार में रहते हुए आपको करने की आवश्यकता अक्सर नहीं पड़ती क्योंकि वहाँ उन कामों को करने के लिए बहुत सी महिलाएँ उपलब्ध होती हैं।

जी हाँ, पूरी संभावना है कि पश्चिम में अपने प्रारम्भिक महीनों में ही आप बहुत सी नयी चीज़ें सीख लेंगे! क्या आपको खाना बनाना आता है? नहीं? मेरे विचार से आपकी महिला मित्र पूरे समय रसोई में रहना पसंद न करे। वह आपके साथ एक समझौता करने पर राज़ी हो सकती है-आप बर्तन माँज लें! आपने वह भी कभी नहीं किया? खाना बनाने के मुक़ाबले बरतन माँजना कहीं आसान है! क्या आप अपने कपड़े धो सकते हैं? चलिए, बहुत अच्छा! अब आप वॉशिंग मशीन का इस्तेमाल करना सीखें, शायद ड्रायर और प्रेस का इस्तेमाल भी और किस फ़ैब्रिक-सॉफ्टनर का इस्तेमाल करना है, और अपनी पसंदीदा शर्ट से जिद्दी दाग कैसे निकालने हैं, यह भी! वैक्यूम-क्लीनर का इस्तेमाल शायद आपने कभी न किया हो और शायद आप खुद टॉयलेट साफ करने के भी आदी न हों?

विशेष रूप से सबसे आखिरी कार्य बहुत से भारतीयों के लिए सबसे दुष्कर होगा- पर यह काम भी करना तो है ही! जब आप अपनी पश्चिमी पत्नी या महिला मित्र के साथ अकेले रहने लगेंगे तो संभवतः ये सभी काम वह अकेले करे, इस बात पर वह कभी सहमत नहीं होगी- विशेष रूप से तब, जब घर का खर्च आप दोनों की सम्मिलित आमदनी से चल रहा हो! इसका मतलब यह है कि घर में निकलने वाले दैनिक कार्यों को भी आप दोनों को आपस में मिल-बाँटकर निपटाना होगा!

अब यदि आप यह सोच रहे हैं, ‘कोई दिक्कत नहीं, मैं पैसे देकर किसी से ये काम करवा लूँगा!’, तो मैं यह याद दिलाना चाहता हूँ कि अब आप भारत में नहीं रहते। भारत में कई लोग मिल जाएँगे, जो थोड़े पैसों में आपका कोई भी काम कर सकते हैं– क्योंकि बेरोजगारी के चलते वहाँ श्रमिकों की संख्या बहुत अधिक है और जीवन निर्वाह का खर्च बहुत अधिक नहीं है। पश्चिम में श्रमिक आसानी से नहीं मिलते, इसलिए जो मिलते हैं, बहुत महंगे होते हैं! सफाई का काम करने वाली महिला भी यहीं, इसी महंगे देश में रहना चाहती है- और आपको अपने वेतन में से पैसे निकालकर उन पर खर्च करने पड़ेंगे, जब कि उन्हीं पैसों से आपको सब्ज़ी-भाजी, कपड़े और दूसरी बहुत सी चीज़ें खरीदनी हैं, जिन्हें आप भारतीय मूल्यों की तुलना में शायद ज़रूरत से ज़्यादा महंगा पाएँगे!

मेरा दावा है कि अगर आपके पास ज़रूरत से ज़्यादा पैसा नहीं है तो आप खुद ही खाना पकाना और सफाई करना सीख लेंगे। और निश्चिंत रहें- यह उतना कठिन नहीं है, जितना आप सोच रहे हैं! 🙂

ऐसे और भी कई विषय हैं, जो आपके लिए नए और अलग होंगे और आगामी दिनों में मैं उनके बारे में और विस्तार से लिखूँगा।

Related posts

उन्मुक्त सेक्स संबंध बनाना गलत नहीं है परन्तु मुझे लगता है, वे सफल नहीं हो पाते - 3 दिसंबर 2015

उन्मुक्त सेक्स संबंध बनाना गलत नहीं है परन्तु मुझे लगता है, वे सफल नहीं हो पाते – 3 दिसंबर 2015

स्वामी बालेंदु स्पष्ट कर रहे हैं कि वे यह नहीं समझते कि खुले, स्वच्छंद संबंधों में नैतिक या सामाजिक रूप ...
एक से अधिक सेक्स पार्टनर के साथ आपसी संबंधों में रोमांच, थ्रिल, उत्तेजना और असफलता - 1 दिसंबर 2015

एक से अधिक सेक्स पार्टनर के साथ आपसी संबंधों में रोमांच, थ्रिल, उत्तेजना और असफलता – 1 दिसंबर 2015

स्वामी बालेंदु खुले संबंधों में आने वाली एक और समस्या के बारे में लिख रहे हैं: जब लोग अपने मुख्य ...
क्या आप भी अपने आपको सेक्स का सबसे बड़ा खिलाड़ी समझते हैं - 30 नवंबर 2015

क्या आप भी अपने आपको सेक्स का सबसे बड़ा खिलाड़ी समझते हैं – 30 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु स्वच्छंद जीवन शैली और खुले सेक्स संबंधों के बारे में लिखते हुए बता रहे हैं कि क्यों यह ...
अहं के चलते आपसी संबंधों में आने वाली समस्याओं से कैसे निपटें - 29 अक्टूबर 2015

अहं के चलते आपसी संबंधों में आने वाली समस्याओं से कैसे निपटें – 29 अक्टूबर 2015

स्वामी बालेंदु संबंधों में अहं की नकारात्मक भूमिका के विषय में लिखते हुए बता रहे हैं कि कैसे वह अक्सर ...
क्या आध्यात्मिकता (धार्मिकता) का अर्थ यह है कि आप दगाबाजी करें फिर अपने आप को माफ़ भी कर दें? 15 जुलाई 2015

क्या आध्यात्मिकता (धार्मिकता) का अर्थ यह है कि आप दगाबाजी करें फिर अपने आप को माफ़ भी कर दें? 15 जुलाई 2015

स्वामी बालेन्दु अपने एक सलाह सत्र का ज़िक्र कर रहे हैं, जिसमें एक पुरुष ने स्वीकार किया कि वह अपनी ...
भारतीय पुरुषों, अगर आप अपनी पश्चिमी साथी के साथ विदेश में बसने का मन बना रहे हैं तो कृपया इसे अवश्य पढ़ें - 6 जुलाई 2015

भारतीय पुरुषों, अगर आप अपनी पश्चिमी साथी के साथ विदेश में बसने का मन बना रहे हैं तो कृपया इसे अवश्य पढ़ें – 6 जुलाई 2015

स्वामी बालेंदु उन भारतीय पुरुषों से मुखातिब हैं, जिनकी साथी पश्चिमी महिलाएँ हैं और जो उनके साथ किसी पश्चिमी देश ...
पश्चिमी महिला के लिए क्यों भारत में सामाजिक जीवन बनाने में दिक्कतें पेश आ सकती हैं - 2 जुलाई 2015

पश्चिमी महिला के लिए क्यों भारत में सामाजिक जीवन बनाने में दिक्कतें पेश आ सकती हैं – 2 जुलाई 2015

स्वामी बालेंदु उन दिक्कतों के बारे में लिख रहे हैं, जो एक पश्चिमी महिला के सामने आ सकती हैं, जो ...
पश्चिमी महिलाओं: अपने भारतीय परिवार वालों को अपने बच्चे की पिटाई की इजाज़त न दें! 1 जुलाई 2015

पश्चिमी महिलाओं: अपने भारतीय परिवार वालों को अपने बच्चे की पिटाई की इजाज़त न दें! 1 जुलाई 2015

स्वामी बालेन्दु भारतीय पुरुषों से विवाह करके भारत में बसी पश्चिमी महिलाओं के सामने आने वाली एक और चुनौती की ...
भारत में विवाहित पश्चिमी महिलाओं: क्या आप 'रजोधर्म के भारतीय नियमों' का पालन करती हैं? 30 जून 2015

भारत में विवाहित पश्चिमी महिलाओं: क्या आप ‘रजोधर्म के भारतीय नियमों’ का पालन करती हैं? 30 जून 2015

स्वामी बालेंदु भारतीय संयुक्त परिवार में व्याप्त धार्मिक और अंधविश्वास से पूर्ण रीति-रिवाजों के बारे में लिख रहे हैं, जो ...
भारतीय मर्द से शादी करना चाहती हैं? क्या संयुक्त परिवार के अनुभवों से गुज़रने के लिए भी तैयार हैं? 29 जून 2015

भारतीय मर्द से शादी करना चाहती हैं? क्या संयुक्त परिवार के अनुभवों से गुज़रने के लिए भी तैयार हैं? 29 जून 2015

स्वामी बालेंदु एक ऐसे विषय पर अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं, जो आगे चलकर कई और समस्याओं में परिणत ...

Leave a Reply