भारतीय पुरुषों: जब आपकी पश्चिमी पत्नी अपने मर्द दोस्त का आलिंगन करती है तो क्या आप विचलित हो जाते हैं? 25 जून 2015

सम्बन्ध

कल मैंने पश्चिमी महिलाओं के साथ संबंधों में मुब्तिला भारतीय पुरुषों को संबोधित करते हुए लिखा था कि पूरी संभावना है कि उनकी जीवन साथी भारतीय पत्नियों की तुलना में बहुत अधिक आज़ाद और खुदमुख्तार हो। अगर आप ऐसे संबंध में बंधे हैं तो ध्यान रखें कि आप भय के कारण अपनी पश्चिमी पत्नी पर ऐसी कोई पाबंदी न लगाएँ, या आपका परंपरागत सांस्कृतिक नज़रिया हो, जो कहता है कि 'महिलाओं को यह नहीं करना चाहिए या वह नहीं करना चाहिए'। यही बात एक और स्थिति पर भी लागू होती है, जिसके चलते दोनों के बीच अच्छा-खासा बखेड़ा खड़ा हो सकता है: पुरुषों के साथ उसकी मित्रता।

अब एक सीधा सवाल: ऐसी स्थिति में क्या आप पत्नी के मित्रों के प्रति ईर्ष्या महसूस करेंगे? अगर हाँ, तो आप इससे तुरंत मुक्त होने की कोशिश शुरू कर दीजिए!

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप उसके देश में रहते हैं या भारत में, संभवतः आपकी पत्नी के बड़ी संख्या में पुरुष मित्र होंगे और तब से होंगे जब वह आपके खयालों में भी नहीं थी। वह उनसे बात करेगी, मिलेगी-जुलेगी, उनके साथ समय बिताएगी और शायद उसकी दोस्ती उनसे इतनी नजदीकी हो कि आपको असुविधा महसूस होने लगेगी। जब वह पुरुषों से मिलेगी, विशेष रूप से विदेश में, तो उनके साथ भी वैसे ही बर्ताव करेगी जैसे कि अपनी महिला मित्रों के साथ- और मैं जानता हूँ, शुरू में आपको यह भी अजीब सा लगेगा!

यह ताज़्ज़ुब की कोई बात नहीं है! आप उस देश के रहने वाले हैं, जहाँ पुरुष और महिलाएँ आपस में हाथ तक नहीं मिलाते! ऐसी संस्कृति, जहाँ आज भी बहुत से स्कूल या तो सिर्फ लड़कियों के स्कूल हैं या सिर्फ लड़कों के! यहाँ सामान्यतया पुरुष महिलाओं से बात तक नहीं कर सकते तो महिला मित्र बनाने के बारे में वे सोच भी कैसे सकते हैं? माता-पिता अपनी लड़कियों को आगाह करते हैं कि वे अपना खाली समय भाई के सिवा किसी और लड़के के साथ न बिताएँ अन्यथा उनकी बदनामी होगी और उसके लिए उपयुक्त वर खोजने में उन्हें दिक्कत पेश आएगी क्योंकि लड़कों के माता-पिताओं को उसके कुँवारेपन पर शक होगा!

मैं जानता हूँ कि भारत में भी कॉलेज के विद्यार्थियों में चीजें तेज़ी से बदल रही हैं लेकिन उनका प्रतिशत इतने बड़े देश की इतनी बड़ी आबादी का बहुत छोटा सा हिस्सा है और ज़्यादातर लोग भारत में आज भी पुरुष और महिला के बीच मामूली स्पर्श को भी यौन हरकत की तरह देखते हैं!

और ठीक यही बात आपको अपने मस्तिष्क से निकाल बाहर करनी है: पश्चिम में आपस में मिलने पर पुरुष और महिला का गले मिलना यौन क्रिया नहीं माना जाता! वे एक-दूसरे को गालों पर चूम भी सकते हैं, तब वे महज 'हैलो' कह रहे होते हैं, इससे ज़्यादा कुछ नहीं! तो अगर आपकी पश्चिमी पत्नी का कोई पुराना मित्र भारत आता है और आपकी पत्नी उससे देर तक गले मिलकर अपनी ख़ुशी का इज़हार करती है तो उद्वेलित न हों। अगर आपकी पत्नी काम के सिलसिले में बाहर जाती है और आप जानते हैं कि वह दिन भर पुरुषों के साथ एक ही डेस्क पर बैठती है और पुरुष सहकर्मियों से युक्त टीम में, उनके साथ काम करती है, जो लगातार मिलने-जुलने के कारण अब मित्र भी बन चुके होंगे, तो उस पर अविश्वास न करें!

आपको उस पर विश्वास करना सीखना होगा। अगर आप पश्चिम में कहीं भी रहते हैं तो आपकी पत्नी बिकनी पहनकर बीच पर घूमेगी और सामान्य रूप से स्कर्ट और टॉप पहनेगी, भारत में जिसे ‘अशोभनीय’ समझा जाता है लेकिन पश्चिम में बिल्कुल साधारण। दिन में और शाम को वह अपने दोस्तों के साथ मौज मस्ती करेगी-दोस्त महिलाएँ और पुरुष दोनों हो सकते हैं- और यह देखने के लिए कि उनके बीच क्या चल रहा है, आप हर वक़्त उनके साथ नहीं रह सकते। आपको अपनी ईर्ष्या का त्याग करना होगा क्योंकि आप उसे अपने मित्रों को त्यागने के लिए नहीं कह सकते- निश्चय ही यह आपके संबंधों के अंत की शुरुआत होगी!

ऐसे कई और विषय और संभाव्य मुश्किलें सामने आ सकती हैं, जिन्हें आप निर्विघ्न पार कर सकते हैं बशर्ते उन पर पहले से गंभीर विचार-विमर्श कर लें। अगले हफ्ते मैं उन पर विस्तार से चर्चा करने का मन बना रहा हूँ!

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