एक बार एक महिला और एक पुरुष इकठ्ठे हीलिंग के लिए आए। वे दोनों साथ – साथ रह रहे थे लेकिन फिर भी मैं उन्हें युगल (कपल) नहीं कहूंगा। हालांकि शुरु में मैंने उन्हें युगल ही समझा था परंतु मैं यहां स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि उन दोनों को एक महिला और एक पुरुष ही कहना ज्यादा उचित होगा और मैं यही लिखुंगा भी। हीलिंग सत्र शुरु होने से पहले उस महिला ने मुझे बताया, “मैं पुरुषों और प्रेमसंबंधों से बहुत डरती हूं क्योंकि पूर्व में मुझे बहुत कड़ुवे अनुभव हुए हैं। अब मैं बहुत फूंक – फूंककर कदम रखती हूं क्योंकि मैं अब और ज़ख्म बर्दाश्त नहीं कर सकती। न ही मैं चाहती हूं कि कोई मेरे साथ बेवफाई करे। सच तो यह है कि मैं खुद भी नहीं जानती कि मैं चाहती क्या हूं? मेरी खोज अभी जारी है|”
मैंने अनुमान लगाया कि जिस पुरुष के साथ यह आई है उसकी गर्लफ्रेंड होगी। मैंने उससे पूछा,” क्या आप दोनों आपस में प्रेम करते हैं? “ उसने उत्तर दिया, “शायद! मैं उसे पसंद करती हूं और उसके साथ रहती हूं, घूमती – फिरती हूं और उसके साथ सोती भी हूं, परंतु यह नहीं कहा जा सकता कि हम दोनों प्रेम करते हैं, क्योंकि उसकी एक गर्लफ्रेंड है। हालांकि वे दोनों बहुत कम मिलते हैं लेकिन फिर भी उनका रिश्ता है आपस में|“
मैं सोचने लगा कि आखिर यह स्त्री कर क्या रही है! इस संबंध को क्या नाम दिया जा सकता है? इस तरह से साथ रहकर आखिर वह पाना क्या चाहती है? किस चीज़ की तलाश है उसे? मेरे दिमाग में एकसाथ कई प्रश्न कौंधने लगे। कभी कहती है कि उसकी तलाश अभी जारी है और अब और धोखे व ज़ख्म बर्दाश्त नहीं कर सकती! तो आखिर यह कर क्या रही है? क्या वह उस दूसरी स्त्री को धोखा नहीं दे रही है? क्या यह पुरुष अपनी गर्लफ्रेंड के साथ बेवफाई नहीं कर रहा है? क्या यह महिला एक धोखेबाज़ पुरुष के साथ नहीं रह रही है? और ऐसा करके क्या यह इस धोखाधड़ी में सहयोग नहीं दे रही है? क्या यह अजीब बात नहीं है कि यह खुद तो कोई चोट नहीं खाना चाहती लेकिन अपने व्यवहार से उस दूसरी महिला को चोट पहुंचा रही है? क्या वह इस बात का नाजायज़ फायदा नहीं उठा रही है कि किन्हीं परिस्थितियों के कारण इस पुरुष की गर्लफ्रेंड अपने प्रेमी से बहुत कम मिल पाती है? यह पुरुष उस स्त्री को अपनी गर्लफ्रेंड मानता है, अनुपस्थिति की वजह से उससे शारीरिक नज़दीकी उतनी नहीं है, जितनी होनी चाहिए, लेकिन फिर भी कहीं न कहीं एक भावनात्मक रिश्ता तो दोनों के बीच ज़रूर है अन्यथा वह ऐसा क्यों कहता कि उसकी एक गर्लफ्रेंड है। क्या आप किसी और से शारीरिक संबंध बनाकर एक भावनात्मक रिश्ते की बेक़द्री नहीं कर रहे हैं? हम इतने स्वार्थी क्यों हो गए हैं? मैं तो कहता हूं कि ऐसा करके आप स्वयं से धोखा कर रहे हैं, आप भावनाओं के साथ बेवफाई कर रहे हैं।
आजकल अकसर हमें ऐसी बातें अपने आसपास के समाज में कई रूपों में देखने को आती हैं। मैंने पहले भी इससे मिलते – जुलते विषय पर चर्चा की थी। मैं किसी पर कोई आरोप नहीं लगाना चाहता। मैं यह विश्लेषण करने की कोशिश कर रहा था कि हमारे आसपास क्या हो रहा है? और अंत में हमें इस सब से क्या हासिल हो रहा है? रिश्ते की गाड़ी प्रेम और और समर्पण के दो पहियों से चलती है, हेराफेरी से नहीं।
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