सम्बन्धविच्छेद के बाद! बीती ताहि बिसारि दे …….. 28 फरवरी 09

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एक बार एक महिला मेरे पास हीलिंग के लिए आई। उसने बताया कि वह बीती हुई बातों को भुला नहीं पाती है। कहने लगी, ”मैं और मेरा बॉयफ्रेंड अलग हो गए हैं। कुछ हफ्ते पहले ही मुझे पता चला अब वह किसी दूसरी स्त्री से प्रेम करने लगा है। मैं खुद को ठगा हुआ सा महसूस कर रही हूं क्योंकि हमारे बीच में यह क़रार हुआ था कि यदि हम दोनों में से कोई भी किसी और से प्रेम करने लगेगा, तो वह इसे छुपाएगा नहीं“

मुझे उसके आखिरी वाक्य का अर्थ बिल्कुल समझ नहीं आया। तो मैंने उससे पूछा, ”आम तौर पर किसी भी प्रेमप्रसंग में लोग इस तरह का कोई क़रार नहीं करते हैं। क्या यह एक खुला या अधिक अनौपचारिक रिश्ता था?“ उसने कहा नहीं, उन्होंने यह क़रार पांच महीने पहले तब किया था जब वे दोनों अलग हुए थे। “और हमने एक दूसरे से वादा किया था कि एक हमारी ज़िंदगी में कोई नया व्यक्ति आएगा तो एक दूसरे को बता देंगें। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया और मेरे साथ विश्वासघात किया“

मैंने उससे पूछा, “तुम्हारा यह प्रेमसंबंध कितने दिन चला?” उत्तर मिला साढ़े तीन साल। उसने बताया, “मैं हमेशा आशंकाओं से घिरी रहती थी। मुझे पता नहीं था कि उससे प्रेम करना मेरे लिए ठीक है या नहीं। लेकिन उसे हमारे रिश्ते पर पूरा भरोसा था। मुझे लगता है कि मैं ग़लत सोचती थी और उसे भरपूर प्यार नहीं दे पाई। यही वजह थी कि हमारा रिश्ता टूट गया। उसे किसी तरह का कोई संदेह नहीं था लेकिन मैं हर वक़्त अनिश्चय में रहती थी और शायद यही कारण है कि वह दूसरी स्त्री से प्रेम करने लगा।“

मैंने उसे बताया, “मैं तुम्हारे हालात का विश्लेषण करने की कोशिश कर रहा हूं। तुम दुखी हो और पांच महीनों के बाद भी प्रेमी से विच्छेद को बर्दाश्त नहीं कर पा रही हो। तुम ठगा हुआ सा क्यूं महसूस कर रही हो? तुम कहती हो कि बीती बातों को भुला नहीं पाती हो। यह एक समस्या है तुम्हारे साथ। वास्तव में तुम बिल्कुल सही कह रही हो। तुम कहती हो कि तुम हमेशा आशंकाओं से घिरी रही। लेकिन शायद अब तुम हालात को एक नए नज़रिए से देख पा रही होः मैं यह पहले से ही जानती थी कि इस रिश्ते का क्या हश्र होगा। अब तुम्हें खुश होना चाहिए कि अब एक नया जीवन तुम्हारे सामने है, नई शुरुआत करो। अब तुम्हें पता चला कि तुम्हारे प्रेमी ने अपना वादा नहीं निभाया। ये तो मात्र एक और कारण है इस बात को सही ठहराने का कि वह तुम्हारे लिए योग्य पुरुष नहीं था। तुम अच्छी स्त्री नहीं हो, ऐसी अपराधभावना को अपने भीतर घर मत करने दो। इससे तो एक और नई समस्या खड़ी हो जाएगी। तुम्हें अपने भीतर एक ऐसा माहौल पैदा करना होगा जो तुम्हें इस घटना को भूलने में मददग़ार साबित हो। अपने भीतर और अधिक आत्मविश्वास पैदा करो।“

मेरे साथ इस वार्तालाप के बाद उसे राहत मिली और वह बहुत प्रसन्न दिखाई दी। उसने कहा कि अब वह चीज़ों को एक नए नज़रिए से देखेगी। उसे विश्वास था कि वह अब अतीत को भुला पाएगी। एक अध्याय अब समाप्त हो चुका था अतः उसकी आहत भावनाओं पर मरहम लगाने के उद्देश्य से मैंने सुझाव दिया कि वह यह सोचे वह उसके योग्य पुरुष नहीं था। यह सच है कि यदि उसे आशंकाएं न होती तो यह रिश्ता टूटता नहीं। क्योंकि यह अब निश्चित रूप से खत्म हो चुका है तो अपराधबोध के साथ जीने से कोई फायदा नहीं है।

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