अपने संबंधों को विकसित होने का अधिकाधिक मौका दीजिए – 12 जून 2014

सम्बन्ध

कल मैंने पूछा था कि नाखुश और असंतुष्ट रहने के बावजूद लोग अपने संबंधों में क्यों बने रहते हैं। अधिकतर प्रकरणों में इसका कारण कोई दूसरा साथी प्राप्त न कर सकने का डर होता है। लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी है: कुछ लोग सोचते हैं कि उन्हें उचित साथी नहीं मिल पाया और इसलिए बार-बार नया साथी चुनते रहते हैं। दरअसल वे अपने आप को और अपने साथी को पर्याप्त समय ही नहीं देते कि एक-दूसरे के साथ सामंजस्य बिठा पाएं, स्थिरचित्त हो सकें और खुश रह सकें।

इस बात का ज़्यादा एहसास मुझे पश्चिमी देशों में हुआ है- और यह स्वाभाविक ही है क्योंकि भारत के विपरीत, जहाँ अधिकांश विवाह अभिभावकों द्वारा आयोजित (अरेंज्ड) होते हैं, यहाँ लोग अपना जीवन साथी खुद चुनते हैं! लोग अपने लिए "मेरे एकमात्र अपने" जीवन साथी की खोज में रहते हैं लेकिन, दुर्भाग्य से, उस साथी के चेहरे पर "सिर्फ आपके लिए" का कहीं कोई निशान नहीं होता! कोई निश्चत और भरोसेमंद संकेत नहीं मिलता कि जिसे आपने अपने लिए चुना है वह आपके लिए पूरी तरह उपयुक्त है ही और यही असुरक्षा का भाव ही इस समस्या की जड़ है: यह सोचकर कि इससे बेहतर साथी वे ढूँढ़ लेंगे, वे लोग बार-बार सम्बन्ध तोड़ लेते हैं! इस तरह वे दशकों तक नए-नए सम्बन्ध जोड़ते और तोड़ते रहते हैं और दुर्भाग्य से उन्हें कभी भी वास्तविक ख़ुशी नहीं मिल पाती।

प्रेम को विकसित होने के लिए आपको कुछ समय देना चाहिए। मैं सहमत हूँ कि पहली नज़र में भी प्रेम हो सकता है लेकिन संबंधों को सुदृढ़ होने में थोड़ा ज़्यादा समय लगता है। एक दूसरे को अच्छी तरह जानने में और आपसी विश्वास पैदा हो इसके लिए आपका साथ रहना और एक-दूसरे के साथ विभिन्न परिस्थितियों से गुज़रना आवश्यक है। तभी आप जान-समझ पाते हैं कि दूसरा किसी खास परिस्थिति में कैसा व्यवहार करता है, कैसे आप दोनों मिलकर किसी मामले पर सामंजस्यपूर्ण रास्ता निकाल सकते हैं और जान सकते हैं कि दूसरे में क्या-क्या विशेषताएँ हैं और क्या-क्या कमियाँ हैं।

लेकिन इस बात के लिए कुछ समय देने के बजाए लोग पहली समस्या का सामना होते ही भाग खड़े होते हैं। अगर आपके बॉयफ्रेंड की कुछ बुरी और परेशान करने वाली आदतें हैं तो सिर्फ इसीलिए एकदम उत्तेजित होकर उसे त्यागने का निर्णय मत कीजिए बल्कि उससे इस विषय में बात कीजिए, हो सकता है इस विषय में वह कुछ बातें न जानता हो, देखिए कि वह किस हद तक बदल सकता है और दूसरी ओर, देखिए कि आप खुद उसकी किन आदतों से तालमेल बिठा सकती हैं, किन बातों को आप स्वीकार कर सकती हैं। अगर आपकी गर्लफ्रेंड बार-बार आपको टोकती है (ठीक करने की कोशिश करती है) और यह या वह करने या न करने के लिए कहती है तो भागिए मत, उससे दूरी बनाने की कोशिश मत कीजिए बल्कि उससे बात कीजिए: कहिए कि आप खुद वह काम करने में सक्षम हैं और अगर वह बात-बात पर आपकी गलतियाँ न निकाले तो बेहतर होगा।

हो सकता है यह एक गलत व्यक्ति के साथ समय बरबाद करने का डर हो, संभव है यह डर हो कि संबंध को लेकर ज़्यादा भावुक होने पर बाद में, संबंध टूटने पर दिल टूट जाएगा। कारण कोई भी हो, आपको इस डर से बाहर आना होगा और कम से कम संबंध को परिपक्व होने का थोड़ा और मौका देना होगा। थोड़ी सी भी संभावना लगती हो तो उसे अंजाम तक पहुँचाने की पूरी कोशिश होनी चाहिए।

लेकिन, ऐसे भी लोग होते हैं, जो यह कोशिश कुछ ज़्यादा देर तक करते रहते हैं-लेकिन वह दूसरा पहलू है और उस पर मैं अगले हफ्ते चर्चा करूंगा।

आज के लिए मैं इतना ही कहना चाहता हूँ कि अपने सम्बन्धों की गहराइयों में जाएँ, पहली समस्या आते ही भागे नहीं बल्कि दोनों मिलकर उसका कोई हल ढूँढ़ने की कोशिश करें- और ऐसी जितनी अधिक समस्याओं से आप दो-चार होंगे, उन्हें हल कर लेंगे, उतना ही आप एक-दूसरे को बेहतर तरीके से जान पाएंगे, आपका प्रेम मजबूत होता चला जाएगा और आप अपने इस जीवन साथी के साथ लंबा जीवन गुजारने की दिशा में विश्वास के साथ आगे बढ़ेंगे!

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