साथी नहीं, जीवनसाथी ढूंढिए – 19 नवम्बर 08

सम्बन्ध

कोई भी व्यक्ति संबंध बनाने से पहले अपने भावी प्रेमी में कुछ खूबियों की तलाश में रहता है। वह चाहता है कि पृष्ठभूमि जिसमें सामने वाला पला – बढ़ा है उसकी तलाश के अनुकूल हो। भारत में जातिप्रथा की जड़ें बहुत गहरी है लिहाजा यह देखा जाता है कि वह किस जाति से संबंध रखता या रखती है। पश्चिमी देशों में लोग अभिजात्यता, बौद्धिक स्तर या शैक्षिक योग्यता को ध्यान में रखते हैं शायद। लोग चाहते हैं कि प्रेम उससे किया जाए जिसकी रुचियां और आदतें खुद से मेल खाती हों। आजकल लोग शारीरिक सौन्दर्य पर खास जोर देने लगे हैं। देहयष्टि , बाल और त्वचा की सुंदरता उनके लिए खास मायने रखती है। कहने का मतलब यह है कि एक संबंध को स्थापित करने से पहले कई तरह की शर्तें दिमाग़ में रहती हैं। गोया कि साथी नहीं कार या कपड़े खरीदने जा रहे हों। हम पर कौन सा डिज़ाइन फबेगा, किस रंग की कार ज्यादा सुंदर दिखेगी?

इसी कारण से अकसर सुनने में आता है कि फलां प्रेमसंबंध असफल हो गया। आननफानन में यह सब हो जाता है, चीज़ें हमारी काम की नहीं रह जातीं। दुनिया बड़ी तेज़ रफ्तार से आगे बढ़ रही है और हमारा दिमाग़ उससे भी ज्यादा तेज़ी से। सभी कुछ तेजी से बदल रहा है। वही वस्तु और वही व्यक्ति जिसे पाकर और जिसके साथ कभी आप खुशी से फूले नहीं समाते थे, थोड़ा समय बीतने के बाद वही सब कुछ नीरस लगने लगता है। मात्र छ्ह महीनों में ही हालात तब्दील हो गए और अब वही रिश्ता अपना आकर्षण खो बैठा है। बदलाव रिश्ते में नहीं आया है, बदलाव आया है रुचियों में, खूबियों में और मनोदशा में।

ऐसे संबंध का नाकामयाब होना लाजमी था क्योंकि यह एक ग़लत बुनियाद पर खड़ा हुआ था। दिमाग़ में एकसाथ कई चीज़ें चल रही थीं। यह रिश्ता हमारे प्रेम से प्रस्फुटित नहीं हुआ था। इसका जन्म हमारी ख्वाहिशों, उम्मीदों और कल्पनाओं से हुआ था। भ्रमजाल टूटा तो निराशा आनी स्वाभाविक थी। लोग एक दूसरे को जानने समझने के लिए न जाने कितने यत्न करते हैं, एक दूसरे से मिलते हैं और डेटिंग पर जाते हैं। एक दूसरे की रुचियों और आदतों को जानने की समझने में समय लगाएं। अपनी भावनाओं को बिना किसी झिझक के व्यक्त करें। प्रेम का रिश्ता कोई व्यापार नहीं है कि जिसमें किन्हीं शर्तों के तहत एक दूसरे को बांध दिया जाए। पहले से ही भावी प्रेमी या प्रेमिका के सौंदर्य और चालढाल के बारे में मापदंड निर्धारित न करें। भावों को निर्बाध रूप से बहने दें। उसके बाद यदि आप दोनों के बीच कुछ प्रस्फुटित होता है तो वह एक अटूट रिश्ता होगा।

Leave a Comment