क्या आध्यात्मिकता (धार्मिकता) का अर्थ यह है कि आप दगाबाजी करें फिर अपने आप को माफ़ भी कर दें? 15 जुलाई 2015

कुछ सप्ताह पहले यहाँ आश्रम के एक मेहमान के साथ मैंने एक व्यक्तिगत सलाह सत्र किया था। वह शारीरिक विश्रांति और मानसिक स्पष्टता हेतु भारत आया था और इसलिए उसने हमारे आयुर्वेद योग अवकाश कार्यक्रम की बुकिंग की थी। कार्यक्रम के अंतर्गत वह योग कक्षाओं में शामिल हुआ और आयुर्वेदिक मालिश और चिकित्सा प्राप्त की। इससे बढ़कर, उसने मुझसे बात करने की इच्छा भी प्रकट की। वास्तव में वह महज अपनी निजी गुप्त बातों और उनके चलते उसके मस्तिष्क में व्याप्त जटिलताओं को सुलझाने के उद्देश्य से सारी बातचीत करना चाहता था।

उस व्यक्ति ने अपने संबंध के बारे में मुझे बताया। वह आठ साल से एक महिला के साथ संबंध रखे हुए थे। वे एक-दूसरे से बहुत प्रेम करते थे और एक दूसरे की भावनाओं का खयाल रखते थे लेकिन कभी विवाह करने का विचार उनके मन में नहीं आया। वे जिस तरह रहा करते थे, उसी में खुश थे और उन्हें एक दूसरे के होने के बारे में किसी आधिकारिक प्रमाणपत्र की ज़रूरत नहीं थी। पिछले तीन साल से वे एक साथ, एक छत के नीचे रह भी रहे थे।

बोलते-बोलते इसी क्षण वह थोड़ा हिचकिचाया फिर कहा, "लेकिन मैं कभी भी उसके प्रति वफ़ादार नहीं रहा था।" वह काफी समय से अपने साथी के साथ धोखेबाज़ी कर रहा था और कई दूसरी महिलाओं के साथ यौन संबंध रखे हुआ था। ये सभी संबंध उन महिलाओं से होते थे, जिनसे वह कुछ समय पहले ही मिला होता था, फिर उनके बीच एक रात का संबंध बन जाया करता था और बाद में कभी उनकी मुलाक़ात नहीं होती थी। संयोग से, एक महिला ऐसी भी थी जो दोनों की साझा मित्र थी।

अपने सलाह सत्रों में अब तक मैं बहुत से लोगों से बातचीत कर चुका हूँ और यह विषय मेरे लिए कतई नया नहीं था। इसलिए जब यह व्यक्ति चुप हुआ और उसने बड़ी आशा से मेरी तरफ आँख उठाकर देखा तो मैंने उसे वही सलाह दी, जो अक्सर इन मसलों पर देता आया हूँ: सच का दामन न छोड़ें! अगर आप किसी और से प्रेम करते हैं तो उसे अपने साथी से कहें। अगर आप यह बात छिपाते हैं तो यह भेद जहर बनकर धीरे-धीरे न सिर्फ आपके संबंधों को दूषित करेगा बल्कि आपके दिमाग को भी करेगा। समय आएगा, जब आप अपने आपको इतना बुरा समझने लगेंगे कि अपना भेद छिपा नहीं पाएँगे। अभी भी मौका है, अगर आप ईमानदारी से सारी बातें खुलकर उसे बता दें और माफी माँग लें तो संभव है, वह आपको क्षमा कर दे।

लेकिन मेरी सलाह पर उसकी प्रतिक्रिया पर मैं स्तब्ध रह गया: "ओह, मैं अपने आपको गुनहगार नहीं समझता! मैं उस तरह का आदमी नहीं हूँ। मैं अपने आपको माफ कर सकता हूँ! लेकिन मुझे डर है कि वह इतना घबरा जाएगी कि अवसादग्रस्त हो सकती है! जिस घर में हम रह रहे हैं, वह उसी का है- वह मुझे निकाल बाहर करेगी…पता नहीं, इस शहर में मैं अपना घर ले पाऊँगा या नहीं!"

चलिए, सच तो सामने आया: आध्यात्मिक रूप से यह आदमी इतना पहुँचा हुआ है कि एक महिला के साथ दगाबाज़ी करके खुद अपने आपको माफ कर सकता है और ऊपर से यह दावा भी कर सकता है कि वह उस महिला से प्रेम करता है! इससे ज़्यादा क्या स्पष्ट होना था! फिर, वह उस महिला के साथ उसके घर में रहने में अपना फायदा भी स्पष्ट देख रहा है… अब उसके दिमाग का एक भ्रम मुझे दूर करना था: अगर आप ऐसा कुछ करते हैं, जिससे आपके साथी को नुकसान पहुँचे और फिर उस बात को उससे छिपाते भी हैं तो स्पष्ट है कि आप उससे प्रेम नहीं करते बल्कि सिर्फ उसके प्रेम का लाभ उठाना चाहते हैं!

आईने की तरह साफ – क्या ख़याल है आपका?

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