रिश्तों के घाव भरे अध्यात्म की औषधि – 12 जनवरी 08

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आज एक व्यक्ति हीलिंग के लिए मेरे पास आया। वह बहुत दुखी था और जार – जार रो रहा था। एक साल साथ रहने के बाद उसकी पत्नी बिना कोई कारण बताए किसी और पुरुष के साथ चली गई थी। एक दूसरा व्यक्ति आया जो चालीस बरसों से पत्नी के साथ रहते रहते ऊब गया था और अब ‘बदलाव ‘ चाहता था। मैं बैठा हुआ सोच रहा था “ ये क्या हो रहा है? “ हीलिंग सत्रों के दौरान मैं बहुत से लोगों से मिलता हूं। बहुत कुछ देखता – सुनता भी हूं। मैं एक हीलर हूं और ज़ाहिर है कि मैं किसी की भी पहचान को उद्घाटित नहीं करता हूं और न ही उनकी परेशानियों के बारे में किसी से बातचीत करता हूं। इस सभी विषयों पर अपने विचार मैं किसी और दिन व्यक्त करूंगा। सत्र पूरा होने के बाद हम एक भारतीय रेस्तरां में भोजन करने गए। खाना खाते वक़्त भी रिश्तों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा होती रही। सुस्वादु भोजन करने के बाद हम लुसाने के गिरिजाघर गए और वहां से जेनेवा झील के चारों तरफ शहर की रोशनी का अद्भुत नज़ारा देखा।

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