फूल पत्ता गोभी – आयुर्वेदिक बंदगोभी और फूलगोभी की रेसिपी – 5 जनवरी 13

शहर:
वृन्दावन
देश:
भारत

यहां वृंदावन में बहुत अभी भी बहुत ठंड है और आश्रम परिवार के लगभग सभी सदस्य सर्दी-ज़ुकाम से त्रस्त हैं। अपरा को भी सर्दी और हल्की बुखार लग गई थी लेकिन अब वो ठीक है। इन सबके बावजूद हमारी रसोई टीम हतोत्साहित नहीं हुई। यशेन्दु सहित आयुर्वेदिक पाकशाला के सभी सहभागी पिछले चार सप्ताह से प्रतिदिन रसोई में बेहतरीन भोजन बनाते हुए और उनमें निहित आयुर्वेदिक गुणों की खोज करते हुए बेहद सक्रिय रहे! इस प्रकार बीते सप्ताहों में हमने नाना प्रकार के व्यंजनों का आनंद उठाया है। तो ये लीजिए आपके लिए एक और रेसेपी: फूल पत्ता गोभी, बंदगोभी और फूलगोभी का मिश्रण।

फूल पत्ता गोभी – आयुर्वेदिक बंदगोभी और फूल गोभी

अपने वात को बढ़ाए बिना फूलगोभी और बंदगोभी के मेल से स्वादिष्ट व्यंजन तैयार कीजिए

फूल पत्ता गोभी बनाने में कितना समय लगता है?

तैयारी करने में:
पकाने में:
कुल समय:

सामग्री

500 ग्राम फूलगोभी
500 ग्राम बंदगोभी
2 बड़े चम्मच ज़ैतून का तेल अथवा जिस भी तेल में आप भोजन बनाते हैं|
2 छोटी चम्मच ज़ीरा
1 छोटी चम्मच सरसो
1 चुटकी हींग
1 बड़ी चम्मच अदरक (बारीक कटा हुआ)
1 छोटी चम्मच गरम मसाला
2 छोटी चम्मच धनिया पाउडर
1/2 छोटी चम्मच हल्दी पाउडर
1 छोटी चम्मच अदरक पाउडर
स्वाद के अनुसार नमक

फूल पत्ता गोभी कैसे बनाएं?

हम सब्ज़ियों को तैयार करने से शुरू करेंगे. सबसे पहले फूलगोभी को अच्छी तरह धो लें और फिर उसकी पत्तियां हटा दें। बंदगोभी के लिए ठीक उल्टा करें: अगर बाहरी पत्तियां ख़राब हों तो उन्हें हटा दें और फिर उसे अच्छी तरह धो लें। बड़ा चाक़ू लें और बंदगोभी को इतने छोटे और पतले टुकड़ों में काट लें कि वे आपके मुंह में आसानी से जा सकें। अब फूलगोभी लीजिए और उसके फूल को काट लीजिए. आप चाहें तो डंठल का इस्तेमाल भी कर सकते हैं, बस उन्हें बहुत छोटे और पतले टुकड़े में काट लें ताकि जब आप उन्हें पकाएं तो वे बेहद नर्म हो जाएं। हालांकि उन्हें फूलगोभी के फूलों से अलग रखें, क्योंकि उन्हें पकने में अधिक समय लगेगा।

एक बर्तन में तेल गर्म करें और उसमें ज़ीरा, सरसो, हींग और आख़िर में ताज़ा अदरक डालें। थोड़ी देर के लिए इन मसालों को चलाएं और फूलगोभी के डंठल को बर्तन में डाल दें। बरतन का ढक्कन लगा दें और इससे पहले कि उसमें फूलगोभी का फूल डालें, उसके डंठल को लगभग दो मिनट तक पकने दें। उसके ऊपर नमक छिड़कें, मिलाएं और फिर से ढक्कन लगा दें। चूल्हे की आंच मद्धम रखें और थोड़ी-थोड़ी देर पर चलाते रहें।

लगभग पांच मिनट के बाद, आप ढक्कन हटाकर गरम मसाला, धनिया पाउडर, हल्दी और अदरक पाउडर डाल सकते हैं। मसालों को फूलगोभी में अच्छी तरह से मिला लें, ढक्कन को एक या दो मिनट के लिए वापस लगा दें और इसे पकने दें।

फूलगोभी अब तक 40% पक जानी चाहिए और अब आप बरतन में बंदगोभी डाल सकते हैं। सबको अच्छी तरह से मिला लें, ताकि बंदगोभी सारे मसालों के संपर्क में आ सके। ढक्कन फिर से लगा दें और बंदगोभी को भी पकने दें। थोड़ी-थोड़ी देर पर चलाते रहें।

अब यह आप पर निर्भर है, आप कैसी बंदगोभी पसंद करते हैं, बिल्कुल पकी हुई और नर्म या आपको ये थोड़ा चबाने लायक पसंद है – दस या पंद्रह मिनट बाद जब भी आपको लगे कि ये आपकी पसंद के स्तर तक पहुंच गया है, ढक्कन हटाएं और उसमें इकट्ठा हुए पानी को वाष्पित होने दीजिए। इस प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा करने के लिए चाहें तो आंच तेज़ कर दें लेकिन चलाते ज़रूर रहें ताकि सब्ज़ी बर्तन में चिपके नहीं।

जब पानी खत्म हो जाए और बंदगोभी आपके हिसाब से नर्म हो जाए तो समझिए कि आपका फूलगोभी और बंदगोभी व्यंजन तैयार है!

आयुर्वेदिक लाभ

फूलगोभी और बंदगोभी में एक जैसे आयुर्वेदिक गुण ही हैं। दोनों सब्ज़ियां पित्त और कफ़ को शांत करती हैं और वात को बढ़ाती हैं। स्पष्ट रूप से कम वात वालों के लिए यह व्यंजन बहुत बढ़िया है लेकिन इससे पहले कि आप कोई दूसरा व्यंजन ढूंढ़ें क्योंकि आपको लगता है कि यह आपके वात का स्तर कुछ ज़्यादा ही बढ़ा देगा, तो मैं आपको बता दूं कि हमने इसके प्रभाव को कैसे संतुलित किया है! हमने ज़ीरा, अदरक और सरसो जैसे मसाले का इस्तेमाल किया है ताकि व्यंजन थोड़ा ‘गर्म’ हो जो ठंडे वात को संतुलित करेगा। इसलिए बेफ़िक्र होकर इस व्यंजन का आनंद लीजिए!