क्या करें जब चीज़ें आपके आदर्शों के अनुरूप न हों – 24 नवंबर 2015

कुछ समय पहले मैंने लिखा था कि आप कभी-कभी आदर्शवाद को खींच-तानकर यथार्थ से बहुत दूर ले जाते हैं और फिर दैनिक जीवन में दुखी होते रहते हैं। मेरा मानना है कि जीवन में अपने लिए कुछ आदर्शों का होना अच्छी बात है और सामान्य रूप से क्या सही है और क्या गलत, इस बात की स्पष्ट समझ हर एक के लिए उपयोगी और लाभदायक ही है। लेकिन यह स्वीकार करना भी आवश्यक है कि दुनिया आदर्श नहीं है-और बदलाव लाने की दिशा में हम सिर्फ अपने स्तर पर ही कुछ अच्छा कर सकते हैं।

और ऐसा करने की बहुत सी संभावनाएँ मौजूद हैं! सिर्फ आप अपनी नौकरी का उदाहरण लें: हो सकता है, आप वहाँ का माहौल बदल न पा रहे हों लेकिन, उदाहरण के लिए, आप कोई दूसरी नौकरी पाने का प्रयास कर सकते हैं जो आपके आदर्शों के अनुरूप हो या कम से कम उसके विरुद्ध न हो! एक शाकाहारी के रूप में आप किसी कसाई के यहाँ काम नहीं करेंगे। कार्यालय में भी नहीं क्योंकि वह आपके आदर्शों के विपरीत है। लेकिन कोई ऐसा रोजगार खोजना, जो आपके हर आदर्श के अनुसार चलता हो, असंभव है!

मैं आपके सामने एक उदाहरण रखता हूँ। मान लीजिए आप किसी ऐसी कंपनी में काम करते हैं जो आपके आदर्शों की समर्थक है और वह जगह आपकी नौकरी के लिए सबसे उचित जगह है। मान लीजिए कि वह एक दुकान है जो जैविक खाद्यों और मेलों में बेचे जाने वाली सामग्रियों का व्यापार करती है। वह पूरी तरह आपके आदर्शों के अनुरूप है-सिर्फ दुकान के एक हिस्से को छोड़कर: दुकान के एक कोने में आध्यात्मिक या अतींद्रियवादी सामान भी बेचने के लिए रखा हुआ है-टेरो कार्ड्स, क्रिस्टल बॉल्स और आधुनिक डायनों, अतींद्रियवादियों और जादुई इलाज करने वालों के लिए तरह-तरह का सामान! आप इससे सहमत नहीं हैं, आपका विश्वास है कि यह लोगों में अंधविश्वास फैलाने वाली वस्तुएँ हैं-लेकिन आपको उस सामान को भी बेचना है!

यह आदर्श स्थिति नहीं है-मगर आप अकेले एक आदर्श दुनिया निर्मित नहीं कर सकते! इस दुनिया में हर तरह की चीजों का अस्तित्व है और अगर आप अति-आदर्शवादी हैं तो दुनिया में होने वाली बहुत सी बातों से आपको परेशानी होती रहेगी! इसलिए जो बातें आदर्श नहीं हैं, उनसे चिपके रहने से बेहतर है कि जितना संभव हो अपने आदर्शों के करीब पहुँचने की कोशिश करना-और शेष बातों को जैसी भी वे हैं, स्वीकार करना!

इस तरह जितना आप सोच रहे हैं, उससे आगे आप जा सकते हैं। कोशिश करके देखें। जैसे, मान लीजिए आपको पता चलता है कि जिस बैंक में आपका खाता है, वह आपके पैसे का उपयोग अस्त्र-शस्त्रों के व्यापार में लगा रही है, जिनका उपयोग युद्धों में किया जाता है और जिसके आप समर्थक नहीं हैं-या उन परियोजनाओं में जिसे आप उचित नहीं समझते और आपके आदर्शों के विरुद्ध हैं। अगर यह बात आपको परेशान करती है तो थोड़ी खोज करके कोई ऐसा बैंक ढूँढ़िए, जो पर्यावरण या दीर्घकालिक संवहनीय परियोजनाओं में आपका पैसा लगा रहे हैं- और निश्चित ही, ऐसी बैंकें भी अस्तित्व में हैं!

कुछ ऐसी चीज़ें भी हो सकती हैं, जो आपके लिए पूरी तरह वर्जित हैं और जिन्हें आप फिलहाल बदल नहीं सकते। ऐसे मामलों में उन्हें, जैसी हैं, उसी हालत में स्वीकार करना होगा-कि इस दुनिया में हर चीज़ आदर्श नहीं है, कि कुछ मामलों में बदलाव का काम हम भविष्य में कुछ समय बाद शुरू करेंगे, जैसे लोगों के पूर्वग्रह जाते-जाते ही जाते हैं। ऐसी बातों के लिए परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। उनके प्रति निस्पृह न हों-मैं यह सलाह नहीं दे रहा हूँ। आप पूरी शक्ति के साथ किसी गलत बात के विरुद्ध अपने विचार पर कायम रहें और इंतज़ार करें कि जब संभव होगा तब उन्हें बदलने की कोशिश की जाएगी। लेकिन उन बातों पर उद्विग्न होकर अपनी ऊर्जा और समय बरबाद न करें, जिन्हें आप इस समय कतई बदल नहीं सकते क्योंकि उन पर आपके प्रचंड क्रोध का कोई असर नहीं होने वाला है!

उन्हें बेहतर बनाने की संभावना सदा बनी रहती है, भले ही उसका अस्तित्व लंबे समय तक बना रहे-आप स्वयं एक बेहतर उदाहरण बनकर यह काम कर सकते हैं। आपके पास आपकी ईमानदारी है और आप उसे संभालकर रखें, उसकी हिफाजत करें। आपको बेईमान होने की ज़रूरत नहीं है। अगर स्थितियाँ आपको उस तरफ धकेल रही हैं तो उन्हें बदलने का प्रयास कीजिए। अन्यथा अच्छी, सुंदर बातों का नज़ारा कीजिए और खुश रहिए।

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