आज और आगामी दो दिन मैं अलग तरह के कुछ व्यक्तियों के बारे में लिखना चाहता हूँ। या कहें, किसी नए काम, नई सूचनाओं या समस्याओं के सामने आने पर होने वाली उनकी प्रतिक्रियाओं पर और उनका सामना करते हुए उनकी किंकर्तव्यविमूढ़ता पर अपने विचार रखना चाहता हूँ। मैं ऐसे व्यक्तियों से अपनी बात शुरू करूँगा, जो हमेशा जानबूझकर किसी भी बात को या समस्या को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं, जैसे उससे पार पाना बड़ा मुश्किल, बल्कि लगभग असंभव हो!
मुझे विश्वास है कि ऐसे लोगों को आप अच्छी तरह जानते हैं: आप उनसे अपनी किसी कार्य योजना का ज़िक्र करें तो वे झुँझला उठेंगे, आपकी ओर शक की निगाह से देखेंगे और अंत में बताएँगे कि क्यों यह योजना असफल होगी, कैसे उसे अमली जामा पहनाना न सिर्फ आसान नहीं होगा बल्कि असंभव ही होगा! मज़ेदार बात यह कि वास्तव में जानते होते हैं कि यह काम बिल्कुल कठिन नहीं है!
जी हाँ, मैं ऐसे विचारों की बात कर रहा हूँ जो खयाली पुलाव नहीं हैं, ऐसी योजनाएँ, जिन्हें अमल में लाना संभव है, बल्कि बड़ी आसानी से, लेकिन जिन्हें ये लोग बहुत ही अलग ढंग से प्रस्तुत करते हैं। इस रवैये का कारण क्या है? आपको उस योजना के बहुत कठिन होने का विश्वास दिलाना: और जब वे आपकी ‘मदद करने में’ सफल हो जाते हैं और आपकी परेशानी दूर कर देते हैं तो सोचते हैं कि, आप अपने आपको उनके प्रति बहुत शुक्रगुज़ार और एहसानमंद महसूस कर रहे होंगे। आपकी इस तवज्जो का वे मज़ा लेते हैं, कि किस तरह उन्होंने आपका काम कर दिया और यह एहसास करके कि आप उनके कितने आभारी हैं, उन्हें बड़ा सुकून मिलता है।
स्वाभाविक ही उनके अहं की तुष्टि के लिए इससे अच्छी बात नहीं हो सकती!
अक्सर वे इस गलतफहमी में अपने आपको भी बेवकूफ बनाते रहते हैं-वे जानते हैं कि काम सरल है, समस्या मामूली है लेकिन फिर वे लंबे समय तक टालते हुए उसे इतना मुश्किल बना देते हैं कि खुद उसकी दुरूहता पर यकीन करने लगते हैं। अंततः, जब वे सफल हो जाते हैं तो इतने बड़े काम को अंजाम देने या इतनी बड़ी समस्या का समाधान कर पाने की सफलता में गर्व से भर उठते हैं!
इसी आदत के चलते वे हर मामूली बात का बतंगड़ बनाते रहते हैं। उनके जीवन में कोई बात आसान नहीं होती क्योंकि वे महान नायक बनना चाहते हैं, वे प्रशंसा चाहते हैं और चाहते हैं कि लोग उन्हें कठिन लक्ष्यों को प्राप्त करने वाला सफल व्यक्ति समझें!
जब भी आप ऐसे लोगों के पास कोई काम लेकर जाएँगे, वे आपको बताएँगे कि वह काम कितना मुश्किल है। ज़्यादा से ज़्यादा वह कितना कठिन हो सकता है, इससे उन्हें कोई मतलब नहीं होता और वे आपसे कभी भी यह नहीं कहेंगे कि काम आसान है या उसे बिना किसी समस्या के निपटाया जा सकता है। व्यावसायिक संसार में आपको इनसे सतर्क रहना चाहिए: वे आपको धोखा देंगे और यह विश्वास करने पर बाध्य कर देंगे कि यह सलाह देकर उन्होंने आपकी बड़ी सेवा की है-वे आपसे इस बहुमूल्य ‘सेवा’ की कीमत भी वसूल कर सकते हैं, जबकि उन्होंने योजना के स्वरुप में मामूली फेर-फार या एकाध परिवर्तन किया होगा और सब कुछ बड़ी आसानी से हो सम्पन्न हो गया होगा!
इसके विपरीत, अगर काम कठिन भी है तो वे उस समस्या के समाधान हेतु अपनी सारी शक्ति लगा देंगे, जिससे वे उसे निपटाने का श्रेय ले सकें!
लेकिन भविष्य में आप उनसे किसी नई योजना पर चर्चा करते हुए असुविधा महसूस करेंगे क्योंकि आप जानते हैं कि आपको उनकी ईमानदार सलाह कभी नहीं मिल पाएगी बल्कि, आप कुछ भी कहें, आपको उनसे हमेशा नकारात्मक फीडबैक ही प्राप्त होगा!
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