कल मैंने उन लोगों के बारे में लिखा था जो हर काम को इस तरह बढ़ा-चढ़कर पेश करते हैं जैसे वह बेहद कठिन काम हो जब कि वे जानते हैं कि काम बहुत आसान है या समस्या आसानी से हल की जा सकती है। आज मैं ऐसे लोगों के बारे में लिखना चाहता हूँ, जिनके पास जब आप कोई समस्या या अपनी किसी योजना को लेकर जाते हैं तो वे प्रतिक्रिया तो वैसी ही देते हैं-मगर बिल्कुल अलग कारणों से!
कल मैंने आपको ऐसे लोगों के बारे में बताया था, जिनसे आप कुछ भी कहें, उसमें तरह-तरह की समस्याएँ और परेशानियाँ अवश्य निकालेंगे क्योंकि वे खुद उस मामले का निपटारा करके सारा श्रेय लेना चाहते हैं, जिससे उनका अहं तुष्ट हो। आज मैं आपको कुछ दूसरे प्रकार के लोगों से मिलवाना चाहता हूँ-ये लोग वास्तव में ईमानदारी के साथ समझते हैं कि सब कुछ बहुत मुश्किल ही होता है!
इस समस्या के मूल में उनकी परवरिश है, उनकी शिक्षा-दीक्षा है और वह माहौल है, जिसमें वे रहते हैं। उनके जीवन का एक दायरा है, जो एक सीधी कतार में आगे बढ़ता है, एक ख़ास व्यवस्था में व्यवहार करता है। वे जानते हैं कि क्या होगा, कैसे उसे होना चाहिए, और सिवा कुछ मामूली, अस्थिर और परिवर्तनीय बातों के, उनके सामने पहले से सब कुछ पूरी तरह स्पष्ट रूप से तय होता है। उनके सामने रास्ता ठीक नाक की सीध में होता है, किसी गफलत की गुंजाइश नहीं होती।
और तब आप उनके सामने अपनी कोई बिल्कुल अलग योजना लेकर आते हैं! आप कुछ अलग करने की सलाह देते हैं, जो उनके सोच के दायरे में नहीं है! वैसा करना उनकी कल्पना से परे की बात है और तब उनके मन में हजारों तरह की कठिनाइयाँ पैदा हो जाती हैं! वे परेशान हो जाते हैं बल्कि वास्तव में, बड़े अशांत और व्याकुल हो उठते हैं, लगभग भयभीत। किसी भी परिवर्तन से पार पाना उनके लिए मुश्किल होता है क्योंकि उनमें लचीलापन बिल्कुल नहीं होता।
वे ईमानदारी से सोचते हैं कि जीवन कठिनाइयों से भरा हुआ है। कि हर तरफ दिक्कत ही दिक्कत है।
तो जब आप अपनी योजना लेकर उनके पास जाते हैं तो आपको पहले से पता होता है कि शुरू में उनका जवाब नकारात्मक ही होगा। ऐसे लोगों को सोचने और स्थिर होने के लिए कुछ समय दीजिए। उन्हें बताइए कि आप क्यों समझते हैं कि आपका सुझाव बढ़िया है और उन्हें उस सुझाव पर विचार करने का मौका दीजिए, उस परिवर्तन के भले-बुरे के बारे में, पक्ष-विपक्ष के बारे में सोचने-विचारने का मौका दीजिए। एक तरफ वे आपको कुछ वास्तविक समस्याओं के बारे में बताएँगे जो आपकी नज़रों से ओझल रह गई होंगी और इस तरह आपकी मदद ही करेंगे! दूसरी तरफ उनके सामने रखने से पहले आपको अपनी योजना को इतना पुख्ता बनाना होगा कि उसमें कोई खामी न रहे-अन्यथा उनके द्वारा निकाली गई खामियों के चलते आप बहुत जल्दी हतोत्साहित हो जाएँगे!
तो, इस बारे में समझदारी से काम लें कि कब आपको अपनी योजना उनके सामने रखनी है-कि जब आप उसे अंतिम रूप दें तो कोई कुछ भी कहे, सिवा कुछ ठोस बिंदुओं के उसमें कोई कमियाँ न रहें!
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