इस संज्ञान का मुकाबला कैसे करे कि आप ज़्यादा दिन ज़िंदा नहीं रहने वाले हैं? 28 अक्टूबर 2015

मनोविज्ञान

आर्थिक और आपसी संबंधों से जुड़ी समस्याओं पर लिखने के पश्चात् आज मैं एक ऐसी बिल्कुल अलग प्रकार की मुसीबत के विषय में लिखना चाहता हूँ जो आपकी दुनिया को झँझोड़कर रख देती है: जब आपको पता चलता है कि खुद आप या आपका कोई बहुत करीबी व्यक्ति किसी घातक बीमारी से या किसी स्वास्थ्य संबंधी समस्या से ग्रसित है। निश्चय ही मैं सर्दी-खाँसी जैसी सामान्य व्याधिओं की चर्चा नहीं कर रहा हूँ-जी नहीं, मेरा मतलब कैंसर जैसी बीमारियों या जानलेवा अपघातों से है, जहाँ घायल व्यक्ति अपनी हड्डियाँ तुड़वा बैठा है या पक्षाघात-ग्रस्त हो गया है। ऐसी स्थितियों का मुक़ाबला कैसे करें?

स्वाभाविक ही, मैं कोई चिकित्सकीय सलाह देने नहीं जा रहा हूँ। उसके लिए आपको बहुत सारे काबिल डॉक्टर मिल जाएँगे, जो आपकी या आपके प्रियकरों की हर संभव चिकित्सा कर सकेंगे। मैं सिर्फ समस्या के भावनात्मक और मानसिक पहलुओं पर दृष्टि डालूँगा।

बीमारी और मौत दो ऐसी परिस्थितियाँ हैं जहाँ आपके पास सिर्फ एक ही विकल्प होता है: उन्हें स्वीकार करना।

और यह बात कहने में जितनी आसान है उस पर अमल करना उतना ही कठिन है और मैं जानता हूँ कि जो भी इस परिस्थिति से गुज़र रहा होता है, जानता है कि वास्तव में यह कितना कठिन है। अगर आप जानते हैं कि एक या दो साल से अधिक आपका जीना संभव नहीं है। जब आपको पता चलता है कि अब आपको अपने पैरों का एहसास नहीं होगा क्योंकि आप लकवाग्रस्त हो चुके हैं। जब आपको पता चलता है कि आपकी पत्नी के हाथ कट जाने के बाद आपकी ज़िंदगी पूरी तरह बदल जाने वाली है।

मुद्दे की बात यह है कि ऐसे मामलों में आपके पास इसके सिवा कोई चारा नहीं होता कि आप परिस्थिति को स्वीकार कर लें। इस सच्चाई को स्वीकार करें और यह सुनिश्चित करें कि इस कठिन परिस्थिति में भी आप अच्छे से अच्छा क्या कर सकते हैं।

अगर आप या आपका कोई प्रियकर जानता है कि आपमें से किसी एक के पास बहुत कम जीवन बचा है तो पूरी कोशिश करें कि ये कुछ दिन, सप्ताह या महीने अधिक से अधिक सुखद हों। उनके लिए, जो अभी काफी समय तक करीब रहने वाले हैं, बहुत सारी उल्लासपूर्ण स्मृतियों को सँजोने की कोशिश करें। उन बातों को अंजाम दें, जिन्हें आप करना चाहते थे और हमेशा बाद में करने के लिए टाल देते रहे थे। संसार की खूबसूरती का उन लोगों के साथ आनंद लें, जिन्हें आप प्रेम करते हैं। यदि आपमें थोड़ी-बहुत लिखने की प्रतिभा है तो मैं सलाह दूँगा कि आपके मन में होने वाली हलचलों को लिखकर रख लें, जिससे इन्हीं परिस्थितियों से गुज़रने वाले दूसरे लोग आपके अनुभवों से शक्ति प्राप्त कर सकें!

यदि आप इन परिस्थितियों से बचकर निकल आते हैं तो उनके हर लमहे की कदर करें, उन्हें शिद्दत के साथ याद रखें, भले ही उन परिस्थितियों ने आपका नुकसान किया हो या आपके जीवन में उनके कारण स्पष्ट परिवर्तन आ गया हो! क्योंकि कितनी भी बुरी परिस्थिति से आप गुजरे हों, कोई न कोई होता है जो आपसे भी बुरी परिस्थिति से गुज़र चुका होता है। आपने उस प्रेरणादायक वक्ता का वीडियो देखा होगा, जिसकी बाहें और पैर नहीं हैं! जीने के आनंद के बारे में बात करते हुए उसे देखना अपने आपमें असाधारण और विस्मित करने वाला अनुभव है! न देखा हो तो उस वीडियो को अवश्य देखें।

जिन परिस्थितियों के साथ आपको आगे भी गुज़ारा करना है, उनको सहजता के साथ स्वीकार करते हुए, तदनुसार अपना भविष्य का संसार रचें। एक बार, जब आप उन्हें स्वीकार करने लगेंगे, आप नोटिस करेंगे कि आपकी परवाह करने वाले बहुत से करीबी लोग आपकी सहायता के लिए आगे आते जा रहे हैं और आपकी हर संभव मदद के लिए प्रस्तुत हैं। न सिर्फ अपनी विकट परिस्थितियों को स्वीकार करें बल्कि उस मदद को भी स्वीकार करें, जिनकी आपको सख्त ज़रूरत है।

निश्चित ही यह कठिन है लेकिन एक बार आप उन्हें स्वीकार करने लगें तो वे आसान होती जाएँगी और उनमें आपको जीवन की कई सकारात्मक बातें भी नज़र आने लगेंगी।

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