बदलाव को स्वीकार करें और अपनी खुशी को महत्व दें – 24 मार्च 2015

मनोविज्ञान

आज मेरे मन में एक ऐसे विषय पर लिखने का विचार है जो बार-बार मेरे सामने उपस्थित होता रहता है। खुद परिवर्तन के और उसे स्वीकार करने की क्षमता और आवश्यकता के बारे में।

कभी-कभी मैं जीवन की तुलना मौसम से करना पसंद करता हूँ। तीन दिन पहले यहाँ वसंत का मौसम था और ठंडी हवाएँ बह रही थीं-गुलाबी ठंड से लेकर कड़ाके की ठंड वाली रातें। अब दिन गरम हो चुके हैं लेकिन गर्मी को उरुज पर आने में घंटों लगते हैं। लेकिन मौसम बड़ी तेज़ी के साथ बदला, जैसा कि यहाँ आम तौर पर होता है और अब गर्मी का मौसम सामने है। हम सबेरे उठते हैं और जैसे ही सूरज ऊपर आता है गर्मी का एहसास होने लगता है। दोपहर तक बाहर काफी गरम हो जाता है। शामें और रातें भी गरम ही बनी रहती हैं। सिर्फ गर्मी नहीं, आप हवा में ग्रीष्म ऋतु की गंध महसूस करते हैं!

जीवन में परिवर्तन बहुत तेज़ी के साथ आ सकते हैं, जैसे मौसमों में परिवर्तन आते हैं। सबसे बड़ी बात यह कि आप उनके बारे में कुछ नहीं कर सकते! आपको उन्हें स्वीकारना ही पड़ता है। आप कुछ करना चाहते हैं और मौसम बदलकर बहुत गरम, बहुत ठंडा या बहुत नम हो सकता है लिहाजा अब आप वह मनचाहा काम नहीं कर पा रहे हैं-और आप मौसम में हुए इस परिवर्तन को रोक भी नहीं सकते! आप सिर्फ यह निर्णय कर सकते हैं कि इस परिवर्तन को अपनी प्रसन्नता छीन लेने की इजाज़त दे दें या न दें। मैंने अक्सर लोगों को खराब मौसम की शिकायत करते देखा है, उन्हें बहुत दुखी और उदास होते देखा है-और कभी-कभी ऐसा लगता है कि वास्तव में मौसम कभी भी मन मुआफिक नहीं हो सकता!

यही बात जीवन में आने वाली परिस्थितियों के साथ भी होती है! यह आपकी मर्ज़ी पर निर्भर करता है कि बाहर से आने वाले परिवर्तनों से निपटने के लिए कौन सा विकल्प चुनते हैं। अगर आप उन पर दुखी होना चाहते हैं तो आप दुखी होने के लिए स्वतंत्र हैं। आप रो सकते हैं, उदास हो सकते हैं, मौसम को कोस सकते हैं लेकिन अक्सर होता यही है कि आप अपनी प्रसन्नता और आनंद खो बैठते हैं। और ईमानदारी की बात यह है कि मेरी प्रसन्नता मेरे लिए इतनी अधिक कीमती है कि मैं उसे परिवर्तन की बलिवेदी पर न्योछावर करना नहीं चाहूँगा।

भारत आने वाले पर्यटक बताते हैं कि यह देखकर वे हैरान रह जाते हैं कि यहाँ लोग इतने गरीब हैं फिर भी इतने खुश कैसे रह लेते हैं!

जी हाँ, खुशी पैसे की मोहताज नहीं है। पैसे से आप खुशी खरीद नहीं सकते और मैंने कई अमीर लोगों को देखा है, जो बेहद दुखी हैं जब कि कई बेहद गरीब भी देखे हैं, जो उनसे कई गुना खुश रहते हैं! और मेरा मानना है कि परिस्थितियों को स्वीकार करने की उनकी क्षमता ही भारतीयों की खुशी का मुख्य कारण है।

मैं सोचता हूँ कि भारतीय स्वभाव से ही ऐसे होते हैं कि उनके लिए परिवर्तन को स्वीकार करना आसान होता है और स्वीकार करने की इस प्रवृत्ति के चलते ही वे खुश रहते हैं। मेरा यह भी मानना है कि जीवन की राह में हम कोई अच्छी बात देखें तो उससे सीखने की कोशिश करनी चाहिए-और अगर हम गरीब भारतीयों से यह सीख सकें तो हमें अवश्य सीखना चाहिए!

तो मौसमों को आने दीजिए और वे जो भी लेकर आएँ, उसे स्वीकार करते हुए खुश रहिए!

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