अपने कथ्य के प्रति लेखक की और अपने जीवन के प्रति पाठक की ज़िम्मेदारी – 2 अप्रैल 2013

कल मैंने लिखा था कि मैं अपने आपको एक साधारण इंसान मानता हूँ। जब एक पाठक ने यह पढ़ा तो आपत्ति उठाते हुए कहा कि आप ऐसा कहकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला नहीं झाड़ सकते; आपके ब्लॉग बहुत से लोग पढ़ते हैं और इसलिए अपने कहे या लिखे की आप पर पूरी ज़िम्मेदारी आयद होती है। मैंने सोचा लेखक और पाठक की जिम्मेदारियों के बारे में चर्चा रुचिकर हो सकती है और मुझे कुछ पंक्तियाँ इस पर लिखनी चाहिए।

सबसे पहले तो इस बात का शुक्रिया कि मुझे अपनी जिम्मेदारियों से अवगत कराया गया, हालांकि इसकी बहुत आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि मैं हमेशा इस बारे में सतर्क रहता हूँ। अपनी ज़िम्मेदारी समझता हूँ इसीलिए तो लिखता हूँ। मैं ब्लॉग लिखकर पैसा अर्जित नहीं करता, मैं अखबारों के लिए नहीं लिखता न ही मैं अपने आलेख (बाकायदा शब्दों के हिसाब से) पत्रिकाओं में छपने के लिए भेजता हूँ कि मैं उससे कुछ कमा सकूँ। नहीं, इस ब्लॉग के माध्यम से मैं अपने व्यक्तिगत विचार लोगों के साथ साझा करना चाहता हूँ, अपने जीवन में आए परिवर्तनों और उनसे प्राप्त अपने अनुभव लोगों को बताना चाहता हूँ जिससे अगर कोई ऐसे ही किसी मानसिक परिवर्तन के दहाने पर खड़ा है तो मेरे लेखन से उसे कोई अंतर्दृष्टि प्राप्त हो सके। शायद मेरे शब्द ऐसे व्यक्तियों को यह बताने के लिए हैं कि वे इन भावनाओं या इन विचारों के साथ अकेले नहीं हैं। हो सकता है यह लेखन किसी वैकल्पिक सोच, एक वैकल्पिक विचार या वैकल्पिक दृष्टिकोण की तरफ उनका ध्यान खींच सके। या वह सिर्फ लोगों का मनोरंजन ही कर सके-जी हाँ, इतना भी मेरे लिए बहुत है!

जब मैं कहता हूँ कि मैं एक साधारण, आम इंसान हूँ तब मेरे मन में ऐसे किसी इरादे का खयाल नहीं होता जिनका मैंने ऊपर ज़िक्र किया है, जिनमें ऐसा लगता है जैसे मैं किसी की मदद कर रहा हूँ, जैसे ये व्यासपीठ पर विराजमान किसी गुरु, शिक्षक या नेता के वचनामृत हों। जब मैं कहता हूँ कि मैं लिखता हूँ और अपने अनुभव साझा करने की अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास भी करता हूँ, तब मैं एक और बात भी स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि यह किसी अहंकारी का बयान नहीं है जो अपने आपको बहुत बड़ा जानकार समझता है या यह समझता है कि ऐसे 'दिव्य' अनुभव उसकी बपौती हैं। इसके विपरीत, मैं इस बात का कायल हूँ कि ऐसे अनगिनत लोग होंगे जो उन्हीं विचार-प्रक्रियाओं से गुजरे होंगे जिनसे यह सब लिखते हुए मैं गुज़रा हूँ। मैं समझता हूँ कि यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम एक दूसरे की मदद करें और अपने अनुभवों को साझा करके हम ऐसा कर सकते हैं।

स्वाभाविक ही हर लेखक अपने लेखन के लिए ज़िम्मेदार होता है। अगर आप घृणा फैलाने वाली बातें लिखते हैं या लोगों को अपराध और हिंसा की ओर प्रवृत्त करने वाले लेख लिखते हैं तो आप काफी हद तक अपने शब्दों के परिणामों के लिए ज़िम्मेदार होते हैं। मैं तो ऐसी घृणा फैलाने वाली बातें नहीं लिखता। जब भी मैं किसी विषय पर अपनी राय देता हूँ, मैं साफ-साफ उन तर्कों को भी प्रस्तुत करता हूँ जिन पर वह राय आधारित होती है, अपने अनुभवों का विवरण लिखता हूँ और सतर्क रहता हूँ कि मेरी भाषा शालीन और सभ्य हो। उसके बाद पाठकों की ज़िम्मेदारी हो जाती है कि वे मेरे शब्दों का क्या उपयोग करते हैं।

और अंततः यह सबसे महत्वपूर्ण बात होती है: अपने जीवन के प्रति पाठक की ज़िम्मेदारी। मैं सिर्फ अपना अनुभव बता सकता हूँ और उससे उपजी अपनी संवेदनाओं को स्पष्ट कर सकता हूँ लेकिन हो सकता है कि उसी अनुभव का आप पर बिल्कुल विपरीत या अलग असर हो। मैं यह बता सकता हूँ कि ऐसी स्थिति में मैंने क्या किया लेकिन आप सोचने के लिए स्वतंत्र हैं कि आपके लिए वैसा करना उचित नहीं है। मैं कभी भी आपसे यह नहीं कहता कि जैसा मैंने किया आप भी करें, न ही मैं ऐसी अपेक्षा रखता हूँ कि मेरे लिखे को पढ़कर आप वही करने लगें। गेंद आपके पाले में है और आप खुद सोचें कि आप उसका क्या करना चाहते हैं!

मैं यह कहना चाहता हूँ कि हर एक की परिस्थिति बिल्कुल अलग, उसकी व्यक्तिगत होती है और जबकि मैं एक लेखक की हैसियत से, एक व्यापक रूप से लागू हो सकने वाली बात कहता हूँ, जैसे ईमानदार होना एक अच्छी बात है, यह आप की ज़िम्मेदारी है कि आप उस सलाह का किस तरह उपयोग करते हैं। अगर आप मेरी सलाह पर ईमानदार होने का निर्णय करते हुए अपने अधिकारी से कहते हैं कि आप उसे पसंद नहीं करते और परिणामस्वरूप कोई सज़ा पाते हैं, तो मैं नहीं समझता कि मैं इसके लिए ज़िम्मेदार हूँ!

एक लेखक की कुछ ज़िम्मेदारियाँ होती हैं मगर कुछ पाठक की भी होती हैं। एक पाठक के रूप में आपको शब्दों के अर्थ को अपने अनुसार, अपने लिए समझना चाहिए, फिर देखना चाहिए कि वे किसके शब्द हैं और किसको संबोधित हैं और आखिर में अपने दिल से पूछना चाहिए कि वे आपके लिए कितने सही हैं। फिर आप अपनी ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर उठाने के लिए तैयार होंगे और अंततः उसके अनुसार, कई दूसरे लेखकों की टिप्पणियों के असर को भी जोड़ते हुए, लेकिन स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकेंगे और तदनुसार व्यवहार करेंगे। लेकिन आपके कृत्य सिर्फ आपके होंगे और उनके परिणाम भी।

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