जुलाई से दिसंबर 2013 तक के अपने जीवन की समीक्षा – 1 जनवरी 2014

कल मैंने पिछले साल के पहले आधे हिस्से की समीक्षा की थी। 2013 के दूसरे अर्धभाग में हुए मेरे अनुभवों के विषय में आप यहाँ पढ़ सकते हैं:

जुलाई

आश्रम वापसी के बाद जुलाई बहुत सी नई योजनाओं के साथ शुरू हुआ: औपचारिक रूप से जर्मन भाषा सीखने के लिए मैंने दिल्ली जाकर गोएटे इंस्टीट्यूट की जर्मन कक्षाओं में प्रवेश ले लिया और घर में रमोना से बाकायदा ट्यूशन लेना भी। फिर हर बुधवार हमने अपने स्कूल के बच्चों से पाठकों को मिलवाना शुरू किया और 1 जुलाई से स्कूल भी शुरू हो गए-आश्रम के कमरों में, क्योंकि स्कूल भवन की पहली मंज़िल अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुई थी।

अगस्त

वैसे तो आश्रम हमेशा ही जीवंत रहा करता है लेकिन अगस्त माह में उसकी सक्रियता कुछ ज़्यादा ही बढ़ गई थी। दरअसल छोटे-छोटे बच्चों को लेकर दो परिवार हमसे मिलने आए थे, जो अपरा के लिए बहुत सुखद रहा और वह बच्चों के साथ खेल-कूद में मगन रही। वे छुट्टियों में भारत-भ्रमण पर निकले थे और उन्होंने भी आश्रम के पारिवारिक माहौल का आनंद उठाया। जर्मन भाषा सीखते हुए मुझे पता चला कि अब चश्में के बगैर काम नहीं चलने वाला-और मैंने तुरंत आँखों के डॉक्टर से जांच कराई और चश्मा लगाना शुरू कर दिया।

सितंबर

सितंबर में ही पाखंडी गुरु आसाराम बापू के सेक्स अपराध उजागर हुए और कई हफ्तों तक भारतीय समाचार चैनलों पर यही विषय छाया रहा! लेकिन हमारे आश्रम में बिल्कुल अलग विषय हमें सक्रिय किए हुए था: चेचक (चिकन पौक्स)! एक-एक करके हमारे सभी बच्चे और कुछ कर्मचारी भी इस बीमारी से ग्रसित हुए। इसके चलते हमें न सिर्फ इस छूत की बीमारी से जूझना पड़ा बल्कि उसके साथ जुड़े अंधविश्वासों से भी लोहा लेना पड़ा!

अक्टूबर

इस माह मेरा जन्मदिन पड़ता है और जितना ही वह नजदीक आता था उतना ही मुझे लगता था कि इस वर्ष मैं जन्मदिन नहीं मनाऊँगा। अपनी माँ की अनुपस्थिति में यह पहला जन्मदिन था और मेरी उसे मनाने की बिल्कुल इच्छा नहीं हो रही थी। लेकिन मैं सोचता रहा कि मैं कितना खुशनसीब हूँ कि मेरा परिवार और यार-दोस्त मेरे आसपास ही हैं। यह भी कि यह खुशी ईश्वर-प्रदत्त नहीं है बल्कि मुझे चाहने वालों से मिली है। लेकिन यह समझने में भी ज़्यादा वक़्त नहीं लगा कि जिंदगी ने मित्रता के संबंध में कुछ अच्छे पाठ भी पढ़ाए हैं।

नवंबर

इस बार दिवाली नवंबर शुरू होते ही आ गई थी और यह पहली बार था कि अपरा इस त्योहार के समय रोशनियों से सजे-धजे आश्रम में चल-फिर सकती थी। हमने सुनिश्चित किया कि अचंभित होने ले लिए आश्रम में ही बहुत सी चीज़ें उसके लिए मुहैया करा दी जाएँ! रोशनियाँ, मोमबत्तियाँ, मिठाइयाँ-अब वह जान गई है कि दीवाली क्या होती है!

नवंबर के बाकी दिनों में हम लोग आश्रम के मेहमानों की यात्राएं आयोजित करने में, उनके आयुर्वेद और योग अवकाश के कार्यक्रमों में और उनकी सुख-सुविधा का ख्याल रखने में व्यस्त रहे।

दिसंबर

हालांकि दिसंबर के शुरुआती दिन अम्माजी का यादों से सराबोर रहे और उनकी पहली बरसी आंसुओं में डूबी हुई थी लेकिन हमारे दिलों में उनके शाश्वत प्रेम का खुशनुमा अहसास पूरे समय बना रहा।

समय पंख लगा के उड़ता है और जर्मन भाषा की मेरी परीक्षा का दिन भी आ गया। मैंने परीक्षा दी और अपनी अपेक्षा से ज़्यादा, यानी 85% नंबर लेकर परीक्षा पास भी कर ली! फिर सप्ताहांत में इस खुशी को परिवार के साथ मनाने के लिए हम, यानी मैं, रमोना और अपरा, लखनऊ घूमने निकल गए।

अंत में, हमने बिना किसी धार्मिक तामझाम के क्रिसमस मनाया। बहुत जल्द हमने अपने आपको साल के अंतिम पड़ाव पर खड़े पाया और आज नए साल की शुरुआत भी हो गई। हमारे लिए 2013 बहुत सुखद रहा और मैं आप सभी को 2014 की बहुत-बहुत शुभकामनाएं प्रेषित उसके लिए उसके लिए उसके लिए करता हूँ।

Related posts

हाँ, मुझे सेक्स, पैसा,  भौतिक पदार्थ और मेरी पत्नी पसंद हैं और मुझे कोई अपराधबोध भी नहीं है! 19 नवंबर 2015

हाँ, मुझे सेक्स, पैसा, भौतिक पदार्थ और मेरी पत्नी पसंद हैं और मुझे कोई अपराधबोध भी नहीं है! 19 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु उन चीजों के बारे में बता रहे हैं, जिनसे उन्हें प्रेम है, भले ही बहुत से लोग उन ...
वार्तालाप के कौशल में वृद्धि हेतु 5 टिप्स - 19 अगस्त 2015

वार्तालाप के कौशल में वृद्धि हेतु 5 टिप्स – 19 अगस्त 2015

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि लोगों से बात करते वक़्त पाँच बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पढ़िए और ...
स्वतंत्र और भ्रष्टाचार-मुक्त मीडिया का स्वप्न - 'इंडिया संवाद' - 23 मार्च 2015

स्वतंत्र और भ्रष्टाचार-मुक्त मीडिया का स्वप्न – ‘इंडिया संवाद’ – 23 मार्च 2015

स्वामी बालेन्दु एक समूह में शामिल हुए हैं, जिसका नाम 'इंडिया संवाद' है और जिसका ध्येय भ्रष्टाचार-मुक्त मीडिया के लिए ...
पिछले साल पर एक नज़र - जुलाई से दिसंबर 2014 - 1 जनवरी 2015

पिछले साल पर एक नज़र – जुलाई से दिसंबर 2014 – 1 जनवरी 2015

स्वामी बालेन्दु 2014 के अगले छह महीनों में हुए अपने अनुभवों की समीक्षा कर रहे हैं। ...
सन 2014 का लेखा-जोखा - जनवरी से जून - 31 दिसंबर 2014

सन 2014 का लेखा-जोखा – जनवरी से जून – 31 दिसंबर 2014

स्वामी बालेंदु सन 2014 में किए गए अपने कामों की पड़ताल कर रहे हैं। ...
मुझे बदलाव पसंद हैं और मैं अपनी गलतियाँ भी स्वीकार करता हूँ! 10 नवंबर 2014

मुझे बदलाव पसंद हैं और मैं अपनी गलतियाँ भी स्वीकार करता हूँ! 10 नवंबर 2014

स्वामी बालेन्दु अपने और बदलाव के विषय में चर्चा कर रहे हैं! ...
खुद अपने बारे में कुछ बातें - 21 अक्टूबर 2014

खुद अपने बारे में कुछ बातें – 21 अक्टूबर 2014

स्वामी बालेंदु इस ब्लॉग में खुद अपने बारे में कुछ व्यक्तिगत नोट्स लिख रहे हैं। उनका स्व-आकलन यहाँ पढ़ें। ...
क्या एक नास्तिक कह सकता है कि वह किसी का कृतज्ञ है? 30 सितंबर 2014

क्या एक नास्तिक कह सकता है कि वह किसी का कृतज्ञ है? 30 सितंबर 2014

शुक्रगुजार (कृतज्ञ) होना और भाग्य संबंधी प्रश्न धर्म और ईश्वर से संबन्धित हैं या नहीं? इस विषय में स्वामी बालेंदु ...
लेखकों: जब कोई आपकी रचना की नक़ल करे तो सम्मान महसूस करें! 1 सितम्बर 2014

लेखकों: जब कोई आपकी रचना की नक़ल करे तो सम्मान महसूस करें! 1 सितम्बर 2014

स्वामी बालेन्दु लेखकों की कड़ुवी त्रासदी की चर्चा कर रहे हैं: बिना इजाज़त उनकी रचना उड़ा ली जाती है, टुकड़ों-टुकड़ों ...
जन्मदिन मुबारक हो रमोना! तुम्हारे बगैर मैं जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकता! 19 मार्च 2014

जन्मदिन मुबारक हो रमोना! तुम्हारे बगैर मैं जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकता! 19 मार्च 2014

स्वामी बालेन्दु अपनी पत्नी को उसके जन्मदिन पर भावुक स्मृतियों में सराबोर प्रेमपत्र लिख रहे हैं ...

Leave a Reply