साल का यह आखिरी दिन है। ये 365 दिन इतनी तेज़ी के साथ गुज़र गए कि आश्चर्य होता है! हर साल की तरह यह साल भी घटनाओं से भरा हुआ और भावपूर्ण रहा और मैं इस वर्ष में हुए अपने व्यक्तिगत अनुभवों की समीक्षा को आपके साथ साझा करना चाहता हूँ।
जनवरी
जनवरी 2013 में हमारे आश्रम में कुछ मित्रों का आगमन हुआ और हमने उनके साथ साल की शुरुआत की। इस तरह नए साल के स्वागत के लिए थॉमस, आइरिस और कुछ दूसरे मित्र हमारे साथ थे। इसलिए वैसे तो जनवरी की शुरुआत बहुत आह्लाददायक रही मगर कुछ समय पहले हुए अम्माजी के देहावसान के दुख की छाया से भी हम पूरी तरह बच नहीं सके। दर्द अभी ताज़ा था और अपने मित्रों के साथ अम्माजी को याद करते हुए कई बार हमारे आँसू निकल पड़ते थे।
इसी कारण इस साल अपरा के जन्मदिन पर हमने कोई बड़ा समारोह आयोजित नहीं किया। फिर भी उसके लिए उपहार खरीदे गए और स्वाभाविक ही वह उन्हें पाकर बहुत खुश हुई। उपहार और सबका अवधान (तवज्जो)-ऐसा कौन सा बच्चा होगा जो इन्हें पाकर खुश नहीं होगा!
फरवरी
फरवरी में आयुर्वेद और योग के हमारे कार्यक्रम शुरू हुए और अपने आश्रम में हमें कुछ समूहों का स्वागत करने का अवसर प्राप्त हुआ। उस समय हमें पुनः वही चिरपरिचित अनुभव हुआ कि अनुचित अपेक्षाएं लेकर आने वाले लोगों को खुश करना हमारे लिए संभव नहीं होता। लेकिन जो लोग पूर्वसूचना देकर आश्रम में आए थे, उन लोगों ने यहाँ बहुत सुखद समय व्यतीत किया और अपने अवकाश से बहुत लाभ भी प्राप्त किया।
फरवरी में ही हमने एक और शुभ कार्य प्रारम्भ किया: अपने स्कूल-भवन की पहली मंज़िल के निर्माण की ओर पहला कदम रखा गया।
मार्च
मेरे लिए मार्च की शुरुआत आश्रम से अलग कुछ अप्रत्याशित व्यस्तता के साथ हुई: मेरा प्रिय मित्र, गोविंद एक अपघात में घायल होकर अस्पताल में भर्ती था। मैं उसका हालचाल लेने रोज आगरा के एक अस्पताल जाया करता था। उसके साथ यह समय बिताना बहुत अच्छा रहा-भले ही इसका कारण बिल्कुल सुखद नहीं था!
मार्च के मध्य में रमोना के पिताजी हमसे मिलने और रमोना का जन्मदिन हमारे साथ मनाने आए। कई साल बाद यह पहली बार था, जब वे इस अवसर पर एकत्र हुए थे और इसलिए यह जन्मदिन सन 2013 का सबसे स्मरणीय अवसर बन गया! वे होली तक यहाँ रुके और थॉमस, आइरिस, सिल्विया, मेलेनी और दूसरे कई मित्रों के साथ उन्होंने भी इस रंगारंग उत्सव का आनंद उठाया। फिर वे हिमालय के आयोजित सफर पर निकल गए!
अप्रैल
अप्रैल में आश्रम आने वालों की संख्या घटने लगी और गर्मियों की शुरुआत के चलते यह स्वाभाविक ही था। इसी माह यशेंदु यूरोप दौरे पर निकले। इसके बावजूद आश्रम में रहते हुए हम कतई बोर नहीं हुए: मेरे और रमोना के लिए अपरा के साथ अपने प्रथम जर्मनी प्रवास की तैयारियों से संबन्धित पर्याप्त व्यस्तताएँ थीं!
मई
इस बीच हमारे स्कूल का काम चल ही रहा था और मई आते-आते उसकी इमारत का आकार स्पष्ट होने लगा। इधर हम अपने, यानी रमोना, अपरा और मेरे, जर्मनी रवाना होने से पहले की आखिरी तैयारियों में लगे हुए थे।
जर्मनी में वीज़बाडन हमारी बेटी के पहले यूरोप दौरे का पहला पड़ाव था। वहाँ कुछ आवश्यक वस्तुओं, जैसे कार-सीट, बच्चा-गाड़ी आदि, की ख़रीदारी करने के उपरांत हम आगे बढ़े। आसपास के नए माहौल और नई-नई चीजों को देखकर अपरा चमत्कृत हो उठी थी और उसे आनंदित देखकर हम भी प्रसन्न हो रहे थे। जब हम उसके जर्मन नाना-नानी के घर पहुंचे तब भी उसका आश्चर्य और उत्तेजना समाप्त नहीं हुए थे।
जून
पूरे जून माह हम जर्मनी में हर जगह घूमे-फिरे और एर्केलेंज में सोनिया और पीटर के यहाँ, लूनेबर्ग में माइकल और आंद्रिया के यहाँ गए। इसके अलावा बाल्टिक सी बीच पर रेगीना और सेलिना से और कई दूसरी जगहों में कई और मित्रों से मुलाक़ात की। अंत में हम वापस आउसबर्ग और वीज़बाडन पहुंचे और कुछ सप्ताह के इस शानदार दौरे के बाद वहाँ से आश्रम (भारत) लौट आए। वाह! ये कुछ सप्ताह इस वर्ष के हमारे सबसे सुखद दिन थे!
क्योंकि यह ब्लॉग कुछ लंबा हो चला है और अभी बहुत कुछ लिखा जाना बाकी है, मैं फिलहाल विराम लेता हूँ और कल साल के अगले छह माह का विवरण लिखूंगा। मैं कामना करता हूँ कि साल के आखिरी माह का यह आखिरी दिन आपके लिए हर्ष और उल्लास से भरा हो और आने वाला नया साल भी आपके लिए सुखद और शुभ हो!
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