पिछले साल पर एक नज़र – जुलाई से दिसंबर 2014 – 1 जनवरी 2015

शहर:
अमृतसर
देश:
भारत

नए साल की पहली सुबह मेरा अभिवादन स्वीकार करें! हमने यहाँ अमृतसर में आज रात सन 2014 से बिदा ली और बड़े शानदार ढंग से सन 2015 में प्रवेश किया। आशा है नए साल की आपकी शुरुआत भी अच्छी रही होगी। अब पिछले साल के बचे हुए महीनों की समीक्षा के साथ मैं इस साल की शुरुआत करना चाहता हूँ:

जुलाई

जब हम कैनेरी द्वीप समूह से वापस आए तो जर्मनी में भी हमारी यात्रा के बहुत से पड़ाव सामने उपस्थित थे। हमें एरकेलेंज में सोनिया और पीटर के यहाँ, लुनेबर्ग में माइकल और आंद्रिया के यहाँ, केम्नित्ज़ में आन्या के यहाँ और दूसरी बहुत सी जगहों पर बहुत से दोस्तों से मिलने जाना था और हम इन सब शहरों और कस्बों में जाकर अपने मित्रों से मिले। मौसम बहुत सुहाना था और इन शहरों, कस्बों, बीचों, खेल के मैदानों, चिड़ियाघरों आदि में जब हम अपरा की मौज-मस्ती देखते थे, जब वह नए-पुराने मित्रों से मिलकर ख़ुशी से झूम उठती थी तो उसे देखना बड़ा आह्लादकारी होता था और हमारा मन भी ख़ुशी से भर उठता था!

इस बीच हमारा संपर्क भारत से लगातार बना हुआ था और बीच-बीच में हम पूर्णेन्दु से वहाँ की ताज़ा जानकारियाँ लेते रहते थे और वह हमें रेस्तराँ की इमारत के निर्माण में हो रही प्रगति के बारे में बताता रहता था-इसके अलावा वह समय भी नज़दीक आ रहा था जब हम उसे अपनी आँखों से देखते!

अगस्त

यशेंदु का जन्मदिन हमने जर्मनी में ही मनाया और उसके तुरंत बाद हम भारत वापस लौटे। यशेंदु न सिर्फ अपने जन्मदिन के तोहफे लेकर वापस आया बल्कि एक जर्मन लड़की, इफा को भी लेकर आया, जिसके साथ वह प्रेम करने लगा था। परिवार में इस नए इजाफे से बहुत से लोगों को बड़ी खुशी हुई!

रेस्तराँ के भवन-निर्माण कार्य की तेज़ प्रगति देखकर हम बहुत खुश हुए। बहुत जल्दी आश्रम के सामने का दृश्य बदल गया था और अब पहचान में ही नहीं आता था!

सितंबर

सितंबर का पूरा माह हमारे आयुर्वेद प्रशिक्षण शिविर के लिए निर्धारित था। शिविर के कार्यक्रमों को सभी सहभागियों ने बहुत पसंद किया; हालांकि रमोना, अपरा और मैं कुछ दिनों के लिए वहाँ से खिसक लिए थे। हम एक हफ्ते के लिए माइकल का जन्मदिन मनाने जर्मनी चले गए थे! जन्मदिन बड़ा शानदार रहा, यह शायद हमारा थोड़ा पागलपन ही था मगर कभी-कभी ऐसा पागलपन ज़रूरी और सुखद होता है!

अक्टूबर

अक्टूबर में कई बार हमारा दिल्ली जाना-आना होता रहा। रेस्तराँ के इंटीरियर डिज़ाइन का सामान, फर्नीचर, बहुत सारे बर्तन भांडे और बहुत सी दूसरी चीज़ें खरीदने में ही सारा अक्टूबर निकल गया। इन व्यस्तताओं के चलते मैंने अपने जन्मदिन की पार्टी स्थगित कर दी-और दीवाली का समारोह सामने था ही!

इफा इस प्रकाश-पर्व का आनंद लेने खास तौर पर यहाँ आई थी और आराम करने आए कुछ मेहमान भी आश्रम में मौजूद थे। अपरा के साथ आश्रम की सजावट का आनंद अभूतपूर्व रहा! वह सारा दिन काम करती रही और हमारे लिए यह एक और अविस्मरणीय समय रहा!

उसके तुरंत बाद ही अपरा का जर्मन परिवार मिलने आया और अपरा ने आसपास की हर चीज़ से और अपनी छोटी सी दुनिया से उन्हें रूबरू कराया!

नवंबर

नवंबर में कुछ दिनों के लिए हमारे आश्रम में एक और बड़ा समूह आया था, जिससे हमें और भी कई लोगों को मित्र बनाने का अवसर प्राप्त हुआ। और जैसे-जैसे रेस्तराँ का काम धीरे-धीरे प्रगति कर रहा था, हमें उसके बारे में सोचने-विचारने का मौका भी मिला कि पूरा निर्माण हो जाने पर हम उसे किस रूप में देखना चाहेंगे।

इस वर्ष नवंबर माह में भी मौसम काफी गरम रहा और थोड़े से मेहमानों के साथ बड़ी शांति से माह का अंत हो गया।

दिसंबर

अंत में दिसंबर की शुरुआत में माइकल और आंद्रिया आश्रम आए! वे कुछ दिन ही यहाँ रहे लेकिन उतना समय ही सघन भावनाओं से ओत-प्रोत और बहुत शानदार रहा!

एक छोटी सी जान ने साल के बचे हुए दिनों को अपनी उपस्थिति से भर दिया। इस छोटी सी, प्यारी सी बच्ची का नाम मोनिका है, जिसने हम सबके दिलों में बहुत बड़ी जगह बना ली है। उसकी कहानी, उसका इलाज और उसकी मदद का विचार हमारे मन में इस कदर हावी थे कि यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि यह माह उसके नाम रहा-और हम भविष्य में भी उसके साथ और उसके लिए बहुत सारा समय बिताएँगे, इसमें कोई शक नहीं!

क्योंकि हमारा रेस्तराँ इस साल बनकर तैयार नहीं हो पाएगा इसलिए स्वाभाविक ही अगले साल भी हमें इस बड़ी परियोजना पर काफी समय व्यतीत करना होगा।

हमें और भी कई शानदार कहानियों, परियोजनाओं और मित्रताओं की आहट अभी से मिलनी शुरू हो गई है और हम 2015 को बड़ी आशाभरी नज़रों से देख रहे हैं। आप सब के लिए भी नया साल शुभ हो, यही कामना है!