सन 2014 का लेखा-जोखा – जनवरी से जून – 31 दिसंबर 2014

मेरे विचार

आज, साल 2014 के आखिरी दिन और कल, नए साल के पहले दिन मैं चाहता हूँ कि अपने व्यक्तिगत जीवन में इस साल किए गए कामों की समालोचना करूँ। ऐसा करना मुझे बहुत पसंद है और अपने ब्लोगों में हर साल मैं ऐसा करता रहा हूँ। आप भी मेरे साथ इसका जायज़ा ले सकते हैं:

जनवरी

हमने साल की शुरुआत अपरा के जन्मदिन की भव्य पार्टी की तैयारी से शुरू की! हमने उसका पहला जन्मदिन धूमधाम से नहीं मनाया था और पिछले साल उसके जन्मदिन से कुछ ही पहले मेरी माँ का देहांत हो गया था इसलिए इस साल हमने उसका जन्मदिन खूब धूमधाम से और ज़ोर-शोर के साथ मनाने का मन बनाया था। पार्टी के दिन को एक बार बदलना पड़ा-क्योंकि मौसम बहुत खराब था-लेकिन बाद में बहुत से यार-दोस्तों और जर्मनी से आए हुए अपरा के नाना के साथ उसका जन्मदिन बहुत शानदार तरीके से मनाया गया।

जनवरी का बाकी का महीना इस साल की हमारी सबसे बड़ी परियोजना के बारे में सोचने-विचारने, योजनाएँ बनाने और उसकी वृहद तैयारियों में बीता।

फरवरी

और फरवरी में थॉमस और आइरिस तथा कई दूसरे मित्र हमारे यहाँ, आश्रम आ गए और हमारी परियोजना का काम शुरू हुआ: हमारे आयुर्वेदिक रेस्तराँ की इमारत का काम! पिलर्स के लिए शुरुआती गड्ढे तभी खुदवाए गए और जल्द ही ऐसा लगने लगा कि आश्रम में एक बड़ा और भव्य परिवर्तन होने जा रहा है!

निश्चय ही आश्रम में योग अवकाश पर मेहमान आते रहे, स्वेच्छा से मदद करने और इसके अलावा और भी कई बातें होती रहीं।

मार्च

इनमें से कुछ मेहमान यहीं रह गए लेकिन जो वापस चले गए उनकी जगह मार्च में और भी कई दूसरे मेहमान आते रहे क्योंकि यह समय भारत घूमने के लिहाज से सबसे अनुकूल होता है। और इसमें आश्चर्य क्या कि इसी माह में होली भी पड़ती है, रंगों का सबसे बड़ा समारोह! हमेशा की तरह इस अवसर पर आश्रम में बहुत बड़ी, रंगीन पार्टी का आयोजन किया गया! इस साल अपरा को होली खेलते देखना और भी सुखद था क्योंकि अब वह थोड़ा बड़ी हो गई है और खुद भी, कुछ ज़्यादा ही, रंगों का मज़ा लेने लगी है!

और एक तरफ आश्रम के सामने गड्ढे कुछ और गहरे होते जा रहे थे तो दूसरी तरफ हमारे रेस्तराँ की इमारत के काम में थोड़ा परिवर्तन हुआ और उसे थोड़ा आगे बढ़ाना पड़ा।

माह के अंत में हमारे आश्रम में बालों के फैशन-विशेषज्ञों का एक दल आया, जिसने सिर और बालों को केंद्र में रखते हुए योग और आयुर्वेद की कक्षाएँ लीं और यही समय था जब कई शानदार मित्रताओं का बीज पड़ा!

अप्रैल

इस माह गर्मी बढ़ती जाती है और मेहमानों का आना कम हो जाता है इसलिए यशेंदु, रमोना, अपरा और मैं जर्मनी जाने की तैयारियों में लग गए। सबसे पहले यशेंदु को जाना था और योजनानुसार वह रवाना हो गया। इसी समय मैं सोच रहा था कि मैं हवाई यात्रा कर भी सकूँगा या नहीं क्योंकि मेरे घुटने का ऑपरेशन हुआ था और वह बहुत दर्द कर रहा था। मज़ेदार बात यह थी कि इसी जगह पर दस साल पहले भी मेरा ऑपरेशन हुआ था! अस्पताल जाना पड़ा और कुछ दिन बाद मैं अपने लिगामेंट के इलाज के लिए दूसरी बार ऑपरेशन टेबल पर पड़ा था। इधर अस्पताल में अपरा धमाचौकड़ी मचाती रही। वह इस नए अनुभव का पूरा मज़ा ले रही थी! उड़ान की तारीखें बदलनी पड़ीं, जर्मनी के कुछ कार्यक्रमों में परिवर्तन करना पड़ा और मैंने अपने इलाज पर पूरा ध्यान लगाया, जिससे जख्म जल्द से जल्द भर सके!

मई

प्रवास पर निकलने की तारीख निकट आने तक मैं भी स्वस्थ होकर जाने के लिए तैयार हो गया! अपने एक क्रच की सहायता से और घुटने के लिए थोड़ा सहारा लेकर मैं बिना किसी तकलीफ के जर्मनी तक की उड़ान पूरी करने में कामयाब रहा। उसके बाद कुछ ही हफ्तों में मैंने बहुत जल्द पर्याप्त शक्ति अर्जित कर ली और अपने दोनों सहारे छोड़ दिए।

जर्मनी में हम इतने खुश थी कि हमने एक लंबी यात्रा का कार्यक्रम बनाया: अपरा, जोकि तब तक हिन्दी अच्छी तरह बोल लेती थी और जर्मन भी पूरी तरह समझने लगी थी मगर बोलने में हिचकती थी और माँ के उकसाने पर ही बोलती थी, जर्मनी आकर अचानक बहुत जर्मन बोलने लगी क्योंकि वहाँ अधिकांश जर्मन लोगों से उसे जर्मन भाषा में ही बात करनी पड़ती थी! उसका जर्मन परिवार, हमारे मित्र-गण और आसपास इतने सारे जर्मन बोलने वाले लोग-जर्मन भाषा पर अधिकार प्राप्त करने के उसके सामने बहुत से अवसर उपलब्ध थे। और हाँ, उस यात्रा में अपरा ने जो धमाचौकड़ी मचाई है, नई जगह पर नए-नए लोगों के साथ जो मस्ती की है, संक्षेप में उसका वर्णन करना असंभव है!

जून

और जून माह में ग्रान कैनेरी के लिए निकलने के बाद अपरा की मौज-मस्ती में पल भर के लिए भी व्यवधान नहीं आया! वहाँ हमारी तीन सप्ताह का कार्यक्रम था और उसके अलावा भी बहुत कुछ था लेकिन फिर भी हमें समुद्र किनारे, बीच पर जाकर समय बिताने का काफी मौका मिलता रहा। यहाँ तककि हमने एक छोटी सी ट्रिप टेनेराइफ की लगा ली और ग्रान कैनेरी के उत्तर में एक ऐसी जगह पर भी गए, जहाँ एक ज़ू में डॉलफिंस और व्हेल का शो होता है और आसपास साफ स्वच्छ पानी में मज़े करने का भी काफी अवसर मिल जाता है।

मैंने वहाँ अपने स्पेनिश शब्दभंडार में कुछ इजाफा भी कर लिया। पहले मैं ‘होला’ शब्द ही जानता था मगर अब ‘वामोस’ यानी ‘चलो चलते हैं’ और ‘वेंगा, वेंगा, वाले, वाले’ यानी ‘सब ठीक है’ आदि शब्द-समूह भी सीख लिए! 🙂

मैं कामना करता हूँ कि साल की यह आखिरी रात आप सभी के लिए सुखमय हो!

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