जीवन अंतर्विरोधों (विसंगतियों) का नाम है और मेरे ब्लॉग्ज उनका आईना हैं! 6 अगस्त 2012

शहर:
वृन्दावन
देश:
भारत

अगर आप शुरू से, यानी सन 2008 से, मेरे ब्लॉग्ज पढ़ते रहे हैं तो आपने गौर किया होगा कि पिछले साढ़े चार साल से उनके कथ्य में क्रमशः परिवर्तन आता गया है। आप देखेंगे कि न सिर्फ लेखन शैली और उनके आकार में बल्कि उनके विषयों में भी बहुत परिवर्तन हुआ है और बहुत से नए विषयों का समावेश भी हुआ है। और जिन विषयों पर मैं पहले भी लिखता रहा हूँ, उनसे संबन्धित मेरे विचारों और रवैयों में भी आप परिवर्तन परिलक्षित करेंगे। मेरे लिए यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है-आखिर परिवर्तन का नाम ही तो जीवन है!

कुछ अर्से से मैं और रमोना इन परिवर्तनों के विषय में बात करते हुए सोचते रहे हैं कि जिन पाठकों ने मेरे सन 2008 के ब्लॉग्ज पढे होंगे वे मेरे विषय में बिल्कुल अलग धारणा बना सकते हैं। वे यह सोच सकते हैं कि मैं उन बातों पर आस्था रखता हूँ जिन पर मैं विश्वास नहीं करता! यानी मैं झूठा हूँ!

जैसे मैंने एक बार पुनर्जन्म के विषय में लिखा था कि मैं पुनर्जन्म में विश्वास तो करता हूँ लेकिन पिछले या अगले जन्म मेरे लिए कोई महत्व नहीं रखते। मैं यह संदेश देना चाहता था कि आपको वर्तमान में रहना चाहिए और पिछले जन्मों में क्या हुआ, इस विषय में जानने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। मैं आज भी यह मानता हूँ कि हमें वर्तमान में जीना चाहिए मगर अब मैं पुनर्जन्म, पिछले या अगले जन्म आदि को कोरी बकवास मानता हूँ-एक अंधविश्वास! यह बात अभी, कुछ माह पहले मैंने अपने एक ब्लॉग में भी लिखी थी!

मेरे पिछले ब्लॉगों में आप विभिन्न जगहों में आयोजित हमारे पूजा समारोहों का विवरण पाएंगे। पहले हम ये सब कर्मकाण्ड विधि-विधान के साथ किया करते थे लेकिन इसी विषय पर कुछ साल बाद के किसी ब्लॉग को पढ़ेंगे तो उसमें लिखा होगा कि लोग भोले-भाले और अंधविश्वासी हैं, ऐसे कर्मकांड ढकोसले हैं, इनसे कोई भला नहीं होने वाला और इन परम्पराओं को जल्द से जल्द त्याग देना चाहिए।

जो पाठक ये ब्लॉग्ज़ एक के बाद पढ़ते हैं, वे सोच सकते हैं कि उनमें काफी अंतर्विरोध है, कि मैं जो आज महसूस कर रहा हूँ, पहले मैंने उसका विपरीत भी लिख रखा है। तारीखों पर नज़र दौड़ाएँ! आज मैं वह नहीं सोच सकता, जो मैं चार साल पहले वाले ब्लॉग लिखते वक़्त सोच रहा था। जीवन लगातार एक परिवर्तन की प्रक्रिया से गुज़रता रहता है और मैं सिर्फ ईमानदार रहना चाहता हूँ और वही कहना चाहता हूँ, जो उस वक़्त मैं सोच रहा हूँ। मैं आपसे ऐसी कोई बात नहीं कह सकता, जो मैं आज से पाँच साल बाद सोच रहा होऊंगा! मैं अपने भीतर आने वाले परिवर्तनों को स्वीकार करता हूँ और मानता हूँ कि मेरे भीतर लगातार परिवर्तन आ रहे हैं। जीवन में घटित उन घटनाओं और परिवर्तनों का मैं स्वागत भी करता हूँ।

मैं सिर्फ धर्म या अपनी आस्थाओं के संबंध में बात कर रहा हूँ, ऐसा नहीं है! मेरी बहुत सी व्यक्तिगत बातों में भी परिवर्तन आया है! एक समय था, जब मैं विवाह नहीं करना चाहता था-आज मैं अपनी पत्नी के साथ सुखपूर्वक रहता हूँ! कुछ समय मैं और मेरी पत्नी चाहते थे कि हमारी कोई संतान न हो-लेकिन अब हमारे पास हमारी प्यारी सी बिटिया है, जिसके साथ हम जीवन का सबसे सुखद समय व्यतीत कर रहे हैं!

मैं अपने जीवन में आने वाले परिवर्तनों को लेकर खुश होता हूँ: दैनिक जीवन के छोटे-मोटे परिवर्तन और बड़े परिवर्तन, जो समय गुजरने के साथ सामने आते हैं। मेरे ब्लॉग्ज मेरे जीवन का और उसमें आने वाले परिवर्तनों का आईना हैं और मुझे इस बात की चिंता करने की ज़रूरत नहीं है कि कोई ऐसी बात न लिखूँ, जिसके विपरीत मुझे बाद में कुछ लिखना पड़े।

आखिर किसी गुरु की तरह मैं दर्शनशास्त्र या सिद्धान्तों का उपदेश आपको नहीं दे हूँ। मैं आपसे किसी बात पर विश्वास करने के लिए नहीं कहता, न यह कहता हूँ कि आप मेरा अनुसरण करें। आपकी तरह मैं भी एक साधारण व्यक्ति हूँ, जिसके विचार आसपास के माहौल और समाज में होने वाली घटनाओं द्वारा प्रभावित होते हैं।

यही कारण है कि किसी विषय पर मेरे विचार बदलते रह सकते हैं और उन्हें यहाँ दर्ज करना मेरा काम है। अगर आप परिवर्तन की इस प्रक्रिया में शामिल होना चाहें तो आपका स्वागत है। मेरे जीवन में आने वाले परिवर्तन की प्रक्रिया को दर्ज करने वाले इस ब्लॉग को एक आलेख की तरह पढ़ें और याद रखें।