मैंने अपने जीवन में परिवर्तन की लंबी यात्रा तय की है और इसमें मेरे दस साल से अधिक खर्च हुए हैं। इस लंबी प्रक्रिया मे बाद मैं आध्यात्मिक गुरु से एक नास्तिक में तब्दील हुआ हूँ। अपनी भावनाओं और वक़्त के तकाजे के अनुसार मैंने सदा से ईमानदारी का दामन थामा है। मैं जड़ नहीं होना चाहता और अपनी जिद पर अड़ा नहीं रहना चाहता और न ही बचपन में जानी-समझी हुई बातों से चिपककर रहना चाहता हूँ। मैंने अपना दिमाग खुला रखा, दुनिया भर में खूब घूम-फिरा, उसे गौर से देखा-समझा है और नतीजतन आज मैं वह हूँ जैसा आपको दिखाई दे रहा हूँ।
इस वेबसाइट पर आप मेरे अतीत के बारे में पढ़ सकते हैं। अगर आप फ़ोटो गैलरी पर नज़र दौड़ाएँ तो उससे भी आपको पता चलेगा और अगर 7 साल से चल रहे मेरे ब्लॉग के पुराने ब्लॉग आपने पढ़े हैं तो भी आपको मुझमें क्रमशः होते रहे परिवर्तनों के प्रमाण मिल जाएँगे। मैंने कुछ भी छिपाया नहीं और स्वाभाविक ही, आज भी आपको मेरे अतीत के चिह्न दिखाई देते होंगे। मैं खुली घोषणा करता हूँ और स्वीकार करता हूँ कि यह मैं हूँ और यही मेरा इतिहास है।
मैं बहुत भावुक व्यक्ति भी हूँ तथा बदलावों से घबड़ाता नहीं बल्कि उन्हें पसंद करता हूँ और कभी जल्दबाजी में भी निर्णय ले लेता हूँ! अधिकांशतः मैं अपने निर्णयों से प्रसन्न रहता हूँ परन्तु कभी-कभार मैं उन पर पछताता भी हूँ. मुझे लगता है कि ये वो क्षण होते हैं जबकि मुझे उनसे अपने अहम को नहीं जोड़ना चाहिए! यदि मुझसे कोई गलती हुई तो उसे स्वीकार भी करना चाहिए।
मैं अपनी गलतियों को स्वीकार करता हूँ और यदि संभव है तो अपने निर्णयों को वापिस लेता हूँ और इस तरह जिन्दगी चलती रहती है।
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