हनीमून पर निकले ब्लॉग पढ़ने वाले नव-दंपति से आश्रम में शानदार मुलाक़ात! 10 फरवरी 2014

आज आश्रम से एक दंपति की बिदाई हुई, जो एक तरह से हमारे लिए एक खास दंपति थे: यह पहले दंपति थे, जिनके लिए हमने हनीमून की पूरी व्यवस्था की! उनके लिए पूरा कार्यक्रम तैयार करके आश्रम में उनकी अगवानी करना हमारे लिए बड़ी खुशी का बायस था, विशेषकर इसलिए कि वे मेरे ब्लॉगों के जरिये हमें पहले से जानते थे।

हमारे युवा मित्र, विनय और उनकी पत्नी, शुभा दक्षिण भारत के शहर बैंगलोर के रहने वाले हैं, जहाँ वे एक अंतर्राष्ट्रीय आईटी कंपनी में कार्यरत हैं। वहीं उनका परिचय हुआ और दोनों आपस में प्रेम करने लगे। दो साल तक उन्होंने साथ में काम किया और आखिर इसी जनवरी में उनका विवाह हो गया। पिछले साल जब उन्होंने हमसे पूछा कि क्या हम उनके हनीमून का इंतज़ाम कर सकते हैं तो हम बड़े खुश हुए और हमने उत्तरी भारत के ठंडे मगर खुशनुमा इलाकों में उनके लिए एक हनीमून यात्रा आयोजित की, जहाँ वे जीवन में पहली बार बर्फ़बारी का लुत्फ़ उठा सकते थे।

हमने उन्हें सलाह दी कि हिमायल की सैर करने के बाद वे हमारे आश्रम होते हुए दिल्ली के लिए रवाना हों, जहां से उन्हें वापसी के लिए हवाई जहाज पकड़ना था। यहाँ से वे आसानी के साथ आगरा जाकर प्रेम की सबसे महानतम निशानी, ताजमहल को देख सकते हैं और हमारे यहाँ आयुर्वेदिक मालिश का आनंद भी उठा सकते हैं।

जब वे अपनी हनीमून यात्रा से वापस आए और हमें चर्चा का मौका मिला तब मुझे पता चला कि कितनी संजीदगी से वे मेरे ब्लॉग पढ़ते रहे हैं! कुछ देर हम विभिन्न विषयों पर बातें करते रहे, उनके और अपने जीवन के विषय में चर्चा हुई और मुझे महसूस हुआ कि यह कितनी सुखद बात है कि आज मैं उन लोगों को जान पा रहा हूँ जो मुझे, मेरे परिवार को और जीवन की महत्वपूर्ण बातों पर मेरे नज़रिये को बहुत पहले से जानते रहे हैं।

उसके लिए जीवन में यह पहला मौका था जब लगातार दो घंटे तक वह किसी का ब्लॉग पढ़ता रहा था, एक-एक प्रविष्टि को क्लिक करके विभिन्न विषयों पर मेरे विचार पढ़ता रहना और उन पर गंभीरतापूर्वक विचार करना। लड़की ने बताया कि वे दोनों रोज़ ही मेरे ब्लॉग पढ़ते और उनमें से कुछ पसंदीदा अंशों को कॉपी-पेस्ट करके अपने-अपने प्रिय कोटेशन्स के रूप में एक दूसरे को भेजते रहते थे।

इन युवा दंपति ने मुझे बताया कि मैं उनसे मिल रहा हूँ जिन्हें मैंने अपने लेखन से प्रभावित किया था। उनके लिए यह अकल्पनीय था कि वे एक दिन रात दस बजे तक बैठकर अपने प्रिय ब्लॉग-लेखक के साथ सुखद चर्चा में निमग्न रहेंगे, उस लेखक के साथ, जिसकी पंक्तियाँ वे रोज़ ही पढ़ा करते थे। मेरे लिए तो यह पुनः इस महान आधुनिक मीडिया, इंटरनेट आदि का पुनरोद्घाटन जैसा ही था, जो संसार भर के लोगों को आसानी के साथ एक दूसरे से जुड़ने की सुविधा मुहैया कराता है।

आज उन्होंने आश्रम से बिदा ली है लेकिन हम सब आश्रमवासी इस नव-दंपति के लिए अशेष शुभकामनाएँ व्यक्त करते हैं कि उनके जीवन में प्रेम सदा-सदा के लिए बना रहे!

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